दिल्ली: 23 एकड़ जमीन कचरे के पहाड़ से हुई मुक्त, दिसंबर 2026 तक पूरी साइट खाली करने का लक्ष्य

नई दिल्ली, 24 जून (अन्‍नू): देश की राजधानी दिल्ली को लैंडफिल साइटों (कूड़े के पहाड़ों) के दशकों पुराने बोझ से मुक्त करने की दिशा में एक बड़ी और ऐतिहासिक प्रगति सामने आई है। दिल्ली के मेयर प्रवेश वाही ने बुधवार को एमसीडी कमिश्नर संजीव खिरवार और निगम के अन्य वरिष्ठ अधिकारियों के साथ ओखला लैंडफिल साइट (Okhla Landfill Site) का जमीनी निरीक्षण किया और वहां चल रहे बायो-माइनिंग (Bio-Mining) कार्यों की विस्तृत समीक्षा की. निरीक्षण के बाद मेयर ने दावा किया कि वर्षों से जमा कूड़े के इस विशाल पहाड़ को समाप्त करने का मिशन अब अपने अंतिम चरण में पहुंच चुका है.

लंबे समय बाद प्रदूषण के ढेर से आजाद हुई 23 एकड़ बेशकीमती जमीन

दिल्ली नगर निगम (MCD) के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, ओखला लैंडफिल क्षेत्र में अब तक कुल 23 एकड़ जमीन को पूरी तरह से कचरे से मुक्त करा लिया गया है:

  • शहरी विकास को रफ्तार: लंबे समय से लाखों टन लेगेसी वेस्ट (पुराने कचरे) के नीचे दबी यह बेशकीमती भूमि अब आजाद हो चुकी है. भविष्य में इस जमीन का उपयोग हरित क्षेत्र (Green Zone), जन-सुविधाओं और अन्य महत्वपूर्ण शहरी विकास परियोजनाओं के लिए किया जा सकेगा.

  • मशीनों की क्षमता में इजाफा: अधिकारियों ने बताया कि निगम द्वारा लगातार की जा रही निगरानी और आधुनिक मशीनों की क्षमता बढ़ाने के कारण ही बायो-माइनिंग के काम में इतनी तेजी आई है.

दिसंबर 2026 तक ओखला साइट होगी पूरी तरह समतल: मेयर

निरीक्षण के दौरान मेयर प्रवेश वाही ने ओखला लैंडफिल को लेकर निगम के आगामी प्लान का खुलासा करते हुए बताया कि दिसंबर 2026 तक पूरी ओखला लैंडफिल साइट को पूरी तरह समतल और शत-प्रतिशत कूड़ा-मुक्त करने का अंतिम लक्ष्य निर्धारित किया गया है.

उन्होंने संतोष जताते हुए कहा कि पुराना जमा लेगेसी वेस्ट अब लगभग पूरी तरह समाप्त होने की कगार पर है. इसलिए, अब निगम का पूरा फोकस शहर से रोजाना निकलने वाले नए और ताजे कचरे के पृथक्करण (Sifting), वैज्ञानिक प्रसंस्करण (Processing) और उसके पर्यावरण-अनुकूल निस्तारण पर केंद्रित कर दिया गया है ताकि दोबारा कूड़े का पहाड़ खड़ा न हो सके.

मानसून को लेकर कमिश्नर संजीव खिरवार के सख्त निर्देश

चूंकि मानसून का सीजन शुरू हो चुका है, इसलिए एमसीडी कमिश्नर संजीव खिरवार ने मौके पर मौजूद डंपिंग साइट के अधिकारियों को पर्यावरण सुरक्षा को लेकर बेहद सतर्क रहने और निम्नलिखित पर्यावरणीय मानकों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने के कड़े निर्देश दिए:

  • लीचेट का सुरक्षित निस्तारण: बरसात के दिनों में कचरे से रिसने वाले प्रदूषित काले तरल (Lechate) के सुरक्षित और वैज्ञानिक निस्तारण पर विशेष जोर दिया गया है, ताकि यह जमीन या भूजल को दूषित न करे.

  • चौबीसों घंटे निगरानी: मानसून के दौरान ओखला साइट और उसके आसपास के संवेदनशील हिस्सों में निगरानी (Monitoring) को दोगुना करने को कहा गया है.

परियोजना की मुख्य उपलब्धियां (एक नजर में):

  • भूमि मुक्ति: 23 एकड़ भूमि को कचरे के साम्राज्य से सफलतापूर्वक मुक्त कराया गया.

  • डेडलाइन: दिसंबर 2026 तक पूरी ओखला डंपिंग साइट को पूरी तरह खाली करने का संकल्प.

  • भविष्य की योजना: खाली हुई जमीन पर बड़े इको-पार्क (हरित क्षेत्र) और सार्वजनिक सुविधाएं विकसित करने की संभावना.

#DelhiMCD #OkhlaLandfill #MayorPraveshWahi #SanjeevKhirwarMCD #GarbageFreeDelhi #BioMining #CentralDelhiNews #CleanDelhiGreenDelhi #LegacyWaste #EnvironmentProtection #BreakingNews #DanikKhabar

Previous

दैनिक खबर पर प्रतिदिन देखें भगवद् गीता का एक श्लोक व्याख्या सहित। आज अध्याय 1: श्लोक 40

Next

दिल्ली: सेंट्रल विस्टा के लिए डीएमआरसी की बड़ी पहल: केंद्रीय सचिवालय मेट्रो स्टेशन पर निर्माण कार्य शुरू, बनेगा ट्रिपल-इंटरचेंज हब