CBI का बड़ा एक्शन: 119 करोड़ से अधिक के दो बैंक घोटालों में मुंबई और अहमदाबाद के 7 ठिकानों पर छापेमारी

नई दिल्ली, 22 मई (अन्‍नू): देश की शीर्ष जांच एजेंसी केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने बैंकिंग धोखाधड़ी और वित्तीय अपराधों के खिलाफ एक बड़ी राष्ट्रव्यापी कार्रवाई की है। सीबीआई द्वारा जारी आधिकारिक प्रेस रिलीज के अनुसार, जांच एजेंसी ने 119 करोड़ रुपये से अधिक के दो अलग-अलग बैंक फ्रॉड मामलों में मुंबई और अहमदाबाद शहरों में स्थित कुल 7 ठिकानों पर एक साथ छापेमारी (सर्च ऑपरेशन) की है। यह कार्रवाई दो निजी कंपनियों— मैसर्स श्री हरि एक्सट्रूजन प्राइवेट लिमिटेड और मैसर्स जय फॉर्मूलेशन लिमिटेड के खिलाफ दर्ज मुकदमों के आधार पर की गई है।

पहला मामला: पंजाब नेशनल बैंक को लगाया 61.98 करोड़ का चूना

प्रेस रिलीज के मुताबिक, पहला मामला मैसर्स श्री हरि एक्सट्रूजन प्राइवेट लिमिटेड से जुड़ा है। इस कंपनी ने पंजाब नेशनल बैंक (PNB) से कैश क्रेडिट और टर्म लोन की सुविधाएं ली थीं, जिसमें बाद में धोखाधड़ी करते हुए बैंक को 61.98 करोड़ रुपये का भारी नुकसान पहुंचाया गया।

सीबीआई की जांच में सामने आया है कि कर्जदारों ने लोन के फंड का बड़े पैमाने पर दुरुपयोग किया। उन्होंने इस पैसे को असुरक्षित लोन देने, अपनी ही अन्य सहयोगी कंपनियों (सिस्टर कंसर्न्स) में ट्रांसफर करने और मुख्य बैंक को बिना बताए सेल्स रूट करने जैसी धोखाधड़ी की गतिविधियों में इस्तेमाल किया। इस मामले में मुंबई की विशेष सीबीआई अदालत से सर्च वारंट लेकर कंपनी के निदेशकों (Directors) के आवासीय परिसरों पर छापेमारी की गई, जहां से कई आपत्तिजनक दस्तावेज जब्त हुए हैं।

दूसरा मामला: स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के साथ 57.05 करोड़ की धोखाधड़ी

सीबीआई द्वारा जारी प्रेस रिलीज के अनुसार, दूसरा मामला मैसर्स जय फॉर्मूलेशन लिमिटेड का है। इस कंपनी ने देश के सबसे बड़े सरकारी बैंक स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) के साथ फंड-बेस्ड और नॉन-फंड-बेस्ड क्रेडिट सुविधाओं के नाम पर 57.05 करोड़ रुपये की हेराफेरी की।

जांच में खुलासा हुआ है कि कंपनी के कर्ताधर्ताओं ने बैंक से लोन हासिल करने के लिए झूठे और फर्जी बही-खाते (बुक्स ऑफ अकाउंट्स) तैयार किए। इसके बाद बैंक से मिले लोन के फंड को मुख्य बिजनेस में लगाने के बजाय दूसरे खातों में डायवर्ट (पार कर) दिया। इस मामले में अहमदाबाद की माननीय अदालत से वारंट हासिल कर कंपनी के निदेशकों के ठिकानों पर सघन तलाशी ली गई।

कुल 119.03 करोड़ का नुकसान, डिजिटल डिवाइस और दस्तावेज जब्त

सीबीआई की इस संयुक्त छापेमारी में दोनों कंपनियों के ठिकानों से बड़ी मात्रा में महत्वपूर्ण और आपत्तिजनक दस्तावेज, वित्तीय रिकॉर्ड और डिजिटल डिवाइस बरामद किए गए हैं। जांच एजेंसी के अनुसार, इन दोनों मामलों में सरकारी क्षेत्र के बैंकों (Public Sector Banks) को कुल 119.03 करोड़ रुपये का सीधा और गलत तरीके से नुकसान पहुंचाया गया है। सीबीआई ने स्पष्ट किया है कि दोनों ही मामलों में जांच अभी सरगर्मी से जारी है और इस वित्तीय घोटाले की तह तक जाने के लिए अन्य कड़ियों को जोड़ा जा रहा है।

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