15/08/26

नारनौल: ढोसी पहाड़ी पर 57 करोड़ की लागत से बन रहा 870 मीटर लंबा रोपवे; 30% काम पूरा, इसी साल तैयार होने की उम्मीद

महेंद्रगढ़, 15 अगस्त (अन्‍नू): महेंद्रगढ़ जिले के प्रसिद्ध ऐतिहासिक और धार्मिक स्थल ढोसी पहाड़ी को राष्ट्रीय पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में बड़ी कामयाबी मिली है। कुलताजपुर से पहाड़ी की चोटी तक बनने वाले 870 मीटर लंबे रोपवे का निर्माण कार्य तेजी से चल रहा है। करीब 57 करोड़ रुपये की लागत से बन रही इस परियोजना का लगभग 30 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है और इसी साल (2026) इसके चालू होने की पूरी संभावना है।

कुलताजपुर से शुरू होगा रोपवे; NHLML कर रही निर्माण

  • शुरुआती पॉइंट: रोपवे परियोजना के लिए कुलताजपुर गांव में करीब दो एकड़ भूमि अधिग्रहित की गई है। यहीं से केबिन की शुरुआत होगी और केबल लाइन ढोसी पहाड़ी की चोटी तक जाएगी।

  • 2 केबिन का संचालन: शुरुआती चरण में रोपवे पर 2 आधुनिक केबिन चलाए जाएंगे, जिनमें सुरक्षा के अंतरराष्ट्रीय मानकों का पूरा ध्यान रखा जा रहा है।

  • निर्माता एजेंसी: इस महत्त्वाकांक्षी प्रोजेक्ट का क्रियान्वयन नेशनल हाईवे लॉजिस्टिक्स मैनेजमेंट लिमिटेड (NHLML) द्वारा किया जा रहा है।

अड़चन दूर: NCZ नोटिस के बाद सीएम के हस्तक्षेप से दोबारा शुरू हुआ काम

  • क्यों अटका था काम: ढोसी पहाड़ी के नेचुरल कंजर्वेशन जोन (NCZ) में शामिल होने के कारण जिला नगर योजनाकार (DTP) विभाग ने नोटिस जारी कर निर्माण पर रोक लगा दी थी।

  • ऐसे दूर हुई बाधा: पूर्व मंत्री एवं नांगल चौधरी के पूर्व विधायक डॉ. अभय सिंह यादव ने यह मामला मुख्यमंत्री के समक्ष उठाया। मुख्यमंत्री की समीक्षा बैठक के बाद विभागीय आपत्तियों को दूर कर निर्माण दोबारा शुरू कराया गया।

  • 2018 में हुई थी घोषणा: पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने 2018 में नांगल चौधरी विधायक के आग्रह पर ढोसी पहाड़ी का दौरा कर इसे पर्यटन स्थल बनाने का ऐलान किया था।

च्यवन ऋषि की तपोस्थली; बुजुर्गों और श्रद्धालुओं को मिलेगी बड़ी राहत

  • धार्मिक व ऐतिहासिक महत्व: ढोसी पहाड़ी को वैदिक काल के महर्षि च्यवन की तपोभूमि माना जाता है। यहीं पर पहली बार प्रसिद्ध आयुर्वेदिक औषधि च्यवनप्राश का निर्माण हुआ था। चोटी पर च्यवन ऋषि का प्राचीन मंदिर, पवित्र कुंड और गुफाएं स्थित हैं।

  • सुगम होगी चढ़ाई: नारनौल से 7 किमी दूर राजस्थान सीमा पर स्थित इस पहाड़ी की चढ़ाई काफी कठिन मानी जाती थी। रोपवे बनने से बुजुर्गों, बच्चों, महिलाओं और दिव्यांग श्रद्धालुओं के लिए चोटी तक पहुंचना सुलभ हो जाएगा, जिससे स्थानीय व्यापार और रोजगार को बढ़ावा मिलेगा।

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