24/06/26

करनाल कुंजपुरा एफसीआई गोदाम घोटाला: गेहूं चोरी और बर्बादी मामले में नया मोड़, आरोपी अधिकारियों से ही होगी करोड़ों के नुकसान की वसूली

करनाल, 24 जून (अन्‍नू): करनाल जिले के कुंजपुरा स्थित भारतीय खाद्य निगम (FCI) के गोदाम में गेहूं के स्टॉक में हुई भारी कमी और अनाज की बर्बादी के मामले ने अब एक नया और बेहद गंभीर मोड़ ले लिया है। विभागीय उच्च स्तरीय जांच में यह पूरी तरह साफ हो गया है कि इस महाघोटाले और लापरवाही से सरकार को हुए वित्तीय नुकसान की पूरी जिम्मेदारी संबंधित अधिकारियों पर ही तय की जाएगी और उन्हीं की जेब से पाई-पाई की रिकवरी (वसूली) होगी।

गोदाम के अंदर रखे गेहूं के गुप्त स्टॉक की जांच शुरू होने के बाद अब नुकसान और चोरी का यह आंकड़ा कई गुना और बढ़ने की आशंका गहरा गई है।

पुरानी जांच कमेटी की बड़ी लापरवाही उजागर: अंदर का स्टॉक किया था नजरअंदाज

इस पूरे मामले में प्रशासनिक और जांच कमेटी की एक बड़ी विवशता या लापरवाही भी खुलकर सामने आई है। करीब एक साल पहले गठित की गई सरकारी जांच कमेटी ने गोदाम का निरीक्षण तो किया था, लेकिन तब अधिकारियों ने केवल बाहर खुले प्लेटफॉर्म (कैप) पर रखे गेहूं के कट्टों की ही गिनती करके खानापूर्ति कर दी थी। गोदाम के बंद कमरों के अंदर रखे विशाल स्टॉक को पूरी तरह से नजरअंदाज कर दिया गया।

अब जब मुख्यालय के कड़े रुख के बाद गोदाम के अंदरूनी स्टॉक की सघन जांच शुरू की गई, तो वहां भी गेहूं के कट्टों में भारी कमी (शॉर्टेज) पाई गई है, जिसने पूरे महकमे में हड़कंप मचा दिया है।

इन दो अधिकारियों पर गिरी गाज, डीएफएससी ने की कार्रवाई की सिफारिश

जिला खाद्य एवं आपूर्ति नियंत्रक (DFSC) मुकेश कुमार ने प्राथमिक जांच के आधार पर स्पष्ट कर दिया है कि जिस भी अधिकारी के कार्यकाल में जितना गेहूं गायब या खराब हुआ है, उसकी भरपाई उसी से की जाएगी। उन्होंने फिलहाल दो मुख्य अधिकारियों के नाम और उनके खिलाफ सख्त विभागीय कार्रवाई की सिफारिश रिपोर्ट बनाकर चंडीगढ़ मुख्यालय भेज दी है:

1. सेवानिवृत्त निरीक्षक अशोक शर्मा (करीब 4 हजार कट्टे गायब)

डीएफएससी मुकेश कुमार के अनुसार, जब कुंजपुरा गोदाम की कमान निरीक्षक अशोक शर्मा के हाथों में थी, तब जांच के दौरान रिकॉर्ड से करीब 4,000 गेहूं के कट्टे कम पाए गए थे। इस गंभीर गबन को लेकर उनके खिलाफ पहले ही आपराधिक मामला (FIR) दर्ज किया जा चुका है और उन्हें सस्पेंड कर दिया गया था। निलंबन अवधि के दौरान ही वे रिटायर भी हो चुके हैं। लेकिन विभाग ने तय किया है कि सेवानिवृत्ति के बावजूद उस समय की कमी की पूरी रिकवरी अशोक शर्मा की पेंशन व फंड से की जाएगी।

2. एएफएसओ मुकेश गुप्ता (लापरवाही से गेहूं खराब करने का आरोप)

अशोक शर्मा के बाद इस गोदाम का चार्ज एएफएसओ (AFSO) मुकेश गुप्ता को सौंपा गया था। आरोप है कि मुकेश गुप्ता के कार्यकाल के दौरान गेहूं के वैज्ञानिक रखरखाव (Maintenance) में घोर लापरवाही बरती गई, जिसके चलते गोदाम में रखा हजारों क्विंटल कीमती गेहूं सड़कर बर्बाद हो गया। विभाग ने साफ किया है कि इस लापरवाही से हुए नुकसान की भरपाई मुकेश गुप्ता से ही रिकवर की जाएगी।

अशोक कुमार की भूमिका और एफसीआई बिलों की स्क्रूटनी

जांच का दायरा जैसे-जैसे बढ़ रहा है, इसमें कड़ियों से कड़ियां जुड़ती जा रही हैं। अब तक की पड़ताल में एक अन्य अधिकारी अशोक कुमार की संदिग्ध भूमिका भी सामने आई है। खाद्य एवं आपूर्ति विभाग ने अब सीधे एफसीआई (FCI) से आधिकारिक जवाब तलब किया है कि गोदाम से गेहूं के उठान (Loading/Lifting) के समय किन-किन अधिकारियों ने रिलीज ऑर्डर्स और बिलों पर हस्ताक्षर (Sign) किए थे। विभाग का कहना है कि यदि जांच में एएफएसओ या उससे उच्च स्तर के अन्य अधिकारियों की संलिप्तता के सबूत मिलते हैं, तो उन्हें भी इस केस में सह-आरोपी बनाया जाएगा।

सच्चाई उगलवाएगी कांटा-तौल: 9500 कट्टों की दोबारा होगी री-वेमेंट

घोटाले के वास्तविक और अंतिम आंकड़े तक पहुंचने के लिए विभाग ने अब एक बड़ा फैसला लिया है। गोदाम परिसर के भीतर और बाहर बचे हुए करीब 9,500 गेहूं के कट्टों की दोबारा से लाइव तौल (Re-weighment) करवाई जाएगी।

यह पूरी प्रक्रिया डीएफएससी विभाग की विशेष निगरानी टीम और वीडियोग्राफी के साए में पूरी होगी। इस फाइनल तौल के बाद यह पूरी तरह शीशे की तरह साफ हो जाएगा कि:

  • वर्तमान में वास्तविक और भौतिक स्टॉक (Physical Stock) कितना बचा है?

  • कुल कितना गेहूं पूरी तरह सड़कर कबाड़ हो चुका है?

  • कागजी रिकॉर्ड और जमीनी हकीकत के बीच कुल कितने कट्टों का अंतर (चोरी) है?

तथ्यों के आधार पर होगी कड़ी कार्रवाई: डीएफएससी करनाल डीएफएससी मुकेश कुमार का कहना है कि यह एक बेहद संवेदनशील मामला है और पूरी जांच पूरी तरह से वैज्ञानिक व दस्तावेजी तथ्यों के आधार पर आगे बढ़ाई जा रही है। अंतिम री-वेमेंट रिपोर्ट आने के बाद रिकवरी की सटीक राशि तय कर ली जाएगी। फिलहाल एक सस्पेंड/रिटायर्ड इंस्पेक्टर और एक मौजूदा एएफएसओ को मुख्य रूप से जिम्मेदार पाया गया है। मुख्यालय के आदेश मिलते ही आगामी कानूनी व रिकवरी की प्रक्रिया को और तेज कर दिया जाएगा।

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