बैंक धोखाधड़ी मामले में बड़ी सजा: बैंक ऑफ इंडिया के पूर्व मैनेजर और एक अन्य को 7 साल का कठोर कारावास

नई दिल्ली/भोपाल, 15 मई (अन्‍नू): केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, भोपाल स्थित विशेष सीबीआई अदालत ने बैंक धोखाधड़ी के एक पुराने मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए दो आरोपियों को सजा सुनाई है। अदालत ने बैंक ऑफ इंडिया, मिसरोद शाखा (भोपाल) के तत्कालीन सीनियर ब्रांच मैनेजर पीयूष चतुर्वेदी और एक निजी व्यक्ति मोहन सिंह सोलंकी को दोषी करार देते हुए 7-7 साल के कठोर कारावास (Rigorous Imprisonment) की सजा सुनाई है। इसके साथ ही अदालत ने दोनों दोषियों पर कुल 60,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया है।



साजिश के तहत 30 लाख रुपये का फर्जी लोन

प्रेस रिलीज के मुताबिक, यह पूरा मामला साल 2013 का है, जिसकी जांच सीबीआई ने जनवरी 2016 में बैंक ऑफ इंडिया के जोनल ऑफिस से मिली लिखित शिकायत के बाद शुरू की थी। आरोप था कि तत्कालीन मैनेजर पीयूष चतुर्वेदी ने नियमों को ताक पर रखकर 'मेसर्स आर.जे. एंटरप्राइजेज' के नाम पर जालसाजी से 30 लाख रुपये का टर्म लोन और कैश क्रेडिट लिमिट मंजूर की थी। इस पूरी प्रक्रिया में बैंकिंग नियमों का खुलेआम उल्लंघन कर बैंक के साथ धोखाधड़ी की गई थी।



फर्जी दस्तावेजों से पैसे की हेराफेरी

जांच में खुलासा हुआ कि लोन मंजूर होने के उसी दिन, आरोपियों ने एक बड़ी साजिश को अंजाम दिया। उन्होंने फर्जी और मनगढ़ंत आरटीजीएस (RTGS) फॉर्म और वाउचर का उपयोग करके 'मेसर्स आर.जे. एंटरप्राइजेज' के खाते से 25 लाख रुपये अवैध रूप से निकाल लिए। यह रकम दूसरे आरोपी मोहन सिंह सोलंकी की कंपनी 'मेसर्स सांवरिया मशीन' के खाते में ट्रांसफर कर दी गई। सीबीआई की जांच और चार्जशीट के बाद, अदालत ने दोनों को बैंक को आर्थिक नुकसान पहुंचाने और निजी लाभ कमाने का दोषी पाया और अब उन्हें जेल भेज दिया गया है।


#CBI #BankFraud #BhopalNews #JusticeServed #BankOfIndia #CorruptionCase #BreakingNews #LegalUpdate #DanikKhabar

Previous

'डिजिटल अरेस्ट' के फर्जीवाड़े पर CBI का प्रहार: लॉन्च किया AI हेल्पबोट 'ABHAY', अब तुरंत कर सकेंगे नोटिस की जांच

Next

खेल उपलब्धियों पर वेतनवृद्धि के लिए हरियाणा सरकार के नए निर्देश; प्रतियोगिता खत्म होने के 1 साल के भीतर दावा करना होगा अनिवार्य