कंबोडिया मानव तस्करी और साइबर गुलामी मामला: NIA ने 3 राज्यों के 6 ठिकानों पर की छापेमारी

नई दिल्ली, 8 जुलाई (अन्‍नू): राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) द्वारा जारी एक आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, कंबोडिया से जुड़े मानव तस्करी और साइबर गुलामी (Cyber Slavery) के एक बड़े मामले में बड़ी कार्रवाई की गई है। एनआईए की टीमों ने मंगलवार को उत्तर भारत के तीन राज्यों के 6 अलग-अलग ठिकानों पर एक साथ सघन तलाशी अभियान (Searches) चलाया।

3 राज्यों में छापेमारी

एनआईए द्वारा जारी प्रेस रिलीज के अनुसार, यह छापेमारी बिहार, उत्तर प्रदेश और दिल्ली में की गई। इसमें बिहार के चार जिलों—गोपालगंज, सीवान, सारण और पूर्वी चंपारण में एक-एक ठिकाने पर दबिश दी गई। इसके साथ ही उत्तर प्रदेश और दिल्ली में भी एक-एक स्थान पर तलाशी ली गई। यह कार्रवाई मामले के गिरफ्तार आरोपियों और फरार चल रहे संदिग्धों के सहयोगियों व मददगारों के ठिकानों पर की गई, जहां से पुलिस ने स्मार्टफोन, लैपटॉप, डिजिटल उपकरण और कई आपत्तिजनक दस्तावेज बरामद किए हैं।

साइबर गुलामी का सिंडिकेट

प्रेस विज्ञप्ति के मुताबिक, यह छापेमारी मानव तस्करी और साइबर गुलामी के उस बड़े सिंडिकेट की जांच का हिस्सा है, जिसका मास्टरमाइंड फरार आरोपी आनंद कुमार सिंह उर्फ मुन्ना सिंह है। इस मुख्य आरोपी के साथ उसके चार सहयोगियों प्रहलाद कुमार सिंह, अभय नाथ दुबे, अभिरंजन कुमार और रोहित यादव के खिलाफ एनआईए ने मई 2026 में चार्जशीट दाखिल की थी। इससे पहले फरवरी 2026 में आनंद के तीन गुर्गों (अभय, अभिरंजन और रोहित) को कंबोडिया से दिल्ली पहुंचने पर गिरफ्तार किया गया था।

मोटी सैलरी का झांसा

एनआईए की प्रेस रिलीज के अनुसार, अब तक की जांच में सामने आया है कि यह संगठित सिंडिकेट भारतीय युवाओं को कंबोडिया में वैध और मोटी सैलरी वाली नौकरियों का झूठा झांसा देकर फंसाता था। भारत में विभिन्न सब-एजेंटों और ट्रैवल एजेंटों के माध्यम से इन युवाओं को कंबोडिया भेजा जाता था। वहां पहुंचते ही पीड़ितों के पासपोर्ट छीन लिए जाते थे और उन्हें जबरन ऑनलाइन घोटाला करने वाली कंपनियों (Scam Companies) के हवाले कर दिया जाता था।

इनकार पर अमानवीय प्रताड़ना

जांच एजेंसी के मुताबिक, पीड़ितों ने अपने बयानों में खुलासा किया है कि कंबोडिया की स्कैम कंपनियों में उनसे जबरन काम कराया जाता था। अगर कोई युवक काम करने से मना करता था, तो उसे गंभीर मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना दी जाती थी। इंकार करने पर युवाओं को बिजली के झटके (Electric Shocks) देना, जबरन बंधक बनाकर रखना और खाना-पानी न देना जैसी अमानवीय यातनाएं दी जाती थीं। एनआईए ने बताया कि मामले के अन्य फरार आरोपियों और सिंडिकेट के सदस्यों की तलाश में लगातार प्रयास जारी हैं।

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