18/05/26

दिल्ली पुलिस का बड़ा एक्शन: अंगूठा काटकर लूटपाट करने वाला फरार इनामी अपराधी बिहार से गिरफ्तार

नई दिल्ली, 18 मई (अन्‍नू): दिल्ली पुलिस द्वारा जारी प्रेस रिलीज के अनुसार, क्राइम ब्रांच की एनडीआर (NDR) टीम ने साल 2020 से फरार चल रहे एक खूंखार और वांछित अपराधी को गिरफ्तार करने में बड़ी सफलता हासिल की है। पकड़े गए आरोपी की पहचान 70 वर्षीय ब्रह्मदेव भगत के रूप में हुई है, जो मूल रूप से पूर्णिया, बिहार का रहने वाला है। आरोपी पर द्वारका सेक्टर-23 थाने में बंधक बनाने, बेरहमी से मारपीट करने, लूटपाट करने और पीड़ित के दोनों अंगूठे काटने का गंभीर आरोप है। अदालत द्वारा दिसंबर 2025 में उसे भगोड़ा (Proclaimed Offender) घोषित किया जा चुका था, जिसके बाद अब उसे बीएनएसएस (BNSS) की धारा 35(3) के तहत दबोचा गया है।

क्या था पूरा मामला?

यह खौफनाक वारदात 17 मार्च 2020 की है। शिकायतकर्ता सुरिंदर नंदा, जो एक इवेंट मैनेजर हैं, उन्हें एक बड़ी पार्टी की बुकिंग के सिलसिले में एक फोन आया था। उन्होंने अपने मैनेजर कपिल चड्ढा को बातचीत के लिए द्वारका भेजा। वहां मौजूद लोगों ने सुरिंदर नंदा से खुद मिलने की जिद की, जिसके बाद सुरिंदर अपने ड्राइवर के साथ इनोवा कार से द्वारका सेक्टर-23 पहुंचे। जैसे ही वे बताए गए पते पर मकान के अंदर दाखिल हुए, वहां पहले से मौजूद उनके पूर्व सब्जी सप्लायर ब्रह्मदेव भगत और उसके तीन साथियों ने उन पर लाठी-डंडों से हमला कर दिया। आरोपियों ने चाकू की नोक पर उनसे एक हीरे की अंगूठी और पर्स से 27,000 रुपये लूट लिए।

जबरन दस्तखत कराए और काट दिए दोनों अंगूठे

हमले के दौरान मुख्य आरोपी ब्रह्मदेव भगत ने सुरिंदर नंदा को जान से मारने की धमकी दी। उसने मौत का खौफ दिखाकर सब्जी के कथित बकाए के रूप में 11 लाख रुपये के भुगतान के दस्तावेजों पर सुरिंदर से जबरन हस्ताक्षर करवा लिए, जबकि खातों के अनुसार ऐसा कोई बकाया नहीं था। इसके बाद क्रूरता की सारी हदें पार करते हुए आरोपी ब्रह्मदेव भगत ने चाकू से सुरिंदर नंदा के दोनों अंगूठे काट दिए और उन्हें गंभीर रूप से घायल कर दिया। वारदात के बाद आरोपियों ने दोनों को छोड़ दिया, जिसके बाद पीड़ित ने दीनदयाल उपाध्याय (DDU) अस्पताल पहुंचकर पुलिस को सूचना दी और 18 मार्च 2020 को मामला दर्ज किया गया।

पुलिस की कार्रवाई और पूर्णिया में बिछाया जाल

इस मामले में स्थानीय पुलिस ने तीन सह-आरोपियों (जितेंद्र, अमरदीप और गौतम) को पहले ही गिरफ्तार कर लिया था, लेकिन मुख्य आरोपी ब्रह्मदेव लगातार ठिकाने बदल रहा था। दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच के एसीपी उमेश बर्थवाल के नेतृत्व और इंस्पेक्टर योगेश व विनोद यादव की देखरेख में एसआई दिपेंद्र, हेड कांस्टेबल राम निवास और महिला कांस्टेबल ज्ञानवती सहित एक विशेष टीम का गठन किया गया। 15 मई 2026 को हेड कांस्टेबल राम निवास को गुप्त सूचना मिली कि आरोपी बिहार के पूर्णिया में छिपा हुआ है। पुलिस टीम ने तुरंत पूर्णिया पहुंचकर जाल बिछाया और तकनीकी सर्विलांस की मदद से आरोपी ब्रह्मदेव भगत को धर दबोचा। पूछताछ में उसने अपना गुनाह कबूल कर लिया है।

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