चंडीगढ़: तरबूज के नमूनों की जांच: शुरुआती रिपोर्ट में राहत, पर सावधानी अभी भी जरूरी
चंडीगढ़, 06 मई (अन्नू): मुंबई में हुई एक दुखद मृत्यु और चंडीगढ़ PGI में लगातार बढ़ते पेट दर्द व उल्टी-दस्त के मामलों ने स्वास्थ्य विभाग को सतर्क कर दिया है। इसी कड़ी में फूड सेफ्टी विभाग ने शहर के विभिन्न क्षेत्रों से तरबूज के नमूने लेकर उनकी गहन जांच की थी। राहत की खबर यह है कि विभाग की स्थानीय लैब की शुरुआती रिपोर्ट में तरबूज सुरक्षित पाए गए हैं। जांच के दौरान मुख्य रूप से हानिकारक बैक्टीरिया जैसे ई-कोलाई, साल्मोनेला और मिलावटी रंगों की मौजूदगी पर ध्यान केंद्रित किया गया था, जिनमें फिलहाल कोई भी संदिग्ध तत्व नहीं मिला है।
पुख्ता जांच के लिए स्टेट लैब पर टिकी निगाहें
हालांकि शुरुआती टेस्ट नेगेटिव आए हैं, लेकिन स्वास्थ्य विभाग अभी किसी जल्दबाजी में क्लीन चिट देने के पक्ष में नहीं है। विभाग का कहना है कि ये नतीजे उनकी अपनी लैब के हैं, और अंतिम पुष्टि के लिए नमूनों को स्टेट लैब भेजा गया है। अगले कुछ दिनों में वहां से रिपोर्ट आने के बाद ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो पाएगी। PGI में मरीजों की बढ़ती संख्या को देखते हुए इस बार विभाग ने सामान्य जांच के बजाय एडवांस बैक्टीरिया टेस्ट का सहारा लिया है ताकि किसी भी सूक्ष्म खतरे को पकड़ा जा सके।
संक्रमण के अन्य कारण और बचाव के तरीके
फूड सेफ्टी ऑफिसर सुखविंदर सिंह ने स्पष्ट किया है कि बीमारी का कारण केवल फल के अंदर की मिलावट ही नहीं होती, बल्कि बाहरी कारक भी बेहद अहम हैं। कई बार खेतों में सिंचाई के लिए इस्तेमाल होने वाला दूषित पानी या परिवहन के दौरान फैली गंदगी तरबूज को संक्रमित कर देती है। इसके अलावा, रेहड़ियों पर पहले से कटे हुए तरबूज, जिन पर मक्खियां बैठती हैं, इंफेक्शन का सबसे बड़ा स्रोत बनते हैं। विशेषज्ञों की सलाह है कि हमेशा ताजा फल ही काटें और साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखें।
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