मारकंडा नदी उफान पर: मानसून की पहली ही बारिश ने खोली प्रशासन के दावों की पोल, कुरुक्षेत्र का कठवा गांव बना टापू, हजारों एकड़ फसल डूबी
कुरुक्षेत्र, 11 जुलाई (अन्नू): पहाड़ी क्षेत्रों में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश का कहर अब मैदानी इलाकों में साफ देखने को मिल रहा है। जिला कुरुक्षेत्र में शाहाबाद स्थित मारकंडा नदी में पहाड़ों से बहकर आया 14,000 क्यूसेक से ज्यादा पानी पहुंच चुका है, जिससे नदी उफान पर है। मारकंडा के इस बढ़े जलस्तर के कारण गांव कठवा सहित आसपास के दो से तीन गांव पूरी तरह जलमग्न हो चुके हैं। बाढ़ जैसे इन हालातों के चलते इन गांवों का एक-दूसरे से संपर्क भी पूरी तरह टूट गया है।
सड़कें जलमग्न, हजारों एकड़ फसल बर्बाद:
बाढ़ का पानी रिहाइशी इलाकों और खेतों की तरफ तेजी से बढ़ रहा है। गांव कठवा को जोड़ने वाली मुख्य सड़क पूरी तरह पानी में डूब चुकी है, जिससे ग्रामीणों का आवागमन बंद हो गया है और पूरा गांव एक टापू में तब्दील नजर आ रहा है। इस अचानक आए पानी की वजह से क्षेत्र की कई हजार एकड़ में लगी फसल जलमग्न हो गई है, जिससे किसानों को भारी नुकसान होने की आशंका है।
कागजी साबित हुए प्रशासन के पुख्ता प्रबंध:
हैरानी की बात यह है कि मानसून की दस्तक से पहले प्रशासन द्वारा बड़े-बड़े दावे किए जा रहे थे कि इस बार बाढ़ से निपटने के लिए पुख्ता प्रबंध किए गए हैं और किसी भी गांव या ग्रामीण को कोई नुकसान नहीं होने दिया जाएगा। लेकिन मानसून की पहली ही भारी बारिश ने प्रशासनिक तैयारियों और दावों की पूरी पोल खोलकर रख दी है। हकीकत इन दावों के बिल्कुल उलट धरातल पर दिखाई दे रही है, जहां हर साल की तरह इस बार भी स्थिति बेकाबू हो चुकी है।
ग्रामीणों में भारी रोष:
बाढ़ की मार झेल रहे ग्रामीणों का आरोप है कि हर साल सरकार और जिला प्रशासन उन्हें बाढ़ की विभीषिका से बचाने के बड़े-बड़े वादे और घोषणाएं करता है, लेकिन जमीनी स्तर पर कोई ठोस काम नहीं किया जाता। ग्रामीणों ने अपना दर्द बयां करते हुए कहा कि हर वर्ष उन्हें इसी तरह भारी आर्थिक नुकसान और मानसिक प्रताड़ना झेलने के लिए बेसहारा छोड़ दिया जाता है, जिसका कोई स्थायी समाधान नहीं निकाला जा रहा।
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