गोवा अवैध लौह-अयस्क खनन मामला: सल्गाओकर (AVS) ग्रुप की ₹1,023.85 करोड़ की संपत्तियां कुर्क, सिंगापुर के एसेट्स भी शामिल
नई दिल्ली/पणजी, 21 जून (अन्नू): प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने देश के बड़े कॉर्पोरेट और खनन घोटालों पर अपना कड़ा शिकंजा कसते हुए गोवा के बहुचर्चित अवैध लौह-अयस्क खनन मामले (Goa Illegal Iron-Ore Mining Case) में एक बहुत बड़ी डिजिटल और वित्तीय कार्रवाई को अंजाम दिया है। केंद्रीय जांच एजेंसी ED ने सल्गाओकर ग्रुप और उसके सहयोगियों (AVS ग्रुप) की ₹1,023.85 करोड़ मूल्य की चल और अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से कुर्क (Provisional Attachment) कर लिया है। कुर्क की गई इन संपत्तियों में भारत के साथ-साथ सिंगापुर में स्थित भारी-भरकम विदेशी एसेट्स भी शामिल हैं।
प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा जारी प्रेस रिलीज के मुख्य बिंदु:
ED के पणजी जोनल कार्यालय (गोवा) द्वारा धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA), 2002 के तहत 19 जून 2026 को एक प्रोविजनल अटैचमेंट ऑर्डर जारी किया गया था। ईडी द्वारा जारी प्रेस रिलीज के अनुसार, कुर्क की गई इस विशाल संपत्ति का पूरा ब्योरा इस प्रकार है:
भारत में 99 अचल संपत्तियां: देश के भीतर विभिन्न रणनीतिक स्थानों पर स्थित कुल 99 अचल संपत्तियों को अटैच किया गया है, जिनका कुल मूल्यांकन ₹459.10 करोड़ है।
सिंगापुर में 31 अचल संपत्तियां: अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कार्रवाई करते हुए ED ने सिंगापुर में स्थित ₹471.32 करोड़ मूल्य की 31 अचल संपत्तियों पर भी कानूनी कब्जा कर लिया है।
भारतीय कंपनियों के शेयर: इसके अतिरिक्त, विभिन्न भारतीय कंपनियों में निवेश किए गए ₹93.42 करोड़ के इक्विटी शेयरों को भी कुर्क किया गया है।
ये सभी संपत्तियां स्वर्गीय श्री अनिल वासुदेव सल्गाओकर के एस्टेट (उनकी एडमिनिस्ट्रेट्रिक्स श्रीमती लक्ष्मी अनिल सल्गाओकर के माध्यम से), मैसर्स सल्गाओकर माइनिंग इंडस्ट्रीज प्रा. लिमिटेड, मैसर्स शांतिलाल खुशालदास एंड ब्रदर्स प्रा. लिमिटेड, मैसर्स एस. कांतिलाल एंड कंपनी प्रा. लिमिटेड, मैसर्स सालिथो ओरेस प्रा. लिमिटेड, मैसर्स वर्टेक्स न्यूटन प्रोजेक्ट्स प्रा. लिमिटेड और मैसर्स सुवर्णरेखा पोर्ट प्रा. लिमिटेड के नामों पर दर्ज थीं।
सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले और CID की एफआईआर से शुरू हुई जांच
ED द्वारा जारी प्रेस रिलीज के अनुसार, इस पूरे मनी लॉन्ड्रिंग मामले की शुरुआत गोवा सीआईडी (क्राइम ब्रांच) द्वारा दर्ज की गई एफआईआर के आधार पर हुई थी। यह एफआईआर आईपीसी (IPC) 1860, भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 और एमएमडीआर (MMDR) अधिनियम 1957 की विभिन्न संगीन धाराओं के तहत दर्ज की गई थी।
इसके साथ ही, माननीय सुप्रीम कोर्ट ने भी 21 अप्रैल 2014 और 7 फरवरी 2018 के अपने ऐतिहासिक फैसलों में स्पष्ट रूप से माना था कि गोवा में 22 नवंबर 2007 के बाद किया गया सारा खनन कार्य (जब तक कि नए माइनिंग लीज जारी नहीं किए गए) पूरी तरह से अवैध, अनाधिकृत और कानून के विरुद्ध था।
शेल कंपनियों के जरिए चीन को भेजा माल; कुल ₹5,237.84 करोड़ की हुई 'क्राइम प्रोसीड्स'
ED की गहन वित्तीय और तकनीकी जांच में 'AVS ग्रुप' के एक बेहद शातिर और अंतरराष्ट्रीय सिंडिकेट मोडस ऑपरेंडी का खुलासा हुआ है:
10 माइनिंग लीज पर अवैध कब्जा: जांच में सामने आया कि एवीएस ग्रुप ने साल 2007 से 2012 के दौरान अवैध रूप से 10 माइनिंग लीज का संचालन किया।
अवैध लौह-अयस्क का खनन और एक्सपोर्ट: इस अवधि में अवैध रूप से निकाले गए लौह-अयस्क के निष्कर्षण, घरेलू बिक्री और अंतरराष्ट्रीय निर्यात के माध्यम से सीधे तौर पर ₹2,492.95 करोड़ की अवैध कमाई (Proceeds of Crime) जनरेट की गई।
ब्रिटिश वर्जिन आइलैंड्स और चीन का नेक्सस: अवैध रूप से माइन किए गए इस अयस्क को बेहद कम और कौड़ियों के भाव (Under-valued) दिखाकर ब्रिटिश वर्जिन आइलैंड्स (BVI) में स्थापित की गई ग्रुप की फर्जी शेल कंपनियों (SPVs) को एक्सपोर्ट किया गया। इन कागजी कंपनियों ने बिचौलियों के रूप में काम करते हुए उसी माल को बहुत महंगी कीमतों पर सीधे चीन (China) को री-सेल कर दिया।
भारी-भरकम विदेशी मुनाफा: इस अंतरराष्ट्रीय हेरफेर से विदेशों में लगभग ₹2,744.89 करोड़ का अतिरिक्त मुनाफा कमाया गया।
ED की प्रेस रिलीज के अनुसार, इस पूरे घोटाले में कुल 'Proceeds of Crime' (अपराध की कमाई) का कुल आंकड़ा ₹5,237.84 करोड़ (लगभग) तक पहुंच जाता है। इन अवैध पैसों को ब्रिटिश वर्जिन आइलैंड्स और सिंगापुर स्थित शेल कंपनियों (SPVs) की विभिन्न परतों (Layering) के माध्यम से घुमाया गया और विदेशों में भारी चल-अचल संपत्तियां खरीदी गईं। बाद में, इसी पैसे के एक हिस्से को 'शेयर कैपिटल' (Share Capital) का रूप देकर वैध निवेश के तौर पर वापस भारत रूट कर दिया गया। ईडी ने स्पष्ट किया है कि इस पूरे नेक्सस को तोड़ने के लिए मामले की आगे की जांच पूरी मुस्तैदी से जारी है।
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