ED का पंजाब बासमती राइस लिमिटेड पर बड़ा एक्शन: ₹350.84 करोड़ के बैंक फ्रॉड मामले में जालंधर जोनल ऑफिस की छापेमारी
नई दिल्ली/जालंधर, 13 जून (अन्नू): प्रवर्तन निदेशालय (ED) के जालंधर जोनल ऑफिस ने करोड़ों रुपये के हाई-प्रोफाइल बैंक धोखाधड़ी (Bank Fraud) और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में एक बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है। ईडी (ED) द्वारा जारी प्रेस रिलीज के अनुसार, केंद्रीय जांच एजेंसी ने मेशर्स पंजाब बासमती राइस लिमिटेड (M/s Punjab Basmati Rice Limited) और उसके प्रमोटरों व निदेशकों (Directors) के खिलाफ कड़ा शिकंजा कसते हुए उनके कई व्यावसायिक और आवासीय ठिकानों पर ताबड़तोड़ सर्च ऑपरेशन चलाया है।
इस छापेमारी के दौरान ईडी की टीम ने भारी मात्रा में डिजिटल साक्ष्य, आपत्तिजनक दस्तावेज, भारतीय मुद्रा और अमेरिकी डॉलर (विदेशी करेंसी) बरामद कर जब्त कर ली है।
ईडी (ED) द्वारा जारी प्रेस रिलीज के मुख्य बिंदु:
05 जून को हुई थी छापेमारी: ईडी द्वारा जारी प्रेस रिलीज के अनुसार, निदेशालय की विभिन्न टीमों ने 05 जून 2026 को मेशर्स पंजाब बासमती राइस लिमिटेड और उसके प्रमोटर/निदेशक कुलविंदर सिंह मखनी व अन्य से जुड़े कुल 06 अलग-अलग व्यावसायिक और आवासीय परिसरों (Premises) पर एक साथ व्यापक तलाशी अभियान (Search Operation) चलाया था।
6 बैंकों के समूह को लगाया ₹350.84 करोड़ का चूना: जांच एजेंसी के मुताबिक, मेशर्स पंजाब बासमती राइस लिमिटेड और उसके प्रमोटरों/निदेशकों ने केनरा बैंक (Canara Bank) के नेतृत्व वाले 06 कंसोर्टियम सदस्य बैंकों (Bank Consortium) के साथ कुल ₹350.84 करोड़ रुपये की भारी-भरकम बैंकिंग धोखाधड़ी को अंजाम दिया था, जिससे सरकारी व पब्लिक सेक्टर के बैंकों को सीधे तौर पर करोड़ों रुपये का वित्तीय नुकसान उठाना पड़ा।
सीबीआई (CBI) की एफआईआर के आधार पर शुरू हुई थी ईडी की जांच
ईडी की प्रेस रिलीज में स्पष्ट किया गया है कि इस मामले की मनी लॉन्ड्रिंग जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI), नई दिल्ली द्वारा दर्ज की गई मूल एफआईआर के आधार पर शुरू की गई थी। सीबीआई ने इस कंपनी और उसके प्रमोटरों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (IPC), 1860 की विभिन्न सुसंगत धाराओं और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (Prevention of Corruption Act), 1988 की धारा 13(2) के साथ पठित 13(1)(d) के तहत मुकदमा दर्ज किया था।
मोडस ऑपेरेंडी: फर्जी और शेल कंपनियों का बनाया था जाल
ईडी (ED) की शुरुआती जांच और साक्ष्यों के विश्लेषण में आरोपियों की बड़ी साजिश और धोखाधड़ी के तौर-तरीकों का सनसनीखेज खुलासा हुआ है:
फंड्स की हेराफेरी (Divertion of Funds): कंपनी ने अपने प्रमोटरों और निदेशकों की मिलीभगत से पब्लिक सेक्टर के बैंकों से लोन के रूप में प्राप्त राशि (फंड्स) का इस्तेमाल उस काम में नहीं किया जिसके लिए लिया गया था। इस पैसे को अन्यत्र डायवर्ट कर निदेशकों ने अपने निजी मुनाफे के लिए इस्तेमाल किया।
कागजों पर दिखाई फर्जी बिक्री: आरोपी कंपनी और उसके निदेशकों ने अपने स्टॉक (बासमती चावल आदि) की बिक्री को कागजों पर पूरी तरह काल्पनिक/फर्जी संस्थाओं (Fictitious Entities) को होना दिखाया। बाद में इन फर्जी संस्थाओं को कंपनी के बही-खातों में देनदार (Debtors) के रूप में प्रदर्शित कर दिया गया।
कैश में विड्रॉल: इतना ही नहीं, स्टॉक की बिक्री और उससे प्राप्त होने वाली राशि (Sale Proceeds) को घुमाने के लिए कई अन्य शेल कंपनियों (Shell Entities) का इस्तेमाल किया गया और बाद में इस पूरी मोटी रकम को बैंक खातों से सीधे कैश (नकद) के रूप में निकाल कर ठिकाने लगा दिया गया।
सर्च ऑपरेशन के दौरान ₹8.50 लाख कैश और $8600 डॉलर जब्त
ईडी द्वारा जारी प्रेस रिलीज के अनुसार, 5 जून को चली इस लंबी छापेमारी के दौरान आरोपियों के ठिकानों से धन के अवैध लेन-देन से जुड़े कई डिजिटल और भौतिक रिकॉर्ड बरामद किए गए।
इसके साथ ही, तलाशी लिए गए परिसरों से ₹8.50 लाख रुपये की भारतीय नकदी (Cash) और 8,600 अमेरिकी डॉलर (USD) की विदेशी मुद्रा बरामद कर धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA), 2002 के कड़े प्रावधानों के तहत मौके पर ही जब्त (Seize) कर ली गई है। ईडी के आला अधिकारियों का कहना है कि इस मामले में कड़ियों को जोड़ने के लिए आगे की तफ्तीश (Further Investigation) पूरी तत्परता से जारी है, और आने वाले दिनों में प्रमोटरों की चल-अचल संपत्तियों को कुर्क करने जैसी बड़ी कार्रवाई अमल में लाई जा सकती है।
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