हिंदुस्तान के घोड़े और पाकिस्तान के गधे मशहूर हैं

अनिल विज अंबाला छावनी 01 जुलाई 2025

भारत में घोड़ों का एक समृद्ध इतिहास रहा है, जिसमें कई प्रसिद्ध नस्लें और ऐतिहासिक रूप से महत्वपूर्ण घोड़े शामिल हैं।

भारत की मशहूर घोड़े की नस्लें:

भारत में कई स्वदेशी घोड़े की नस्लें हैं जो अपनी विशिष्ट विशेषताओं और क्षमताओं के लिए जानी जाती हैं। इनमें से कुछ प्रमुख हैं:

* मारवाड़ी घोड़ा: यह राजस्थान की एक प्रसिद्ध नस्ल है, जो अपनी मुड़ी हुई कानें (अंदर की ओर मुड़ी हुई), सुंदरता, साहस और वफादारी के लिए जाना जाता है। इन्हें युद्ध और शाही सवारी के लिए पाला जाता था।

* काठियावाड़ी घोड़ा: गुजरात के काठियावाड़ क्षेत्र से आने वाली यह नस्ल भी मारवाड़ी घोड़े से मिलती-जुलती है। ये अपनी सहनशीलता, फुर्ती और शुष्क परिस्थितियों में जीवित रहने की क्षमता के लिए प्रसिद्ध हैं।

* मणिपुरी पोनी: मणिपुर का यह छोटा लेकिन मजबूत घोड़ा पोलो खेल के लिए विशेष रूप से प्रसिद्ध है। यह पहाड़ी इलाकों में भी अच्छी तरह से चलता है।

* स्पीति घोड़ा: हिमाचल प्रदेश के स्पीति घाटी में पाया जाने वाला यह घोड़ा पहाड़ी इलाकों में भार ढोने और लंबी यात्रा के लिए उपयुक्त है। यह ठंडी परिस्थितियों को सहन करने में सक्षम है।

* भूटिया घोड़ा: सिक्किम और पश्चिम बंगाल के पहाड़ी क्षेत्रों में पाया जाने वाला यह छोटा लेकिन मजबूत घोड़ा भी पर्वतीय इलाकों में भार ढोने के लिए उपयोगी है।

* जंस्करी घोड़ा: लद्दाख में पाई जाने वाली यह नस्ल भी ठंडी और कठिन जलवायु में जीवित रहने की अद्वितीय क्षमता रखती है।

ऐतिहासिक रूप से प्रसिद्ध घोड़े:

भारतीय इतिहास में कुछ घोड़े अपनी बहादुरी, वफादारी और अपने स्वामियों के साथ गहरे जुड़ाव के लिए अमर हो गए हैं:

* चेतक (महाराणा प्रताप का घोड़ा): यह भारतीय इतिहास का सबसे प्रसिद्ध घोड़ा है। हल्दीघाटी के युद्ध में चेतक ने अपनी अद्भुत वीरता और वफादारी का परिचय दिया। घायल होने के बावजूद, उसने महाराणा प्रताप को युद्धभूमि से सुरक्षित बाहर निकाला और अंततः अपने प्राण त्याग दिए। चेतक को उसकी स्वामिभक्ति और साहस के लिए सदैव याद किया जाता है।

* कृष्णा (छत्रपति शिवाजी महाराज का घोड़ा): शिवाजी महाराज के कई घोड़ों में से कृष्णा उनका सबसे प्रिय घोड़ा माना जाता है। यह सफेद रंग का तेज रफ्तार घोड़ा था जो ऊंची पहाड़ियों पर चढ़ने में माहिर था।

* बादल (हम्मीरदेव चौहान का घोड़ा): रणथंभौर के शासक हम्मीरदेव चौहान का घोड़ा 'बादल' भी अपने पराक्रम के लिए जाना जाता है।

ये घोड़े न केवल अपनी नस्लीय विशेषताओं के लिए, बल्कि भारतीय इतिहास और संस्कृति में निभाई गई अपनी भूमिका के लिए भी मशहूर हैं।

पाकिस्तान के गधे कई कारणों से प्रसिद्ध हैं, खासकर चीन के साथ उनके व्यापारिक संबंधों के कारण।

पाकिस्तान में गधों की संख्या लगातार बढ़ रही है। हालिया आंकड़ों के अनुसार, पाकिस्तान में गधों की आबादी 59 लाख से बढ़कर 60.47 लाख हो गई है। यह दुनिया में गधों की तीसरी सबसे बड़ी आबादी है, जो इथियोपिया और सूडान के बाद आती है।

गधे लंबे समय से पाकिस्तान की ग्रामीण अर्थव्यवस्था का एक महत्वपूर्ण हिस्सा रहे हैं, खासकर सामान ढोने और कृषि कार्यों में। हालांकि, अब उनका महत्व और भी बढ़ गया है, क्योंकि पाकिस्तान चीन को बड़ी संख्या में गधों का निर्यात कर रहा है।

चीन में गधों की खाल से "ई-जियाओ" (Ejiao) नामक एक पारंपरिक दवा और सौंदर्य उत्पाद बनाया जाता है। यह कोलेजन से बना होता है, जिसे गधे की खाल को उबालकर निकाला जाता है। चीन में ई-जियाओ की भारी मांग है, और पाकिस्तान इस मांग को पूरा करने के लिए एक प्रमुख स्रोत बन गया है। पाकिस्तान में गधों के कत्लखाने भी शुरू किए गए हैं, खासकर ग्वादर में, ताकि चीन को गधे की खाल और हड्डियों का निर्यात किया जा सके। चीन ने पाकिस्तान में गधा फार्म स्थापित करने में भी रुचि दिखाई है, क्योंकि पाकिस्तान में गधों के प्रजनन के लिए अनुकूल वातावरण है।

गरीबों के लिए आजीविका का साधन

पाकिस्तान में कई गरीब मजदूर अपनी आजीविका के लिए गधों पर निर्भर करते हैं। वे गधा गाड़ियों का उपयोग करके सामान ढोते हैं, जिससे उन्हें दैनिक आय मिलती है। हालांकि, गधों की बढ़ती कीमतों ने उन्हें पालना मुश्किल कर दिया है।

संक्षेप में, पाकिस्तान के गधे उनकी बड़ी संख्या और चीन के साथ बढ़ते व्यापारिक संबंधों के कारण प्रसिद्ध हैं, जहां उनकी खाल का उपयोग पारंपरिक दवा और सौंदर्य उत्पादों में किया जाता है।

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