14/10/25

भारत की सरहदों की रक्षा और देश की अखंडता सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है

एन.एस.बाछल, 14 अक्तूबर, जयपुर।

न एवं पर्यावरण राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) संजय शर्मा ने सोमवार को कोटपूतली स्थित श्रीमती पानादेवी मोरीजावाला राजकीय कन्या महाविद्यालय परिसर में 'सिंदूर स्मारिका वाटिका' का लोकार्पण किया। स्मारिका पहलगाम हमले के बाद भारतीय सेना द्वारा किए गए ऑपरेशन सिंदूर को समर्पित है।

कार्यक्रम में जनप्रतिनिधि एवं समाजसेवी हीरालाल रावत, रतनलाल शर्मा, प्राचार्य डॉ. आर.पी. गुर्जर एवं शंकरलाल कसाना उपस्थित रहे। कार्यक्रम की शुरुआत स्मारिका पट्टिका के अनावरण, दीप प्रज्ज्वलन एवं सात सिंदूर के पौधों के रोपण से हुई।

मंत्री संजय शर्मा ने अपने संबोधन में कहा कि भारत की सरहदों की रक्षा और देश की अखंडता सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि पहलगाम हमले में प्रभावित निर्दोष पर्यटकों को हम श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं, माननीय प्रधानमंत्री और सरकार के कुशल नेतृत्व और वीर सैनिकों ने ऑपरेशन सिंदूर के माध्यम से पाकिस्तान को सटीक जवाब दिया।

वन मंत्री ने छात्राओं से आग्रह किया कि वे इस वाटिका में लगाए गए सिंदूर के पौधों की देखभाल करें और पर्यावरण संरक्षण के लिए प्लास्टिक मुक्त भारत अभियान को आगे बढ़ाएं। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री की बजट घोषणा के अनुसार कोटपूतली में बनने वाली लेपर्ड सेंचुरी की प्रक्रिया अंतिम चरण में है। शीघ्र ही एक बड़ा लेपर्ड कंजर्वेशन एरिया विकसित होने जा रहा है। पर्यटन और वन संरक्षण पर मंत्री संजय शर्मा ने कहा कि राजस्थान में 5 टाइगर रिजर्व और 2 नेशनल पार्क हैं, जिनमें 135 बाघ हैं। पर्यटकों को बेहतर सुविधा देने हेतु अब ऑनलाइन टिकटिंग व्यवस्था सुदृढ़ की गई है। यही प्रयास है कि पर्यटकों को सुरक्षित, स्वच्छ और समृद्ध प्राकृतिक वातावरण मिले।

पर्यावरण मंत्री ने कहा कि जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से पूरा विश्व जुझ रहा है, उसका एक ही उपाय है कि वृक्षारोपण करें और प्रकृति का संरक्षण करें। इसके साथ ही पॉलीथिन का उपयोग न करें और यह संकल्प लेकर कि पानी की एक-एक बूंद बचाएंगे, वृक्षारोपण करेंगे और पॉलीथिन का उपयोग नहीं करेंगे, आने वाली पीढ़ियों को ये सौगात दें।

विशिष्ट अतिथि हीरालाल रावत ने कहा कि 22 अप्रैल 2025 को पहलगाम हमले में शहीद हुए पर्यटकों की शहादत व्यर्थ नहीं जाएगी। प्राचार्य डॉ. आर.पी. गुर्जर ने स्वागत उद्बोधन में कहा कि वाटिका का निर्माण समाजसेवकों और भामाशाहों के सहयोग से करीब 2.5 लाख रुपए की लागत से किया गया है।

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