20/03/26

अम्बाला: 'राष्ट्रभाषा विचार मंच' द्वारा नव संवत्सर और चैत्र नवरात्र पर भव्य ऑनलाइन साहित्यिक संगोष्ठी का आयोजन

जे कुमार अम्बाला, 20 मार्च 2026: चैत्र शुक्ल प्रतिपदा, नव विक्रमी संवत् 2083 तथा चैत्र नवरात्र के पावन अवसर पर 'राष्ट्रभाषा विचार मंच' द्वारा एक विशेष ऑनलाइन साहित्यिक-सांस्कृतिक संवाद संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में अम्बाला सहित देश के विभिन्न हिस्सों से प्रतिष्ठित कवियों, मनीषियों और विद्वानों ने शिरकत की और काव्यमयी प्रस्तुतियों के माध्यम से भारतीय संस्कृति की महिमा का गुणगान किया।

भक्ति और शक्ति का संगम: संगोष्ठी का शुभारंभ सुश्री रिंकल द्वारा देवी दुर्गा की स्तुति और आचार्य डॉ. कामदेव झा द्वारा सरस्वती वंदना से हुआ। मंच के महामंत्री डॉ. जय प्रकाश गुप्त ने अतिथियों का स्वागत करते हुए राष्ट्र उत्थान का संकल्प दोहराया। देव समाज महिला महाविद्यालय की प्राचार्या प्रो. मुक्ता अरोड़ा ने माँ के चरणों में समर्पण की भावना व्यक्त की, वहीं झज्जर से डॉ. नरेश दलाल ने शब्दों को ही अपनी इबादत बताया।

नारी शक्ति और सांस्कृतिक गौरव: दिल्ली की प्रसिद्ध कवयित्री डॉ. पूनम माटिया ने देवी के नौ स्वरूपों की वैज्ञानिक और आध्यात्मिक व्याख्या की। स्थानीय कवयित्री सवीना वर्मा और अंजलि गुप्ता ने आज की नारी में माँ दुर्गा के अंश को रेखांकित करते हुए प्रभावशाली रचनाएं प्रस्तुत कीं। मंच की प्रधान डॉ. शशि धमीजा ने वर्ष प्रतिपदा के वैश्विक महत्व पर प्रकाश डाला।

भारतीय कालगणना की वैज्ञानिकता: चंडीगढ़ से जुड़े डॉ. आशुतोष अंगिरस ने नवरात्र उपासना और 'स्त्री' शब्द की गरिमा को विदेशी शब्दों से श्रेष्ठ बताते हुए इसके वैज्ञानिक अभिप्राय स्पष्ट किए। संस्कृत विद्वान नीरज आचार्य ने संस्कृति रक्षा के लिए संस्कृत भाषा की आवश्यकता पर बल दिया। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे डॉ. कामदेव झा ने भारतीय कालगणना को विश्व की सबसे सटीक और वैज्ञानिक पद्धति बताते हुए सभी को नव संवत्सर की बधाई दी।

कार्यक्रम में विज्ञान शिक्षिका देवकी गुप्ता और प्राचार्या अनीता चोपड़ा सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे। अंत में 'वन्दे मातरम्' के सामूहिक गान के साथ इस बौद्धिक समागम का समापन हुआ।

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