उपभोक्ता प्राधिकरण ने भ्रामक मोटापा घटाने वाले विज्ञापनों के लिए वीएलसीसी लिमिटेड पर 3 लाख रुपये का जुर्माना लगाया
आरएस अनेजा, 23 अगस्त नई दिल्ली
केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (सीसीपीए) ने यूएस-एफडीए अनुमोदित कूलस्कल्प्टिंग प्रक्रिया/मशीन के उपयोग के माध्यम से मोटापा घटाने और स्लिमिंग उपचार के संबंध में भ्रामक विज्ञापन प्रकाशित करने के लिए वीएलसीसी लिमिटेड पर 3 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है।
इससे पहले, सीसीपीए ने कूलस्कल्प्टिंग उपचारों पर भ्रामक विज्ञापन प्रकाशित करने के लिए काया लिमिटेड पर 3 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया था। कंपनी के विज्ञापनों में दावा किया गया था कि "काया का नॉन-सर्जिकल फैट रिडक्शन" और "काया कूलस्कल्प्टिंग से आसानी से वजन घटाता है"। विज्ञापनों पहले और बाद की भ्रामक तस्वीरें भी दिखाई गई थी, जो पूरे शरीर में भारी मात्रा में फैट कम होने का संकेत दे रही थीं। ये दावे वास्तविक अमेरिकी-एफडीए अनुमोदन से परे थे और इस प्रक्रिया को वजन घटाने के उपचार के रूप में गलत तरीके से प्रस्तुत किया गया था। काया लिमिटेड ने सीसीपीए के आदेश का अनुपालन किया है और जुर्माना राशि जमा कर दी है।
वीएलसीसी लिमिटेड का मामला सीसीपीए के संज्ञान में एक शिकायत और स्लिमिंग एवं सौंदर्य क्षेत्र में विज्ञापनों की निगरानी के माध्यम से आया। जांच करने पर पाया गया कि वीएलसीसी एक ही सत्र में भारी वजन घटाने और इंच कम करने का अतिशयोक्तिपूर्ण दावा कर रही थी, जो कूलस्कल्पटिंग मशीन को दी गई वास्तविक स्वीकृति से कहीं अधिक था, जिससे उपभोक्ता भ्रमित हो रहे थे।
जांच से पता चला कि कुछ कथित दावे इस प्रकार किए गए जिनमें “एक सत्र में 600 ग्राम और 7 सेमी तक वजन कम करना”, “एक सत्र में 1 साइज़ स्थायी रूप से कम करना”, “एक घंटे में एक साइज तक कम करना”, "वीएलसीसी लेकर आया है एक अभूतपूर्व मोटापा घटाने वाला उपचार", "लिपोलेजर से एक सत्र में ही 6 सेमी और 400 ग्राम वजन कम करना" आदि शामिल थे।
ऐसे विज्ञापनों से उपभोक्ताओं के बीच गलत धारणा बनी कि कूलस्कल्प्टिंग स्थायी और महत्वपूर्ण वजन घटाने की गारंटी है। वास्तव में, यह प्रक्रिया केवल शरीर के कुछ विशिष्ट भागों में मौजूद वसा में कमी के लिए तथा केवल 30 या उससे कम बॉडी मास इंडेक्स (बीएमआई) वाले व्यक्तियों के लिए ही स्वीकृत है।
यूएस-एफडीए अनुमोदित कूलस्कल्पटिंग मशीन के संबंध में सीसीपीए ने पाया कि यह वजन घटाने का उपचार नहीं है, यूएस-एफडीए को प्रस्तुत किए गए नैदानिक परीक्षणों में कॉकेशियन, हिस्पैनिक और अफ्रीकी अमेरिकी जातीयता के केवल 57 प्रतिभागी शामिल थे, जिनमें कोई भारतीय या एशियाई प्रतिनिधित्व नहीं था, यूएस-एफडीए ने भारत में कूलस्कल्पटिंग के उपयोग के लिए कोई विशेष अनुमोदन नहीं दिया है, इन महत्वपूर्ण तथ्यों को नजरअंदाज करते हुए, वीएलसीसी ने उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 का उल्लंघन करके उपभोक्ताओं को भ्रमित किया, 3 लाख रुपये के आर्थिक जुर्माने के अलावा, सीसीपीए ने निर्देश दिया है कि वीएलसीसी को अपने भविष्य के सभी विज्ञापनों में निम्नलिखित का सख्ती से पालन करना होगा।
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