चंडीगढ़ लेपर्ड स्किन तस्करी केस: अब दिल्ली CBI करेगी जांच, हिमाचल से जुड़े अंतरराज्यीय गिरोह का होगा पर्दाफाश
चंडीगढ़ 09 जनवरी (अन्नू ) : चंडीगढ़ शहर के सेक्टर-22 में हुए तेंदुए की खाल की तस्करी के हाई-प्रोफाइल मामले की कमान अब केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने संभाल ली है। चंडीगढ़ वन विभाग के विशेष अनुरोध पर इस संवेदनशील मामले को दिल्ली सीबीआई की टीम को स्थानांतरित कर दिया गया है। जांच एजेंसी ने आरोपी विक्रम सिंह बघेल और अवधेश चौधरी के खिलाफ वन्यजीव संरक्षण अधिनियम (Wildlife Protection Act) की विभिन्न गंभीर धाराओं के तहत प्राथमिकी (FIR) दर्ज कर ली है। चूंकि अपराध का केंद्र चंडीगढ़ था, इसलिए इस मामले की अंतिम चार्जशीट भी चंडीगढ़ स्थित सीबीआई की विशेष अदालत में ही पेश की जाएगी।
इस पूरे नेटवर्क का भंडाफोड़ पिछले साल सितंबर 2025 में हुआ था, जब डायरेक्टोरेट ऑफ रेवेन्यू इंटेलिजेंस (DRI) को तस्करी की गुप्त सूचना मिली थी। डीआरआई की चंडीगढ़ यूनिट और मुंबई कस्टम ने एक संयुक्त ऑपरेशन चलाकर सेक्टर-22 की सूद धर्मशाला में जाल बिछाया। टीम ने फर्जी ग्राहक बनकर तस्करों से सौदा किया और मौके पर ही राजस्थान के रहने वाले दोनों आरोपियों को तेंदुए की खाल के साथ दबोच लिया। शुरुआती जांच के बाद डीआरआई ने इस मामले को आगे की कानूनी कार्रवाई के लिए चंडीगढ़ वन्यजीव विभाग को सौंप दिया था, लेकिन नेटवर्क की गहराई को देखते हुए अब इसकी बागडोर सीबीआई के पास है।
अब तक की पूछताछ में चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। तस्करों ने स्वीकार किया है कि वे तेंदुए की खाल को हिमाचल प्रदेश के दुर्गम इलाकों से हासिल करते थे और फिर उसे देश के बड़े बाजारों में ऊंचे दामों पर बेच देते थे। सीबीआई अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि हिमाचल के किन शिकारियों से इनका संपर्क था और इस अंतरराज्यीय सिंडिकेट में और कितने रसूखदार लोग शामिल हैं। यह गिरोह लंबे समय से दुर्लभ वन्यजीवों के अंगों के व्यापार में सक्रिय बताया जा रहा है।
कानूनी तौर पर देखा जाए तो तेंदुआ वन्यजीव संरक्षण अधिनियम-1972 की पहली अनुसूची (Schedule-1) में शामिल है, जिसे टाइगर के समान ही सर्वोच्च सुरक्षा प्राप्त है। इस श्रेणी के जीवों का शिकार या उनके शरीर के अंगों का व्यापार करना गैर-जमानती अपराध की श्रेणी में आता है। अधिनियम की धारा 51 के अनुसार, यदि सीबीआई अदालत में आरोपियों के खिलाफ दोष सिद्ध हो जाता है, तो उन्हें कम से कम 3 से 7 साल तक के कठोर कारावास और भारी जुर्माने की सजा भुगतनी पड़ सकती है।
#CBICase #LeopardSkinSmuggling #ChandigarhNews #WildlifeCrime #CBIInvestigation #HimachalNews #WildlifeProtectionAct #CrimeNewsIndia #LeopardTrafficking #DelhiCBI #EnvironmentalCrime #Sector22Chandigarh #AnimalRightsIndia #DanikKhabar #ForestDepartment #BigBreaking #ChandigarhCBI #WildlifeJustice #LawAndOrder