प्रवर्तन निदेशालय (ED) की बड़ी कार्रवाई: 9.29 करोड़ की संपत्ति कुर्क, निवेशकों के साथ 2,467 करोड़ की धोखाधड़ी का मामला

मुंबई, 22 अप्रैल (अन्‍नू): प्रवर्तन निदेशालय (ED) के मुंबई आंचलिक कार्यालय ने धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA), 2002 के तहत एक महत्वपूर्ण कार्रवाई की है। 18-19 अप्रैल, 2026 को ED ने 9.29 करोड़ रुपये मूल्य की छह अचल संपत्तियों पर कब्ज़ा कर लिया है। ये संपत्तियां मुंबई के खारघर और पुणे में स्थित हैं, जो सुरेश कुटे, अर्चना कुटे और उनसे जुड़ी संस्थाओं के नाम पर दर्ज हैं। इससे पहले, इन संपत्तियों को सितंबर 2024 में जारी एक अंतरिम कुर्की आदेश के माध्यम से अस्थायी रूप से कुर्क किया गया था, जिसकी पुष्टि मार्च 2025 में न्यायाधिकरण द्वारा की गई थी।



क्या है पूरा मामला?


यह मामला महाराष्ट्र के विभिन्न पुलिस स्टेशनों में दर्ज एफआईआर से जुड़ा है, जो 'ज्ञानराधा मल्टीस्टेट को-ऑपरेटिव क्रेडिट सोसाइटी लिमिटेड' द्वारा निवेशकों के साथ की गई धोखाधड़ी पर आधारित है। सोसाइटी ने 12% से 14% तक के आकर्षक रिटर्न का वादा करके निवेशकों को अपनी योजनाओं में निवेश करने के लिए प्रेरित किया था, लेकिन परिपक्वता अवधि पूरी होने पर निवेशकों को या तो बहुत कम भुगतान किया गया या बिल्कुल भी भुगतान नहीं मिला, जिससे उन्हें भारी वित्तीय नुकसान उठाना पड़ा।



फंड का दुरुपयोग: 2,467 करोड़ रुपये का गबन


ED की गहन जांच में यह खुलासा हुआ है कि सोसाइटी के फंड का एक बड़ा हिस्सा—लगभग 2,467 करोड़ रुपये—सुरेश कुटे और अर्चना कुटे के नियंत्रण वाले 'कुटे समूह' की कंपनियों को कथित 'ऋण' के रूप में ट्रांसफर किया गया था। जांच में सामने आया कि ये लेनदेन बिना किसी उचित दस्तावेजीकरण, कोलेटरल (संपार्श्विक सुरक्षा) या अंतिम उपयोग के प्रमाण के किए गए थे। इन पैसों का इस्तेमाल वैध व्यावसायिक गतिविधियों के बजाय व्यक्तिगत लाभ या गैर-संबंधित व्यावसायिक हितों के लिए किया गया।


गिरफ्तारियां और अब तक की कार्रवाई


इस मामले में ED ने अब तक कुल 1,627.86 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त या फ्रीज की है। इससे पहले सुरेश कुटे को गिरफ्तार किया जा चुका है और उनके खिलाफ विशेष अदालत में अभियोजन शिकायत दायर की जा चुकी है। हाल ही में, 2 मार्च 2026 को अर्चना कुटे को भी गिरफ्तार किया गया था, जो फिलहाल न्यायिक हिरासत में हैं।

ED का स्पष्ट कहना है कि संपत्ति पर कब्ज़ा करने का यह नवीनतम कदम PMLA के प्रावधानों के तहत अपराध से प्राप्त धन को सुरक्षित करने और अवैध रूप से अर्जित संपत्तियों के हस्तांतरण या बिक्री को रोकने के लिए उठाया गया है।



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