10/09/26

सोनीपत: जहरीली स्प्रे निगलने से युवक की मौत मामले में 2.5 महीने बाद FIR; कोर्ट के आदेश पर खरखौदा पुलिस ने दर्ज किया केस

सोनीपत, 10 सितंबर (अन्‍नू): सोनीपत जिले के खरखौदा क्षेत्र में जमीन के विवाद और कथित प्रताड़ना से तंग आकर जहरीली स्प्रे निगलने वाले युवक दिनेश की मौत के करीब ढाई महीने बाद आखिरकार एफआईआर (FIR) दर्ज कर ली गई है। पुलिस द्वारा कार्रवाई न करने पर मृतक के भाई प्रवेश कुमार ने एसडीजीएम (SDJM) खरखौदा की कोर्ट में इस्तगासा दायर किया था।

अदालत के आदेश पर 9 सितंबर को खरखौदा थाना पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 108 (आत्महत्या के लिए उकसाना), 115(2), 351(3) और 3(5) के तहत मुकदमा दर्ज किया है।

पत्नी को बंधक बनाने व प्रताड़ना से परेशान था मृतक; जानें मामले के मुख्य बिंदु:

  • जमीन विवाद में दबाव बनाने का आरोप: मृतक के भाई प्रवेश के अनुसार, दिनेश की पत्नी प्रीति और प्रवेश की पत्नी मीना ने पैतृक जमीन को लेकर आरोपी संदीप के खिलाफ झज्जर कोर्ट में सिविल केस दर्ज कराया हुआ है। आरोप है कि केस वापस लेने के लिए ससुराल पक्ष के लोग दिनेश व प्रीति पर लगातार दबाव बना रहे थे।

  • पत्नी को बस स्टैंड से अगवा कर बनाया बंधक: शिकायत के मुताबिक, 9 जून को आरोपी प्रीति को रोहतक के न्यू बस स्टैंड से जबरन ले गए और एक हफ्ते तक बंधक बनाकर रखा। इस संबंध में रोहतक के अर्बन एस्टेट थाने में एफआईआर (FIR No. 0136) भी दर्ज कराई गई थी।

  • 20 जून को निगला स्प्रे, इलाज के दौरान मौत: लगातार प्रताड़ना और धमकियों से तंग आकर दिनेश ने 20 जून की शाम घास मारने वाला जहरीला स्प्रे निगल लिया। परिजनों ने उसे खरखौदा अस्पताल से पीजीआईएमएस (PGIMS) रोहतक भर्ती कराया, जहां 21 जून की रात उसकी मौत हो गई।

  • मौत से पहले दिए बयान पर कार्रवाई न करने का आरोप: शिकायतकर्ता का दावा है कि मौत से पहले 21 जून को पीजीआईएमएस में हेड कॉन्स्टेबल विकास कुमार के सामने दिनेश ने बयान देकर प्रताड़ना के तथ्य बताए थे। इसके बावजूद पुलिस ने एफआईआर दर्ज न कर सिर्फ डीडी (DD) एंट्री की।

  • पुलिस अधिकारियों पर धमकाने का आरोप: प्रवेश ने आरोप लगाया कि कार्रवाई की मांग करने पर पुलिस कर्मचारियों और थाना अधिकारी ने उल्टा उसी पर केस दर्ज करने की धमकी दी। इसके बाद उसने डीजीपी, एसपी, सीएम विंडो और एनएचआरसी (NHRC) तक गुहार लगाई।

  • कोर्ट के हस्तक्षेप पर दर्ज हुई FIR: कहीं सुनवाई न होने पर परिजनों ने SDJM खरखौदा की अदालत में बीएनएसएस (BNSS) की धारा 175(3) के तहत इस्तगासा दायर कर बयान, पोस्टमार्टम व मेडिकल रिकॉर्ड सुरक्षित करने की मांग की। अदालत के रुख के बाद 9 सितंबर को पुलिस ने एफआईआर दर्ज की।

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