अमेरिका-ईरान जंग की आंच में फुटबॉल विश्वकप: ईरान की फीफा को धमकी, 'नारेबाजी हुई तो छोड़ देंगे मैदान!'
आरएस अनेजा, 12 जून नई दिल्ली – अमेरिका-ईरान के मध्य छिड़े युद्ध का असर फुटबाल विश्वकप 2026 पर भी पड़ रहा है। विश्वकप में ईरान की टीम इस सख्त शर्त पर उतरी है कि उनके मैचों के दौरान स्टेडियम में कोई भी गैर-आधिकारिक (विवादित) झंडा नहीं दिखाया जाएगा और न ही उनकी सरकार या टीम के खिलाफ कोई नारेबाजी होगी। ईरान के खेल मंत्री अहमद दुन्यामाली ने फीफा (FIFA) को कड़ी चेतावनी दी है कि अगर मैच के दौरान स्टैंड्स में अनधिकृत झंडे या विरोधी नारे लगाए गए, तो ईरानी टीम बीच में ही मैच रोक देगी (Walk out)।
ईरान ग्रुप-जी में है और पहला मुकाबला १५ जून को अमेरिका के लॉस एंजिलिस में न्यूजीलैंड से होगा। २१ जून को उसी जगह पर ईरान की टीम बेल्जियम से भिड़ेगी, जबकि २६ जून को सिएटल में मिस्र के खिलाफ इस टीम का सामना होगा। खेल मंत्री दुन्यामाली ने कहा कि ईरानी अधिकारियों को टीम के ग्रुप-स्टेज के आखिरी मैच को लेकर आश्वासन मिला है। उन्होंने कहा, हमें भरोसा दिलाया गया है कि मिस्र के खिलाफ मुकाबले के दौरान स्टेडियम में कोई भी गड़बड़ी वाली घटना नहीं होगी।
वहीं, अमेरिका ने ईरान की टीम को इस शर्त पर वीजा दिया है कि खिलाड़ी और स्टाफ केवल मैच वाले दिन ही अमेरिकी धरती पर प्रवेश करेंगे और मैच खत्म होते ही उसी दिन उन्हें अमेरिका छोड़ना होगा। इस पाबंदी के कारण ईरान पूरे वर्ल्ड कप इतिहास की इकलौती ऐसी टीम बन गई है जो अमेरिका में रुक नहीं सकती। टीम ने अमेरिका के बजाय मेक्सिको के टिजुआना (Tijuana) शहर को अपना बेस कैंप बनाया है, जहाँ से वे मैच खेलने अमेरिका उड़ान भरेंगे और वापस लौटेंगे।
अमेरिका ने सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए ईरान के फुटबॉल महासंघ के अध्यक्ष मेहदी ताज सहित 15 महत्वपूर्ण प्रशासनिक और सहयोगी स्टाफ सदस्यों को वीजा देने से मना कर दिया। केवल खिलाड़ियों और मुख्य तकनीकी स्टाफ को ही अंतिम पलों में एंट्री मिली है।
ईरान फुटबॉल संघ (FFIRI) ने दावा किया है कि अमेरिका ने ईरानी समर्थकों के लिए तय किए गए आधिकारिक टिकट अलॉटमेंट को रद्द कर दिया है। इसके कारण हजारों ईरानी प्रशंसक अपनी टीम का समर्थन करने स्टेडियम नहीं पहुंच पा रहे हैं, जिसे लेकर ईरान ने फीफा से निष्पक्षता की मांग की है।
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