अंबाला: श्रीमद् भागवत कथा में बोले शशांक महाराज, "मृत्यु के समय जीवनभर के संस्कार ही साथ आते हैं"
अंबाला, 29 अप्रैल (अन्नू): अंबाला स्थित श्री बांके बिहारी मंदिर में आयोजित श्रीमद् भागवत कथा के तृतीय दिवस पर शशांक महाराज ने धर्म, कर्म और भक्ति के अनमोल संदेश साझा किए। महाराज ने उपस्थित श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि मनुष्य के अंतिम समय में वही संस्कार सामने आते हैं, जिन्हें उसने अपने पूरे जीवन में अपनाया होता है। उन्होंने दुर्योधन का उदाहरण देते हुए समझाया कि यदि व्यक्ति जीवन के अंत तक भी द्वेष और ईर्ष्या का त्याग नहीं करता, तो उसका पतन निश्चित है।
सकारात्मकता का दिया मंत्र
शशांक महाराज ने आज के समाज में बढ़ती नकारात्मकता पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि लोग दूसरों की प्रगति से दुखी होने लगे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि सच्चा धर्म वही है, जिसमें हम दूसरों की सफलता और सुख को देखकर प्रसन्न हों। सकारात्मक सोच को जीवन का हिस्सा बनाने के लिए उन्होंने भक्तों को प्रतिदिन सुबह एक डायरी में प्रभु को धन्यवाद देने का सरल सुझाव दिया।
कुंती के दुख मांगने का भावपूर्ण प्रसंग
कथा के दौरान महाराज ने अर्जुन, दुर्योधन और माता कुंती के प्रसंगों की अत्यंत भावुक व्याख्या की। उन्होंने बताया कि माता कुंती ने प्रभु से दुख इसलिए मांगा था, ताकि वे दुख के माध्यम से ईश्वर को सदैव याद रखें। इसके अतिरिक्त, उन्होंने अश्वत्थामा द्वारा छोड़े गए ब्रह्मास्त्र और माता कुंती के संवाद के माध्यम से समर्पण का महत्व समझाया। उन्होंने कहा कि ईश्वर के द्वार तक केवल वही पहुँच पाता है, जो पूर्ण भाव से समर्पण करना जानता है।
इस अवसर पर कथा के बीच भजनों की प्रस्तुति ने श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया और भक्त भक्ति भाव में झूम उठे। सभा के प्रधान दिनेश बहल ने आए हुए अतिथियों का स्वागत किया। इस धार्मिक आयोजन में संजीव भाटिया, संजय गौरी सहित भारी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।
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