कुरुक्षेत्र में महाशिवरात्रि की धूम: 56 हजार लीटर गंगाजल से संगमेश्वर महादेव का अभिषेक, मध्यरात्रि में होगी भव्य भस्म आरती
हरियाणा/कुरुक्षेत्र, 15 फ़रवरी (अन्नू): धर्मनगरी कुरुक्षेत्र के पिहोवा स्थित प्राचीन संगमेश्वर महादेव मंदिर (अरुणाय) में महाशिवरात्रि का पर्व बेहद हर्षोल्लास के साथ मनाया जा रहा है। इस पावन अवसर पर महादेव के अभिषेक के लिए हरिद्वार की हर की पौड़ी से विशेष रूप से 56 हजार लीटर गंगाजल लाया गया है। हरियाणा और पंजाब समेत उत्तर भारत के विभिन्न राज्यों से करीब 5 लाख श्रद्धालुओं के पहुंचने का अनुमान है। भक्तों की सुविधा के लिए मंदिर के भीतर और बाहर बड़े टैंकर स्थापित किए गए हैं, जहाँ से श्रद्धालु नि:शुल्क गंगाजल लेकर बाबा भोलेनाथ का जलाभिषेक कर रहे हैं।
इस बार मंदिर प्रबंधन ने तकनीक का भी सहारा लिया है। गंगाजल के टैंकों में आधुनिक गेज सिस्टम लगाया गया है, जिसे एक मोबाइल ऐप के जरिए नियंत्रित किया जा रहा है। यह ऐप न केवल जल के स्तर की निगरानी करता है, बल्कि जल की शुद्धता की जानकारी भी देता है। जैसे ही टैंक में पानी 100 लीटर से कम होता है, सिस्टम ऑटोमैटिक अलर्ट भेज देता है। बुजुर्गों, दिव्यांगों और कांवड़ियों के लिए गेट नंबर-3 से सीधे प्रवेश की व्यवस्था की गई है, ताकि उन्हें लंबी कतारों में न लगना पड़े। भीड़ बढ़ने की स्थिति में विशेष 'जलहरी' के माध्यम से बाहर से ही जल चढ़ाने का विकल्प भी रखा गया है।
महाशिवरात्रि पर चार प्रहर की विशेष पूजा आयोजित की जा रही है, जिसमें मध्यरात्रि की आरती आकर्षण का केंद्र होगी। उज्जैन के महाकाल मंदिर की तर्ज पर यहाँ 21 किलो शुद्ध भस्म से एक घंटे तक विशेष भस्म आरती की जाएगी। इस भस्म को एक महीने की कड़ी मेहनत के बाद गाय के गोबर के उपलों से तैयार कर कपड़े से छानकर शुद्ध किया गया है। आरती के दौरान कुछ समय के लिए अभिषेक रोक दिया जाएगा, जिसे आरती संपन्न होते ही पुनः शुरू कर दिया जाएगा। व्यवस्था बनाए रखने के लिए सेवादल के 500 स्वयंसेवक मुस्तैद हैं।
संगमेश्वर महादेव मंदिर का इतिहास और मान्यताएं भी अद्भुत हैं। महंत विश्वनाथ गिरी के अनुसार, यहाँ का शिवलिंग 'स्वयंभू' है, जिसे प्राचीन काल में महात्मा गणेश गिरी ने खोजा था। मंदिर के चमत्कारों के बारे में कहा जाता है कि यहाँ दूध से कभी मक्खन नहीं निकाला जाता और न ही परिसर में चारपाई का उपयोग होता है। अरुणा, वरुणा और सरस्वती नदियों के संगम पर स्थित होने के कारण इन्हें 'संगमेश्वर' कहा जाता है। श्री पंचायती अखाड़ा महानिर्वाणी की देखरेख में आयोजित इस महाकुंभ जैसे मेले ने पूरी धर्मनगरी को शिवमय कर दिया है।
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