भारत और उज्बेकिस्तान सदियों पुराने ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और सभ्यतागत संबंध साझा करते हैं: लोकसभा अध्यक्ष
आरएस अनेजा, 5 अगस्त नई दिल्ली - लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने आज कहा कि भारत और उज्बेकिस्तान सदियों पुराने ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और सभ्यतागत संबंधों से बंधे हुए हैं, जो उनकी अटूट मित्रता का मजबूत आधार हैं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि बढ़ते राजनीतिक विश्वास, बढ़ते व्यापार और निवेश तथा जन-जन के बीच आदान-प्रदान में वृद्धि से आने वाले वर्षों में द्विपक्षीय साझेदारी और मजबूत होगी।
बिरला ने ये बातें संसद भवन में उज्बेकिस्तान के विदेश मंत्री बख्तियार सैदोव से मुलाकात के दौरान कही। दोनों नेताओं ने भारत-उज्बेकिस्तान संबंधों पर व्यापक चर्चा की, जिसमें संसदीय सहयोग, व्यापार और निवेश, शिक्षा, संस्कृति और पारस्परिक क्षेत्रीय और वैश्विक महत्व के मुद्दों पर विशेष बल दिया गया।
बिरला ने भारत की लोकतांत्रिक परंपराओं की चर्चा करते हुए कहा कि विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र के रूप में भारत में एक जीवंत संसदीय प्रणाली है जो यहां के लोगों की आकांक्षाओं और विविधता को प्रभावी ढंग से प्रतिबिंबित करती है। उन्होंने कहा कि 543 सदस्यीय लोकसभा देशभर के लाखों नागरिकों का प्रतिनिधित्व करती है और भारत की बहुदलीय व्यवस्था विभिन्न दृष्टिकोणों और रचनात्मक बहस के लिए समान अवसर प्रदान करती है।
बिरला ने संस्था के कामकाज का उल्लेख करते हुए बख्तियार सैदोव को बताया कि संसद की बैठक प्रतिवर्ष तीन सत्रों में होती है और वर्तमान मानसून सत्र में राष्ट्रीय महत्व के कई मुद्दों पर सक्रिय रूप से विचार-विमर्श चल रहा है।
बिरला ने अवसंरचना विकास, डिजिटल नवाचार, प्रौद्योगिकी, कनेक्टिविटी, निवेश और व्यापार में भारत की महत्वपूर्ण उपलब्धियों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि भारत के युवा वैश्विक स्तर पर नेतृत्व की भूमिकाएं तेजी से निभा रहे हैं और प्रमुख विश्वविद्यालयों एवं अंतरराष्ट्रीय संस्थानों के साथ सहयोग का विस्तार जारी है। मार्च 2026 में गठित भारत-उज़्बेकिस्तान संसदीय मैत्री समूह का उल्लेख करते हुए बिरला ने विश्वास व्यक्त किया कि यह पहल विधायी कार्य कलापों को नई गति प्रदान करेगी और आर्थिक, शैक्षिक, सांस्कृतिक तथा दोनों देशों के लोगों के बीच परस्पर संबंधों को और गहरा करेगी।
बिरला ने अप्रैल 2025 में ताशकंद में आयोजित अंतर-संसदीय संघ (आईपीयू) की 150वीं सभा में अपनी सहभागिता को याद करते हुए उज्बेकिस्तान के राष्ट्रपति श्री शावकत मिर्ज़ियोयेव, सीनेट की अध्यक्ष सुश्री तंज़िला नरबायेवा और विधायी कक्ष के अध्यक्ष श्री नुरिद्दीन इस्माइलोव के साथ हुई अपनी मुलाकातों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इन उच्च स्तरीय यात्राओं ने संसदीय सहयोग की नींव मजबूत की है। द्विपक्षीय संबंधों की निरंतर प्रगति पर संतोष व्यक्त करते हुए श्री बिरला ने आशा व्यक्त की कि वर्तमान यात्रा दोनों देशों के बीच व्यापक साझेदारी को और मजबूत करेगी।
बख्तियार सैदोव ने भारत के साथ बहुआयामी साझेदारी को और मजबूत करने के प्रति उज्बेकिस्तान की दृढ़ प्रतिबद्धता को दोहराते हुए कहा कि ताशकंद राजनीतिक, आर्थिक और संसदीय सहयोग के विस्तार को अत्यधिक महत्व देता है। भारत की सशक्त लोकतांत्रिक परंपराओं की सराहना करते हुए उन्होंने कहा कि विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र के विधायी अनुभव से उज्बेकिस्तान को अत्यधिक लाभ होगा। श्री सैदोव ने इस बात पर बल दिया कि संसदीय सहभागिता में वृद्धि व्यापक रणनीतिक साझेदारी को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण योगदान देगी। उन्होंने व्यापार, निवेश, संयुक्त परियोजनाओं और उभरते सेक्टरों में सहयोग बढ़ाने के लिए एक साझा विज़न का आह्वान किया।
इस अवसर पर बख्तियार सैदोव ने ओम बिरला को एक विशेष स्मारक प्रकाशन भेंट किया, जिसमें उज्बेकिस्तान द्वारा आयोजित अंतर-संसदीय संघ की 150वीं सभा का विस्तृत विवरण दिया गया था।
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