दिल्ली मास्टर प्लान 2047: भविष्य की राजधानी का रोडमैप, 40 लाख नए और सस्ते आवास बनाने की योजना
रए आरएस अनेजा, 21 अगस्त नई दिल्ली - आवासन और शहरी कार्य एवं विद्युत मंत्री मनोहर लाल ने आज दिल्ली के उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू और दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की उपस्थिति में 'दिल्ली मास्टर प्लान 2047' (एमपीडी-2047) जारी किया।
मनोहर लाल ने कहा कि दिल्ली की बढ़ती आबादी और इसके सर्वांगीण विकास की जरूरत को देखते हुए, 'दिल्ली मास्टर प्लान 2047' राष्ट्रीय राजधानी के भविष्य को आकार देने में एक मील का पत्थर साबित होगा। उन्होंने कहा कि मास्टर प्लान में शहर की भविष्य की आवास जरूरतों को पूरा करने पर ध्यान देते हुए लगभग 40 लाख नए सस्ते आवास बनाने की योजना है।
केंद्रीय मंत्री ने आगे कहा कि सार्वजनिक परिवहन कॉरिडोर को मजबूत करने और बेहतर कनेक्टिविटी वाले शहरी विकास को बढ़ावा देने के लिए 'ट्रांजिट-ओरिएंटेड डेवलपमेंट' (डीओडी) नीति को शामिल किया गया है। उन्होंने कहा कि कॉलोनियों को रहने के लिए और बेहतर बनाने के उद्देश्य से, रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन (आरडब्ल्यूए) को पंजीकृत करने और 'इन-सीटू रीडेवलपमेंट नीति' की तर्ज पर रीडेवलपमेंट फ्रेमवर्क अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा, जिससे मौजूदा रिहायशी इलाकों का सुनियोजित पुनर्विकास और सुधार हो सके।
40 लाख से ज्यादा घर: विकसित दिल्ली 2047 का निर्माण
मौजूदा इलाकों का पुनर्विकास (ग्रुप हाउसिंग/डीडीए हाउसिंग/सरकारी आवास): कम से कम 40,000 वर्ग मीटर की जरूरत को घटाकर 3,000 वर्ग मीटर किया गया। (लगभग 7 लाख अतिरिक्त घर)
अनधिकृत कॉलोनियों में बेहतर जीवन-स्तर
मेट्रो कॉरिडोर के साथ किफायती आवास (टीओडी जोन में लगभग 18 लाख किफायती घर)
झुग्गी-झोपड़ी बस्तियों के लिए सम्मानजनक घर (17 लाख से ज्यादा झुग्गी-झोपड़ी निवासियों को फायदा)
5,000 वर्ग मीटर और उससे बड़े औद्योगिक प्लॉट पर मज़दूरों के आवास के लिए अतिरिक्त 15% एफएआर।
इसके अलावा, हाई डेंसिटी कॉरिडोर (एचडीसी) के साथ भी किफायती आवास बनाए जाएंगे।
किफायती किराये के आवास: छात्रों, कामकाजी पेशेवरों, प्रवासी मजदूरों और कम आय वाले समूहों के लिए किराये के आवास को बढ़ावा देने के लिए 50% एफएआर प्रोत्साहन।
लैंड पूलिंग नीति को लागू करना:
लगभग 12 लाख नए घर बनाने के लिए करीब 200 वर्ग किलोमीटर में शहरी विस्तार की योजना। 600 किलोमीटर का सड़क नेटवर्क भी बनाने की योजना है।
सरकार के नेतृत्व में, इंफ्रास्ट्रक्चर-पहले (इंफ्रास्ट्रक्चर-फर्स्ट) विकास - जिसमें डीडीए सुनियोजित विकास और बेहतर कनेक्टिविटी के लिए 30 मीटर और उससे चौड़ी सड़कें पहले ही बना रहा है।
टाउन प्लानिंग योजना सहित अलग-अलग लागू करने के मॉडल अपनाए जा रहे हैं।
कम से कम 20 हेक्टेयर की प्लानिंग योजना के जरिए तेजी से काम शुरू करना, जहां जमीन को इकट्ठा करके उसका विकास किया जा रहा है।
