ईडी की बड़ी कार्रवाई: इकबाल मिर्ची और उसके परिवार की 700 करोड़ रुपये की संपत्तियां कुर्क, मुंबई से लेकर दुबई तक फैला था साम्राज्य

नई दिल्ली/मुंबई, 19 मई (अन्‍नू): प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा जारी एक आधिकारिक प्रेस रिलीज के अनुसार, केंद्रीय जांच एजेंसी के मुंबई जोनल ऑफिस ने एक बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है। ईडी ने भगोड़ा आर्थिक अपराधी अधिनियम (FEOA), 2018 के कड़े प्रावधानों के तहत दिवंगत गैंगस्टर इकबाल मिर्ची और उसके परिवार से जुड़ी लगभग 700.27 करोड़ रुपये की अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से (Provisionally) कुर्क कर लिया है। ज़ब्त की गई इन संपत्तियों में मुंबई के पॉश इलाके की आलीशान इमारतों से लेकर दुबई की विदेशी संपत्तियां भी शामिल हैं।

मुंबई की प्राइम लोकेशंस और दुबई की विदेशी संपत्तियों पर चला हंटर

ईडी द्वारा जारी प्रेस रिलीज के अनुसार, इस कार्रवाई के अंतर्गत मुंबई के वर्ली इलाके में स्थित तीन सबसे प्रमुख संपत्तियों— राबिया मेंशन, मरियम लॉज और सी व्यू को कुर्क किया गया है, जिनकी अनुमानित कीमत लगभग 497 करोड़ रुपये आंकी गई है। सिर्फ देश ही नहीं, बल्कि विदेशों में फैले इसके नेटवर्क पर भी शिकंजा कसा गया है; जांच एजेंसी ने दुबई (यूएई) में स्थित इकबाल मिर्ची की करीब 203.27 करोड़ रुपये की अचल संपत्तियों को भी इस जब्ती का हिस्सा बनाया है।

मुंबई पुलिस की पुरानी एफआईआर बनी आधार, मनी लॉन्ड्रिंग और ड्रग्स से कमाई थी दौलत

प्रेस रिलीज के मुताबिक, इस मामले की शुरुआत मुंबई पुलिस के अलग-अलग थानों (एम.आर.ए. मार्ग पुलिस स्टेशन, येलो गेट पुलिस स्टेशन, भायखला पुलिस स्टेशन, एंटी-नारकोटिक्स सेल और डीसीबी, सीआईडी) द्वारा स्वर्गीय इकबाल मोहम्मद मेमन उर्फ इकबाल मिर्ची के खिलाफ दर्ज कई पुरानी प्राथमिकियों (FIR) के आधार पर हुई थी। आरोपियों के खिलाफ आईपीसी, आर्म्स एक्ट, टाडा (TADA) और एनडीपीएस (NDPS) एक्ट की गंभीर धाराओं के तहत मामले दर्ज थे। पीएमएलए (PMLA) के तहत की गई जांच में यह साफ हुआ कि इकबाल मिर्ची ड्रग तस्करी, रंगदारी (उगाही), अवैध हथियारों की खरीद-फरोख्त जैसे संगठित अपराधों में लिप्त था। उसने इसी काली कमाई (Proceeds of Crime) को खपाने के लिए भारत और विदेशों में अपने परिवार और सहयोगियों के नाम पर अवैध रूप से संपत्तियां खरीदी थीं।

ट्रस्ट के नाम पर रची गई थी गहरी साजिश, ऐसे सामने आया सच

ईडी की जांच में एक चौंकाने वाला खुलासा यह भी हुआ कि वर्ली की इन विवादित संपत्तियों को साल 1986 में मेसर्स रॉकसाइड एंटरप्राइजेस के माध्यम से 'सर मोहम्मद यूसुफ ट्रस्ट' द्वारा महज 6.50 लाख रुपये में खरीदा गया था। कागजों पर भले ही यह संपत्ति ट्रस्ट के नाम पर दिख रही थी, लेकिन इसका असल मालिकाना हक और पूरा नियंत्रण इकबाल मिर्ची और उसके परिवार के पास ही था। जांच में स्थापित हुआ है कि इस ट्रस्ट ने इकबाल मिर्ची के साथ मिलकर एक गहरी साजिश रची, जिसके तहत कोर्ट के सामने झूठे तथ्य पेश किए गए और जरूरी सबूतों को छुपाया गया ताकि इन संपत्तियों को पहले की कुर्की की कार्रवाई से बचाया जा सके।

दुबई के नामी होटल और रियल एस्टेट प्रोजेक्ट्स में लगाया अपराध का पैसा

आगे की जांच से पता चला है कि अपराध से कमाए गए इस काले धन को दुबई में निवेश किया गया था। इस पैसे का उपयोग होटल मिडवेस्ट अपार्टमेंट (दुबई) और कॉर्पोरेट बे व डीईसी टावर्स (दुबई) में स्थित 14 अन्य रियल एस्टेट यूनिट्स को खरीदने के लिए किया गया। ये सभी संपत्तियां इकबाल मिर्ची के बेटे आसिफ इकबाल मेमन और उसके परिवार के सदस्यों के नाम पर दर्ज थीं।

कोर्ट ने आरोपियों को घोषित किया है भगोड़ा, आगे की जांच जारी

प्रेस रिलीज के अंत में बताया गया है कि ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग के इस गंभीर मामले में मुंबई की माननीय विशेष पीएमएलए अदालत के समक्ष मुख्य और सप्लीमेंट्री चार्जशीट (अभियोजन शिकायत) दायर की है। यह शिकायत आसिफ इकबाल मेमन, जुनैद इकबाल मेमन, हाजरा इकबाल मेमन और अन्य के खिलाफ दाखिल की गई है। बता दें कि विशेष अदालत ने 26 फरवरी 2021 को अपने एक आदेश के जरिए आसिफ, जुनैद और हाजरा इकबाल मेमन को भगोड़ा आर्थिक अपराधी अधिनियम, 2018 के तहत 'भगोड़ा आर्थिक अपराधी' घोषित कर दिया था। जांच एजेंसी ने साफ किया है कि इस पूरे सिंडिकेट को लेकर आगे की कानूनी तफ्तीश अभी भी जारी है।

#EDAction #IqbalMirchi #MoneyLaundering #MumbaiNews #DubaiRealEstate #EnforcementDirectorate #CrimeNews #FEOA2026 #DanikKhabar

Previous

आज 19 मई का इतिहास

Next

अंबाला छावनी नागरिक अस्पताल (GH) के डॉक्टरों का कमाल: 'सिटस इन्वर्सस टोटलिस' जैसी दुर्लभ बीमारी से पीड़ित मरीज का दूरबीन विधि से सफल ऑपरेशन