प्रभावी शासन और लाभों को सही लाभार्थियों तक पहुँचाने के लिए सटीक आंकड़े आवश्यक: उपराष्ट्रपति
आरएस अनेजा, 19 अगस्त नई दिल्ली - भारतीय सांख्यिकी सेवा के 2026 बैच के प्रशिक्षु अधिकारियों ने आज उपराष्ट्रपति भवन में उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन से मुलाकात की। 16 महिला अधिकारियों सहित 34 युवा अधिकारियों के साथ बातचीत करते हुए उपराष्ट्रपति ने प्रतिष्ठित सेवा में शामिल होने पर उन्हें बधाई दी और कहा कि महिलाओं का बढ़ता प्रतिनिधित्व भारत की महिला सशक्तिकरण से लेकर महिला-नेतृत्व वाले विकास की ओर बढ़ती यात्रा को दर्शाता है।
सटीक और विश्वसनीय आंकड़ों की महत्वपूर्ण भूमिका पर जोर देते हुए श्री सी. पी. राधाकृष्णन ने कहा, “यदि आंकड़े सही नहीं हैं, तो कोई भी निर्णय सही नहीं हो सकता।” उन्होंने जोर देकर कहा कि विश्वसनीय आंकड़ों के बिना प्रभावी योजना बनाना, संसाधनों का आवंटन करना और सरकारी योजनाओं का क्रियान्वयन संभव नहीं होगा। यदि लक्षित लाभार्थियों की सही पहचान नहीं की गई, तो सीमित संसाधन भी बर्बाद हो सकते हैं। उन्होंने कहा, “आंकड़े सटीक रूप से एकत्र किए जाने चाहिए और सही समय पर उपलब्ध कराए जाने चाहिए।” उन्होंने आगाह किया कि यदि बुनियादी आंकड़े ही गलत होंगे, तो राष्ट्रीय चुनौतियों के लिए उपयुक्त समाधान तलाशना कठिन हो जाएगा।
उपराष्ट्रपति ने कहा कि आधिकारिक आंकड़े केवल संख्याएं नहीं हैं, बल्कि शासन के ऐसे साधन हैं जो सरकार को यह समझने में सहायता करते हैं कि देश, उसके लोग और समाज के विभिन्न वर्ग किस स्थिति में हैं। उन्होंने कहा कि सरकारी कार्यक्रमों के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए क्षेत्रीय अनुभव, आंकड़ों का सटीक संग्रह, उनका उचित रखरखाव और समय पर प्रस्तुतीकरण आवश्यक है। उन्होंने कहा, “किसी योजना की सफलता या विफलता काफी हद तक आंकड़ों की गुणवत्ता पर निर्भर करती है।” उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि सरकारी कार्यक्रमों के अपेक्षित लाभ पात्र लाभार्थियों तक पहुंचाने में सांख्यिकीविदों की महत्वपूर्ण भूमिका है।
सी. पी. राधाकृष्णन ने भारत के सांख्यिकीय और प्रशासनिक आंकड़ा तंत्र को मजबूत किए जाने पर जोर दिया, जिसमें डिजिटल डेटाबेस, जीएसटी आंकड़े और उच्च आवृत्ति वाले आर्थिक आंकड़े शामिल हैं। डिजिटल लेन-देन में आए बदलाव का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व ने इनके विस्तार में महत्वपूर्ण योगदान दिया है और समानांतर अर्थव्यवस्था को कम करने में मदद की है। उन्होंने आर्थिक गणनाओं के लिए उपयुक्त आधार वर्षों के महत्व और देश की वास्तविक विकास दर के सटीक आकलन पर भी प्रकाश डाला। साथ ही, उन्होंने जोर देकर कहा कि केवल आर्थिक संकेतक ही मानव कल्याण की पूरी तस्वीर प्रस्तुत नहीं कर सकते; खुशहाली और जीवन की गुणवत्ता जैसे मानदंड भी महत्वपूर्ण हैं।
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