पांडुलिपियों में छिपा इतिहास अब लेगा डिजिटल रूप: संस्कृति मंत्रालय ने शुरू किया ‘ज्ञान भारतम्’ मिशन
जे कुमार पलवल , 8 जून 2026 : भारत की समृद्ध परंपरा, सांस्कृतिक धरोहर और बौद्धिक विकास के महत्वपूर्ण साक्ष्य के रूप में सदियों से सहेजकर रखी गईं प्राचीन पांडुलिपियां, ताड़पत्र और दुर्लभ अभिलेख अब डिजिटल रूप लेने जा रहे हैं। भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय ने हमारी इस ऐतिहासिक विरासत को भावी पीढ़ियों के लिए सुरक्षित करने के उद्देश्य से एक महत्वाकांक्षी पहल ‘ज्ञान भारतम्’ मिशन की शुरुआत की है।
अतिरिक्त उपायुक्त (ADC) उत्सव आनंद ने इस डिजिटल क्रांति और मिशन की रूपरेखा के बारे में विस्तार से जानकारी साझा की है।
राष्ट्रीय पांडुलिपि सर्वेक्षण के तहत तैयार होगा डेटाबेस
अतिरिक्त उपायुक्त उत्सव आनंद ने बताया कि इस मिशन के अंतर्गत पूरे देश में एक व्यापक 'राष्ट्रीय पांडुलिपि सर्वेक्षण' चलाया जा रहा है। इसके तहत देश के कोने-कोने में मौजूद दुर्लभ और प्राचीन पांडुलिपियों को खोजकर उनका एक केंद्रीय डेटाबेस तैयार किया जा रहा है।
इस मिशन के मुख्य उद्देश्य निम्नलिखित हैं:
सर्वेक्षण और प्रलेखन: भारत भर के शैक्षणिक संस्थानों, संग्रहालयों, पुस्तकालयों तथा निजी संग्रहों में उपलब्ध पांडुलिपियों का विस्तृत सर्वेक्षण करना।
संरक्षण और डिजिटलीकरण: समय के प्रभाव, दीमक या पर्यावरण के कारण नष्ट हो रही इन प्राचीन कॉपियों को बचाने के लिए उनका वैज्ञानिक संरक्षण करना और डिजिटल रिकॉर्ड (स्कैन कॉपी) तैयार करना।
सुलभता: इतिहास, संस्कृति और शोध में रुचि रखने वालों के लिए इन डिजिटल दस्तावेजों को आसानी से सुलभ बनाना।
क्या है पांडुलिपि और क्यों है इसका महत्व?
अतिरिक्त उपायुक्त ने पांडुलिपि को परिभाषित करते हुए बताया कि प्राचीन काल में हाथों से लिखे गए ग्रंथों, दस्तावेजों या ताड़पत्रों को पांडुलिपि कहा जाता है। यह हमारी सभ्यता का एक बेहद अहम हिस्सा हैं। इनके माध्यम से ही हमें अपनी प्राचीन संस्कृति, विज्ञान, चिकित्सा, दर्शन और इतिहास से जुड़ी तमाम सटीक जानकारियां मिलती हैं। समय के थपेड़ों से बचाने के लिए इन अमूल्य धरोहरों का डिजिटलीकरण करना आज के समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है।
आम जनमानस से अपील: 75 वर्ष पुरानी पांडुलिपियों की जानकारी करें साझा
अतिरिक्त उपायुक्त उत्सव आनंद ने जिले के नागरिकों, धार्मिक संस्थाओं और इतिहासकारों से इस राष्ट्रीय मिशन में योगदान देने की अपील की है। उन्होंने कहा कि यदि किसी व्यक्ति या परिवार के पास घर में 75 वर्ष या उससे अधिक पुरानी कोई पांडुलिपि, हस्तलिखित ग्रंथ, ताड़पत्र या कोई अन्य अमूल्य प्राचीन विरासत सुरक्षित है, तो वे उसकी जानकारी प्रशासन और संस्कृति मंत्रालय के साथ साझा कर सकते हैं।
नागरिक अपनी इन ऐतिहासिक धरोहरों का विवरण साझा कर ‘ज्ञान भारतम् मिशन’ के भागीदार बन सकते हैं और जिले की प्राचीन विरासत को वैश्विक पटल पर सहेजने में अपना महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं।
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