स्वास्थ्य मंत्री आरती सिंह राव ने डॉक्टरों को प्रिस्क्रिप्शन पर हस्ताक्षर और जेनेरिक नाम अनिवार्य करने का निर्देश दिया

जे कुमार, अम्बाला 2 नवम्बर - स्वास्थ्य मंत्री आरती राय द्वारा प्रदेश के सभी सरकारी अस्पतालों के चिकित्सकों के लिए आदेश जारी किए गए हैं। इस आदेश का मुख्य उद्देश्य मरीजों के हित की रक्षा करना और चिकित्सा पर्ची में किसी भी तरह की अस्पष्टता को समाप्त करना है।

​जेनेरिक दवाएं बड़े अक्षरों में होंगी दर्ज :- ​नए निर्देशों के तहत, यह भी सुनिश्चित किया गया है कि दवाओं के प्रिस्क्रिप्शन में दवाओं के जेनेरिक नाम बड़े और स्पष्ट अक्षरों में लिखे जाएं, ताकि मरीज आसानी से जेनेरिक दवाओं की पहचान कर सकें और महंगी ब्रांडेड दवाओं के बोझ से बच सकें। यह कदम जेनेरिक दवाओं को बढ़ावा देने की राष्ट्रीय नीति के अनुरूप है।

​स्वास्थ्य मंत्री आरती राय ने मीडिया को बताया, "मरीजों को यह जानने का पूरा अधिकार है कि उनका इलाज कौन सा डॉक्टर कर रहा है और उनकी मेडिकल रिपोर्ट पर किसके हस्ताक्षर हैं। यह नियम न केवल पर्ची पर अस्पष्ट और जल्दबाजी में किए गए हस्ताक्षर की समस्या को दूर करेगा, बल्कि यह भी सुनिश्चित करेगा कि डॉक्टर अपनी जिम्मेदारी और पदनाम के प्रति जवाबदेह हों।" उन्होंने जोर दिया कि पारदर्शिता की दृष्टि से यह अत्यंत आवश्यक है कि प्रत्येक प्रिस्क्रिप्शन और लैब रिपोर्ट पर चिकित्सक की पहचान स्पष्ट रूप से अंकित हो।

​इन निर्देशों के सख्ती से पालन के लिए, राज्य के स्वास्थ्य विभाग ने सभी जिलों के सिविल सर्जनों को तुरंत प्रभाव से पत्र जारी कर दिया है। सिविल सर्जनों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि वे अपने अधिकार क्षेत्र में आने वाले सभी सरकारी अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों में इन नियमों का अक्षरशः पालन सुनिश्चित कराएं। नियम का उल्लंघन करने वाले चिकित्सकों पर नियमानुसार कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई है। यह पहल सरकारी स्वास्थ्य प्रणाली में मरीजों का विश्वास बढ़ाने में सहायक सिद्ध होगी।

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