25/09/25

कला सांस्कृतिक विरासत को समृद्ध करने और समाज को अधिक संवेदनशील बनाने का सशक्त साधन है: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू

आरएस अनेजा, 25 सितम्बर नई दिल्ली - 64वीं राष्ट्रीय कला प्रदर्शनी का पुरस्कार समारोह नई दिल्ली में आयोजित किया गया, जिसमें राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू मुख्य अतिथि के रूप में सम्मिलित हुईं।

इस कार्यक्रम में संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत, विवेक अग्रवाल, सचिव, संस्कृति मंत्रालय और नंद लाल ठाकुर, उपाध्यक्ष, ललित कला अकादमी भी उपस्थित रहे। राष्ट्रपति ने दृश्य कला में विलक्षण योगदान के लिए 20 उत्कृष्ट कलाकारों को पुरस्कार प्रदान किए।

इस अवसर पर राष्ट्रपति मुर्मू ने सभी पुरस्कार विजेताओं को बधाई दी और विश्वास व्यक्त किया कि उनका कार्य अन्य कलाकारों को प्रेरित करेगा। उन्होंने कहा कि “भारतीय परंपरा में, कला को लंबे अर्से से एक आध्यात्मिक साधना माना जाता रहा है। कला केवल सौंदर्यबोध का माध्यम ही नहीं, बल्कि हमारी सांस्कृतिक विरासत को समृद्ध करने और समाज को अधिक संवेदनशील बनाने का सशक्त साधन भी है।”

कलाकारों को आर्थिक सहायता देने के महत्व पर ज़ोर देते हुए राष्ट्रपति ने ललित कला अकादमी द्वारा पहली बार कलाकृतियों को बिक्री के लिए रखे जाने की पहल का स्वागत किया, जिससे 1 करोड़ रुपये से अधिक की धनराशि एकत्रित हुई।

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