27/02/26

अम्बाला छावनी: आर्य कॉलेज में गूंजी गुरु तेग बहादुर जी की महिमा, 350वीं जयंती पर विशेष संगोष्ठी का आयोजन

जे कुमार अम्बाला छावनी, 27 फरवरी 2026: मानवता और धर्म की रक्षा के लिए अपना सर्वस्व न्यौछावर करने वाले सिखों के नौवें गुरु, श्री गुरु तेग बहादुर जी की 350वीं जयंती के उपलक्ष्य में आज आर्य कॉलेज के पंजाबी विभाग द्वारा एक भव्य सेमिनार का आयोजन किया गया। इस संगोष्ठी के माध्यम से वक्ताओं ने गुरु जी के बलिदान, उनकी शिक्षाओं और आज के समय में उनके आदर्शों की प्रासंगिकता पर प्रकाश डाला।

बलिदान और साहस की गौरवगाथा

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए प्राचार्या डॉ. अंजु बाला ने गुरु जी को नमन करते हुए कहा कि उनकी शहादत मानव इतिहास में धार्मिक स्वतंत्रता और साहस का अद्वितीय उदाहरण है। उन्होंने कहा, "गुरु जी ने सिखाया कि अन्याय के विरुद्ध डटकर खड़े रहना और मानवीय गरिमा की रक्षा करना ही सर्वोच्च धर्म है।"

विद्वानों के विचार: एक नजर में

संगोष्ठी के दौरान विभिन्न प्राध्यापकों ने गुरु जी के जीवन के विभिन्न पहलुओं पर अपने विचार साझा किए:

  • प्रो. सिल्वी अग्रवाल व डॉ. पंकज: उन्होंने गुरु जी द्वारा कश्मीरी पंडितों के धर्म की रक्षा के लिए दिए गए सर्वोच्च बलिदान को याद किया और सिख धर्म को सनातन परंपरा का एक अभिन्न अंग बताया।

  • डॉ. गुरमीत व प्रो. शुभम: उन्होंने सिख धर्म में सेवा और 'लंगर' की पवित्र भावना के साथ-साथ धर्म के लिए प्राणों की आहुति देने की प्रेरणा पर जोर दिया।

  • डॉ. अरविन्द व डॉ. रेखा: उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे आधुनिकता की दौड़ में अपने महान बलिदानियों को न भूलें। गुरु जी के आदर्श एक समावेशी और न्यायपूर्ण समाज के निर्माण के लिए मार्गदर्शक हैं।

  • डॉ. सोनिया: उन्होंने एक भावपूर्ण कविता के माध्यम से बताया कि सत्य के मार्ग पर चलने वाले हमेशा 'प्रकाशकुंज' बनकर अमर रहते हैं।

छात्राओं ने वाणी से दी श्रद्धांजलि

सेमिनार के दौरान कॉलेज की छात्राओं—आंचल, कृतिका, हरमन, मुस्कान, साक्षी, खुशी, काजल, जश्नप्रीत, लवप्रीत और तानिया ने ओजस्वी भाषणों और कविताओं के माध्यम से गुरु जी के सिद्धांतों को साझा किया।

इस गरिमामयी अवसर पर प्रो. रंजू, डॉ. सरिता, डॉ. अनीता गोदारा सहित कॉलेज का समस्त स्टाफ और भारी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे। कार्यक्रम का समापन गुरु जी की शिक्षाओं को आत्मसात करने के संकल्प के साथ हुआ।

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