लैंड पूलिंग एरिया में हाई-डेंसिटी कॉरिडोर का विकास, जिसमें एफएआर 400 तक हो और यूईआर-II के साथ 250 मीटर चौड़ा कॉरिडोर हो।
गाड़ी खासरो और इब्राहिमपुर गांव में सेक्टर 8बी, जोन पी-II, पहला अधिसूचित सेक्टर है जो लागू होने के लिए तैयार है।
आर्थिक जगहों को नया रूप देना
इंसेंटिव वाले एफएआर के जरिए कम से कम 1000 वर्ग मीटर के प्लॉट एरिया में व्यावसायिक केंद्रों का पुनर्विकास करने की मंजूरी दी गई है, जिससे निवेश को बढ़ावा मिलेगा और वे आधुनिक व्यावसायिक गंतव्य (बिजनेस डेस्टिनेशन) में बदल सकेंगे।
30.0 मीटर या उससे ज़्यादा चौड़ी सड़क (आरओडब्ल्यू) के किनारे मिक्स्ड-यूज (मिश्रित उपयोग) विकास की मंजूरी दी गई है, जिसमें ग्राउंड फ़्लोर और पहले निचले फ्लोर (स्टिल्ट वाली इमारतों में) पर व्यावसायिक गतिविधियां की जा सकेंगी।
उद्योग को प्रोत्साहन
लचीले जोनिंग वाले आधुनिक इंडस्ट्रियल पार्क,
औद्योगिक इलाकों में बड़े रिटेल स्टोर (बिग-बॉक्स रिटेल), ई-कॉमर्स और वेयरहाउसिंग की अनुमति,
नवाचार और स्टार्ट-अप्स को बढ़ावा देने के लिए को-वर्किंग स्पेस और डेटा सेंटर्स की अनुमति।
दिल्ली की विरासत को बचाना
लगभग 1,500 हेरिटेज संपत्तियों का संरक्षण, जिनके लिए 'कल्चरल रिसोर्स मैनेजमेंट प्लान' (सांस्कृतिक संसाधन प्रबंधन योजनाएं) तैयार की जाएंगी। हेरिटेज इमारतों का 'अडैप्टिव रियूज' (बदले हुए काम के लिए इस्तेमाल) आसान बनाया जाएगा - जैसे होटल, म्यूजियम, ऑफिस, लाइब्रेरी और सांस्कृतिक गतिविधियां, साथ ही उनकी ऐतिहासिक पहचान को भी बनाए रखा जाएगा।
हेरिटेज इंसेंटिव - 50 टीडीआर- पहली बार शुरू किया गया।
ग्रीन-ब्लू दिल्ली को प्रोत्साहन
13 प्रमुख पुनर्स्थापन परियोजनाओं के माध्यम से यमुना नदी के बाढ़ क्षेत्र के लगभग 1,700 हेक्टेयर क्षेत्र की सुरक्षा, संरक्षण और पारिस्थितिक पुनर्स्थापना
यमुना बाढ़ क्षेत्र के किनारे 52 किलोमीटर का साइकिल ट्रैक विकसित किया जाएगा।
नरेला एजुकेशन हब के रूप में
नरेला को विश्व स्तरीय शिक्षा में बदलना - विश्वविद्यालयों (सार्वजनिक और निजी दोनों) के विकास के लिए 138 हेक्टेयर भूमि आरक्षित।
द्वारका न्यू इन्वेस्टमेंट हब
विश्व स्तरीय बुनियादी ढांचे, आईटी, स्टार्ट-अप, डेटा सेंटर, औद्योगिक पार्क जैसे भविष्य के लिए तैयार उद्योगों के साथ द्वारका को दिल्ली के अंतर्राष्ट्रीय प्रवेश द्वार के रूप में विकसित करना।
आवाजाही को बेहतर बनाना
यूनिफाइड मेट्रोपॉलिटन ट्रांसपोर्ट अथॉरिटी – एक एकीकृत प्रणाली की प्लानिंग/विकास और नीति को लागू करने व उनके पालन के लिए एक ही प्राधिकरण।
मेट्रो, आरआरटीएस, बसों, बीच के सार्वजनिक परिवहन, पैदल चलने और साइकिल चलाने के बीच आसान कनेक्टिविटी देने के लिए मल्टी-मॉडल ट्रांजिट हब बनाए जाएंगे, जिससे यात्रा आसान और सुविधाजनक हो जाएगी। शहर के अंदर और राज्यों के बीच कनेक्टिविटी को बेहतर बनाने के लिए यूईआर-I, यूईआर-II और यूईआर-III का विकास। यूईआर-II से पहले ही तेज कनेक्टिविटी मिल रही है।
पार्किंग की एकीकृत योजना, प्रबंधन और विनियमन के लिए यूनिफाइड पार्किंग प्लानिंग फ्रेमवर्क।
