26/03/26

दिल्ली: गैस सिंडिकेट पर क्राइम ब्रांच का धावा: डिलीवरी बॉय बनकर कर रहे थे हेराफेरी, क्राइम ब्रांच ने पकड़े 183 सिलेंडर

नई दिल्ली, 26 मार्च (अन्‍नू):  दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच (ANTF) ने राजधानी के संगम विहार इलाके में अवैध रूप से चल रहे एलपीजी गैस रिफिलिंग और कालाबाजारी के एक बड़े नेटवर्क को ध्वस्त किया है। एक बेहद गोपनीय सूचना के आधार पर की गई इस छापेमारी में पुलिस ने 183 इंडेन गैस सिलेंडर जब्त किए हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि इस अवैध धंधे को गैस एजेंसी के ही अधिकृत डिलीवरी एजेंट अंजाम दे रहे थे।



एसीपी (ANTF) सतेंद्र मोहन के मार्गदर्शन और इंस्पेक्टर महिपाल सिंह के नेतृत्व में गठित टीम ने संगम विहार के 'एल' ब्लॉक में स्थित तीन अलग-अलग किराए के गोदामों पर एक साथ छापेमारी की। इस दौरान पुलिस ने 154 भरे हुए और 29 खाली सिलेंडर बरामद किए। मौके से गैस ट्रांसफर करने वाली लोहे की पाइपें, वजन करने वाली मशीनें और सिलेंडरों की सील खोलने वाले उपकरण भी बरामद हुए हैं। पुलिस ने इस मामले में चार आरोपियों—शेर सिंह, सूरज परिहार, रघु राज सिंह और जितेंद्र शर्मा को पकड़ा है।



जांच में खुलासा हुआ कि ये सभी आरोपी एक नामी गैस एजेंसी के रजिस्टर्ड डिलीवरी एजेंट हैं। इनका काम शेख सराय स्थित मुख्य गोदाम से सिलेंडर लेकर ग्राहकों तक पहुँचाना था। लेकिन ये आरोपी दैनिक टारगेट पूरा करने के बजाय सिलेंडरों को अपने किराए के गोदामों में अवैध रूप से जमा कर लेते थे।


आरोपी भरे हुए सिलेंडरों की सील सावधानी से खोलते थे।
लोहे की पाइपों के जरिए भरे हुए सिलेंडर से करीब 1 से 2 किलो गैस निकालकर खाली सिलेंडरों में भर दी जाती थी।
इसके बाद इन कम वजन वाले सिलेंडरों को और चोरी की गई गैस से भरे नए सिलेंडरों को खुले बाजार में ऊंचे दामों पर बेचकर अवैध मुनाफा कमाया जाता था।
आरोपियों का प्रोफाइल और कानूनी कार्रवाई
पकड़े गए आरोपियों में रघु राज सिंह (53 वर्ष) पिछले 15 सालों से डिलीवरी एजेंट का काम कर रहा था, जबकि अन्य आरोपी भी 5 से 8 सालों से इस काम में शामिल थे। पुलिस ने इनके खिलाफ क्राइम ब्रांच थाने में आवश्यक वस्तु अधिनियम (Essential Commodities Act) की धारा 3/7 और भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 125/3(5) के तहत एफआईआर संख्या 61/2026 दर्ज की है।


डीसीपी (ANTF) राहुल अलवाल के अनुसार, यह कार्रवाई जनता की सुरक्षा और आवश्यक वस्तुओं की कालाबाजारी रोकने के उद्देश्य से की गई है। फिलहाल पुलिस इस बात की जांच कर रही है कि इस खेल में गैस एजेंसी के किसी अन्य अधिकारी की मिलीभगत तो नहीं है।


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