बैंक से 1.24 करोड़ की धोखाधड़ी करने वालों को कोर्ट ने दी कड़ी सजा: सीबीआई की जांच के बाद एमडी सहित 3 आरोपियों को 5 साल की जेल

नई दिल्ली, 23 मई (अन्‍नू): देश की प्रमुख जांच एजेंसी केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) की मजबूत पैरवी के चलते चेन्नई की विशेष सीबीआई अदालत ने बैंक धोखाधड़ी (Bank Fraud) के एक पुराने मामले में बड़ा फैसला सुनाया है। सीबीआई द्वारा जारी आधिकारिक प्रेस रिलीज के अनुसार, माननीय अदालत ने एक प्राइवेट लिमिटेड कंपनी, उसके एमडी (MD) और दो अन्य निजी व्यक्तियों को दोषी करार देते हुए 5-5 साल के सश्रम कारावास (कठोर कैद) की सजा सुनाई है। इसके साथ ही दोषियों पर लाखों रुपये का भारी-भरकम जुर्माना भी लगाया गया है।

फर्जी कर्मचारियों के नाम पर पर्सनल लोन उठाकर बैंक को लगाया चूना

सीबीआई की प्रेस रिलीज के मुताबिक, यह मामला चेन्नई में स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) की शिकायत पर 14 नवंबर 2008 को दर्ज किया गया था। जांच में सामने आया कि प्राइवेट कंपनी मैसर्स पालपाप इचिनीची सॉफ्टवेयर इंटरनेशनल लिमिटेड (M/s Palpap Ichinichi Software International Ltd.) और उसके प्रमोटरों ने मिलकर एक गहरी आपराधिक साजिश रची थी।

इन आरोपियों ने बैंक की 'एक्सप्रेस क्रेडिट स्कीम' के तहत अपनी ही कंपनी के फर्जी (काल्पनिक) कर्मचारियों के नाम पर अवैध तरीके से पर्सनल लोन मंजूर करवाए और उन्हें हड़प लिया। इस शातिर मोडस ऑपरेंडी के जरिए आरोपियों ने एसबीआई बैंक को 1.24 करोड़ रुपये का चूना लगाया था।

कंपनी के एमडी और साथियों पर लगा भारी जुर्माना

प्रेस रिलीज के अनुसार, माननीय सीबीआई कोर्ट ने मामले की सुनवाई और गवाहों के आधार पर निम्नलिखित सजा मुकर्रर की है:

  • मुख्य आरोपी: कंपनी के एमडी और सीईओ (MD & CEO) पी. सेंथिल कुमार सहित दो अन्य निजी व्यक्तियों (पी. ए. ससी कुमार और पी. थंजई चेज़ियन) को 5 साल की कठोर जेल और कुल 11.7 लाख रुपये के सामूहिक जुर्माने की सजा सुनाई गई है।

  • निजी कंपनी पर कार्रवाई: अदालत ने धोखाधड़ी में शामिल प्राइवेट कंपनी (मैसर्स पालपाप इचिनीची सॉफ्टवेयर इंटरनेशनल लिमिटेड) पर भी 1.2 Lakh रुपये का अलग से जुर्माना ठोका है।

लंबे ट्रायल के बाद मिला न्याय, एक आरोपी की मौत

सीबीआई ने इस पूरे घोटाले की गहनता से तफ्तीश करने के बाद 11 दिसंबर 2009 को ही आरोपियों के खिलाफ कोर्ट में चार्जशीट दाखिल कर दी थी। इस मामले में एक अन्य निजी व्यक्ति जी. वैद्यनाथन भी आरोपी था, लेकिन लंबे चले ट्रायल (मुकदमे) के दौरान उसकी मृत्यु हो गई, जिसके बाद उसके खिलाफ कानूनी कार्यवाही को समाप्त (Abated) कर दिया गया था। अंततः, सीबीआई द्वारा पेश किए गए पुख्ता दस्तावेजों और सबूतों के आधार पर अदालत ने तीनों जीवित आरोपियों को सलाखों के पीछे भेजकर न्याय मिसाल कायम की है।

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