कारोबार में सुगमता (ईज ऑफ डूइंग बिजनेस)
कारोबार करने और जीवन-यापन को आसान बनाने के लिए ऑनलाइन मंजूरी और सरल प्रक्रियाएं।
इस्तेमाल वाली जगहों (यूज प्रेमिसेज) की संख्या 133 से घटाकर 45 करके नियमों को सरल बनाना।
ज्यादा लचीलापन देने के लिए रिहायशी, व्यावसायिक और औद्योगिक जोन के लिए 'नेगेटिव लिस्ट' वाला तरीका अपनाना।
पुनर्विकास रणनीति
4 हेक्टेयर जमीन की जरूरी शर्त को हटाकर प्लॉट-आधारित पुनर्विकास को बढ़ावा देना।
ज्यादा एफएआर इंसेंटिव और कम से कम प्लॉट साइज घटाकर (कम से कम प्लॉट साइज 1,000 वर्ग मीटर करना) व्यावसायिक पुनर्विकास को भी बढ़ावा दिया जाएगा।
अनधिकृत कॉलोनियों को नियमित करना
1,511 अनधिकृत कॉलोनियों में रिहायशी इमारतों को "जैसी हैं, वैसी हैं" के आधार पर नियमित करना। लेआउट प्लान की कोई जरूरत नहीं, जिससे नियमितीकरण की प्रक्रिया आसान हो जाएगी।
लगभग 45 लाख निवासियों के लिए संपत्ति के मालिकाना हक की बेहतर सुरक्षा।
सभी के लिए शहर: जीवंत, समावेशी और हर उम्र के लोगों के अनुकूल दिल्ली
सुनियोजित सांस्कृतिक सर्किट के साथ एक सुरक्षित और जीवंत 24x7 शहर को बढ़ावा देना।
बुनियादी ढांचा: कल की दिल्ली का निर्माण
पानी की गुणवत्ता सुधारने और यमुना को साफ रखने में मदद के लिए सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) और सीवरेज इंफ्रास्ट्रक्चर का विस्तार।
ऊर्जा-कुशल इमारतों और कम कार्बन वाले शहरी नियोजन के ज़रिए 'नेट जीरो' विकास को बढ़ावा दिया जाएगा।
रूफटॉप सोलर, रेनवाटर हार्वेस्टिंग, पानी की रीसाइक्लिंग, कचरे से संसाधन बनाने की पहल और ग्रीन मोबिलिटी को बढ़ावा देना।
तकनीक-आधारित शासन (गवर्नेंस)
पारदर्शी, कुशल और डेटा-आधारित शहरी योजना के लिए जीआईएस-आधारित प्लानिंग और डिजिटल प्लेटफॉर्म।
पार्क कनेक्टर्स: हरी-भरी दिल्ली, स्वस्थ दिल्ली
मनोरंजन की जगहों तक पहुंच बेहतर बनाने और इकोलॉजिकल कनेक्टिविटी को मजबूत करने के लिए 'ग्रीन कनेक्ट नेटवर्क'। शहरी जंगलों, बायोडायवर्सिटी पार्कों, इकोलॉजिकल कॉरिडोर और स्थानीय पौधों के जरिए ग्रीन कवर का विस्तार।
मुख्य राजधानी का विकास
राजधानी के प्रशासनिक और औपचारिक केंद्र को मजबूत करना। कर्तव्य पथ का फिर से विकास करना ताकि एक विश्व-स्तरीय सार्वजनिक और सांस्कृतिक जगह बनाई जा सके।
एक प्रमुख सांस्कृतिक संस्थान के तौर पर 'युगे युगीन राष्ट्रीय संग्रहालय' (लगभग 1.25 लाख वर्ग मीटर) का विकास।
कम घनत्व वाले इलाके: नियोजित विकास, सुरक्षित पर्यावरण
लगभग 150 वर्ग किलोमीटर के कम घनत्व वाले इलाकों (एलडीए) के लिए एक नियोजित और नियंत्रित ढांचा, जिसमें एनसीटी के बाहरी गांवों और 23 अधिसूचित एलडीआरए गांवों के इलाके शामिल हैं,
एलडीए में नियोजित विकास, जिसमें लैंड पूलिंग वाले इलाकों से मुख्य सड़कों का जुड़ाव बना रहे।
एक समान योजना ढांचा जो इस इलाके में रिहायशी, मनोरंजक, पीएसपी और व्यावसायिक गतिविधियों की अनुमति देता है।
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