बाल श्रम पर लगाम सामाजिक जागरूकता से ही संभव: "कोई बच्चा पीछे न छूटे" के संकल्प के साथ मिशन वात्सल्य सक्रिय
जे कुमार पलवल/हरियाणा, 20 मार्च 2026: बाल श्रम एक ऐसा अभिशाप है जो न केवल एक बच्चे का बचपन छीनता है, बल्कि उसके भविष्य को भी अंधकार में धकेल देता है। इस कुचक्र को तोड़ने के लिए जिला बाल संरक्षण इकाई 'मिशन वात्सल्य' के तहत निरंतर प्रयास कर रही है। विभाग का स्पष्ट मानना है कि बाल श्रम और बाल भिक्षावृत्ति जैसी बुराइयों पर लगाम केवल प्रशासनिक सख्ती से नहीं, बल्कि समाज के सक्रिय सहयोग और जागरूकता से ही संभव है।
चाइल्ड हेल्पलाइन की तत्परता: जिला बाल संरक्षण इकाई के सदस्य गौरव शर्मा ने बताया कि हाल ही में चाइल्ड हेल्पलाइन (1098) पर मिली एक गुप्त सूचना के आधार पर टीम ने तुरंत कार्रवाई करते हुए बाल श्रम को रुकवाया। उन्होंने कहा कि एक जागरूक नागरिक की एक छोटी सी सूचना किसी बच्चे के जीवन को नष्ट होने से बचा सकती है। चाइल्ड हेल्पलाइन एक टोल-फ्री, 24x7 सेवा है जो संकट में फंसे बच्चों के अधिकारों की रक्षा के लिए समर्पित है। सूचना मिलने पर विभाग न केवल बच्चों का पुनर्वास सुनिश्चित करता है, बल्कि उन्हें काम पर रखने वाले नियोक्ताओं के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई भी अमल में लाता है।
मिशन वात्सल्य: "कोई बच्चा पीछे न छूटे" कार्यवाहक जिला बाल संरक्षण अधिकारी रंजन शर्मा ने बताया कि 'मिशन वात्सल्य' का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि देश का कोई भी बच्चा विकास की मुख्यधारा से पीछे न छूटे। इसके तहत बाजार के व्यापारियों और आम जनमानस को जागरूक किया जा रहा है कि वे बच्चों को काम पर रखने के बजाय उन्हें शिक्षा की ओर प्रेरित करें। रंजन शर्मा ने जानकारी दी कि सार्वजनिक स्थानों पर डिजिटल बोर्ड, वॉल पेंटिंग और जागरूकता शिविरों के माध्यम से लोगों को बाल अधिकारों के प्रति सजग बनाया जा रहा है। उन्होंने अपील की कि यदि कहीं भी बाल श्रम या बाल भिक्षावृत्ति दिखे, तो तुरंत इसकी सूचना प्रशासन को दें और एक जिम्मेदार नागरिक का कर्तव्य निभाएं।
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