मथुरा में भारी बवाल: 'फरसा वाले बाबा' की ट्रक से कुचलकर मौत, हाईवे पर पथराव और लाठीचार्ज; देखें क्या है पूरा मामला
उत्तर प्रदेश/मथुरा, 21 मार्च (अन्नू): उत्तर प्रदेश के मथुरा जिले में शनिवार तड़के एक बेहद तनावपूर्ण घटनाक्रम में प्रसिद्ध गौरक्षक चंद्रशेखर बाबा, जिन्हें क्षेत्र में 'फरसा वाले बाबा' के नाम से जाना जाता था, की ट्रक से कुचलकर मौत हो गई। बरसाना के आजनौख गांव में गौशाला चलाने वाले बाबा के बारे में उनके साथियों का दावा है कि उन्हें रात करीब 4 बजे नेशनल हाईवे पर एक ट्रक में गौवंश तस्करी की सूचना मिली थी। सूचना पर बाबा अपने दो साथियों के साथ बाइक से ट्रक का पीछा करने निकले। कोसी और छाता थाना क्षेत्र के बीच जब उन्होंने ट्रक को ओवरटेक कर उसके सामने अपनी बाइक खड़ी की, तो ट्रक चालक ने रफ्तार बढ़ाते हुए उन्हें कुचल दिया और मौके से फरार हो गया। बाबा की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई।
इस घटना की खबर फैलते ही ब्रज क्षेत्र में आक्रोश की आग भड़क उठी। हजारों की संख्या में गौरक्षक और स्थानीय ग्रामीण दिल्ली-मथुरा (NH-44) हाईवे पर जमा हो गए और शव को सड़क पर रखकर जाम लगा दिया। प्रदर्शनकारियों की मांग थी कि हत्या के आरोपियों का तुरंत एनकाउंटर किया जाए। जब पुलिस प्रशासन की टीमें जाम खुलवाने पहुंचीं, तो भीड़ बेकाबू हो गई और पुलिस पर पथराव शुरू कर दिया। इस हिंसा में कई पुलिसकर्मी लहूलुहान हो गए और प्रदर्शनकारियों ने पुलिस की 5 से 6 गाड़ियों के शीशे तोड़कर उनमें तोड़फोड़ की। स्थिति को बिगड़ता देख पुलिस ने हवाई फायरिंग की, आंसू गैस के गोले छोड़े और लाठीचार्ज कर भीड़ को खदेड़ा।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस पूरी घटना का कड़ा संज्ञान लिया है। उन्होंने वरिष्ठ अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि दोषियों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की जाए और किसी भी अपराधी को बख्शा न जाए। घटना के समय राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू भी बवाल वाली जगह से महज 25 किलोमीटर दूर गोवर्धन में मौजूद थीं, जिससे प्रशासन में हड़कंप मच गया। गौ-रक्षकों का आरोप है कि यह एक सोची-समझी साजिश के तहत की गई हत्या है। प्रदर्शनकारियों ने मांग की है कि बाबा को 'शहीद' का दर्जा दिया जाए और पकड़े गए आरोपी को सार्वजनिक रूप से कड़ी सजा दी जाए।
फिलहाल, कोसी और छाता थाना क्षेत्रों में भारी पुलिस बल तैनात है और स्थिति को नियंत्रण में बताया जा रहा है। हाईवे पर लगा करीब 5 किलोमीटर लंबा जाम कड़ी मशक्कत के बाद खुलवाया गया है। समर्थकों के अनुसार, चंद्रशेखर बाबा ब्रज में बेसहारा और घायल गायों की सेवा के लिए एक बड़ी पहचान रखते थे और हमेशा हाथ में फरसा रखने के कारण मशहूर थे। उनके समर्थकों का कहना है कि वे गौतस्करी के खिलाफ हमेशा अग्रिम पंक्ति में रहते थे और इस बार भी वे गौमाता की रक्षा के लिए अपनी जान जोखिम में डालकर निकले थे।
फ़िलहाल पुलिस मामले में जाँच कर रही है
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