जेपी इंफ्राटेक घर खरीदार घोटाला: ED की बड़ी कार्रवाई, ₹100 करोड़ की अचल संपत्तियां अनंतिम रूप से कुर्क
नई दिल्ली, 15 जून (अन्नू): दिल्ली-एनसीआर के बहुचर्चित जेपी इंफ्राटेक घर खरीदार घोटाला मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने मनी लॉन्ड्रिंग के खिलाफ एक और बड़ी और कड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा जारी आधिकारिक प्रेस रिलीज के अनुसार, ईडी के दिल्ली जोनल कार्यालय ने धन-शोधन निवारण अधिनियम (PMLA), 2002 के तहत बड़ी कार्रवाई करते हुए 'मेसर्स जेसी वर्ल्ड हॉस्पिटैलिटी प्राइवेट लिमिटेड' और 'मेसर्स इन्वेस्टर्स क्लिनिक इन्फ्राटेक प्राइवेट लिमिटेड' की कुल ₹100 करोड़ मूल्य की अचल संपत्तियों को अनंतिम रूप से कुर्क (Attach) कर लिया है।
यह कुर्की बड़े पैमाने पर आम जनता और घर खरीदारों के धन के दुरुपयोग और धोखाधड़ी से जुड़ी मनी लॉन्ड्रिंग जांच के तहत की गई है, जिसमें मेसर्स जेपी इंफ्राटेक लिमिटेड (JIAL), मेसर्स जयप्रकाश एसोसिएट्स लिमिटेड (JAL) व उनसे संबंधित सहयोगी कंपनियां शामिल हैं।
ED द्वारा जारी प्रेस रिलीज के मुख्य बिंदु:
बाजार कीमत के अनुसार हुई कुर्की: ईडी द्वारा जारी प्रेस रिलीज के अनुसार, कुर्क की गई संपत्तियों में मेसर्स जेसी वर्ल्ड हॉस्पिटैलिटी प्राइवेट लिमिटेड की लगभग ₹40 करोड़ और मेसर्स इन्वेस्टर्स क्लिनिक इन्फ्राटेक प्राइवेट लिमिटेड की लगभग ₹60 करोड़ मूल्य की अचल संपत्तियां शामिल हैं।
ईओडब्ल्यू (EOW) की एफआईआर के आधार पर जांच: यह पूरी जांच दिल्ली और उत्तर प्रदेश पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (EOW) द्वारा जेपी विशटाउन और जेपी ग्रीन्स प्रोजेक्ट्स के पीड़ित घर खरीदारों की शिकायतों पर दर्ज विभिन्न एफआईआर के आधार पर शुरू की गई थी। प्रमोटरों पर आरोप है कि उन्होंने हजारों घर खरीदारों से आवासीय परियोजनाओं के निर्माण के नाम पर भारी-भरकम धनराशि इकट्ठा की, लेकिन उसे निर्माण में लगाने के बजाय दूसरे कामों में डायवर्ट कर दिया, जिससे परियोजनाएं अधूरी रह गईं।
₹32,825 करोड़ में से पकड़ी गई मनी ट्रेल; फर्जीवाड़ा उजागर
प्रवर्तन निदेशालय की जांच में यह साफ हुआ है कि जेएएल (JAL) और जेआईएएल (JIAL) ने घर खरीदारों से लगभग ₹32,825 करोड़ रुपये इकट्ठा किए थे (जैसा कि नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल - NCLT ने भी माना है)।
पैसे का डायवर्जन: इस भारी-भरकम राशि में से एक बहुत बड़ा हिस्सा निर्माण कार्यों में लगाने के बजाय गैर-निर्माण कार्यों के लिए विपथित (डायवर्ट) कर दिया गया और जेसी वर्ल्ड हॉस्पिटैलिटी प्राइवेट लिमिटेड जैसी सहयोगी कंपनियों को सौंप दिया गया।
इन्वेस्टर्स क्लिनिक को मिले भूखंड: जांच में यह भी उजागर हुआ कि अपराध से अर्जित अवैध आय (Proceeds of Crime) के हिस्से के रूप में भूखंडों (Plots) को मेसर्स इन्वेस्टर्स क्लिनिक इन्फ्राटेक प्राइवेट लिमिटेड को ट्रांसफर किया गया था।
मास्टरमाइंड मनोज गौड़ जेल में; अब तक कुल ₹500 करोड़ की संपत्ति कुर्क
प्रेस रिलीज के अनुसार, इस पूरे घोटाले में मेसर्स जेपी इंफ्राटेक लिमिटेड और मेसर्स जयप्रकाश एसोसिएट्स लिमिटेड के प्रबंध निदेशक (MD) मनोज गौड़ की भूमिका सबसे मुख्य और संदिग्ध पाई गई थी। मनोज गौड़ को जेपी समूह और उसकी सहयोगी कंपनियों के बीच लेनदेन के एक बेहद जटिल जाल के माध्यम से धनराशि को ठिकाने लगाने (विपंथन) की योजना बनाने और उसे पूरा करने का दोषी पाया गया था।
मनोज गौड़ की गिरफ्तारी: इसी वित्तीय हेराफेरी के चलते ईडी ने मनोज गौड़ को 13 नवंबर 2025 को पीएमएलए की धारा 19 के तहत गिरफ्तार किया था और वह वर्तमान में न्यायिक हिरासत (जेल) में है।
इससे पहले भी ईडी ने 7 जनवरी 2026 को एक अनंतिम कुर्की आदेश जारी करके इस मामले में लगभग ₹400 करोड़ मूल्य की अपराध से अर्जित आय को कुर्क किया था, जिसके बाद मनोज गौड़ को आरोपी बनाते हुए 8 जनवरी 2026 को माननीय विशेष न्यायालय (PMLA) के समक्ष अभियोजन शिकायत (चार्जशीट) दायर की जा चुकी है। अब हुई ₹100 करोड़ की नई कुर्की के बाद इस मामले में कुल एक्शन और बढ़ गया है। ईडी ने साफ किया है कि घर खरीदारों को न्याय दिलाने के लिए मामले की आगामी जांच अभी भी लगातार जारी है।
#JaypeeGroupScam #EDAction2026 #ManojGaurArrested #InvestorsClinic #JCWorldHospitality #MoneyLaunderingCase #NCLTHearing #HomeBuyersScam #NoidaRealEstateFraud #EDPressRelease #BreakingNews #DanikKhabar
Previous
दैनिक खबर: आज 15 जून , 2026 के शाम 6 बजे के मुख्य समाचार
Next