दिल्ली पुलिस क्राइम ब्रांच का मानवीय चेहरा: AHTU ने दिल्ली-हरियाणा से 4 लापता मासूमों और एक दिव्यांग महिला को ढूंढ निकाला, परिवारों से कराया मिलन
नई दिल्ली, 23 जून (अन्नू): दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच की एंटी-ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट (AHTU) ने एक बार फिर अपनी मुस्तैदी, आधुनिक तकनीकी सर्विलांस और मानवीय संवेदनशीलता का परिचय देते हुए पांच अनमोल जिंदगियों को बचाकर उनके परिवारों में खुशियां लौटाई हैं। दिल्ली पुलिस क्राइम ब्रांच (AHTU) द्वारा जारी आधिकारिक प्रेस रिलीज के अनुसार, पुलिस टीम ने दिल्ली और पड़ोसी राज्य हरियाणा के विभिन्न इलाकों में त्वरित रेस्क्यू ऑपरेशन चलाकर चार लापता नाबालिग बच्चों और एक दिव्यांग (Specially Abled) महिला को सुरक्षित बरामद कर उनके परिजनों से मिलाया है।
विशेष आयुक्त (स्पेशल सीपी, क्राइम) एच. जी. एस. धालीवाल (IPS) के संदेश के मुताबिक, एएचटीयू (AHTU) टीम ने समय, दूरी और भावनात्मक चुनौतियों को पार करते हुए हर एक मामले को सर्वोच्च प्राथमिकता दी और लापता लोगों को सुरक्षित उनके घर पहुंचाया।
केस 1: निजामुद्दीन से लापता दो मासूम भाई नई दिल्ली रेलवे स्टेशन से बरामद
हजरत निजामुद्दीन थाने में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 137(2) के तहत दर्ज मामले में 10 जून 2026 से लापता दो सगे नाबालिग भाइयों (उम्र 10 वर्ष और 6 वर्ष) को सुरक्षित ढूंढ निकाला गया।
साथी चिल्ड्रन होम में मिले बच्चे: एसीपी सुरेश कुमार के पर्यवेक्षण और इंस्पेक्टर मुकेश कुमार व एएसआई अजय कुमार झा के नेतृत्व में गठित टीम ने खोजबीन शुरू की।
रास्ता भटकने से पहुंचे स्टेशन: जांच में सामने आया कि दोनों बच्चे घर के बाहर खेलते-खेलते रास्ता भटक गए थे और नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पहुंच गए थे। प्लेटफार्म पर अकेले घूमते देख पुलिस ने उन्हें सुरक्षात्मक हिरासत में लेकर 'साथी चिल्ड्रन होम' (पहलगंज) में रखा था, जहां से क्राइम ब्रांच ने उन्हें रेस्क्यू कर कानूनी औपचारिकताओं के बाद माता-पिता से मिलवाने के लिए संबंधित थाने को सौंप दिया।
केस 2: गुमशुदगी के 24 घंटे के भीतर बस स्टैंड से सुरक्षित मिली दिव्यांग महिला
स्वरूप नगर थाना क्षेत्र से 11 जून 2026 को लापता हुई 45 वर्षीय एक दिव्यांग महिला को क्राइम ब्रांच ने अपनी मुस्तैदी से मात्र 24 घंटे के भीतर सुरक्षित बरामद कर लिया।
दवा न मिलने से हुईं दिशाहीन: महिला मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्या से जूझ रही थी और कुछ दिनों से उसकी दवाएं छूट गई थीं। वह बिना बताए अपनी बहन के घर के लिए निकली थी, लेकिन रास्ता भूल गई।
भाई ने मौके पर की पहचान: एएसआई अजय कुमार झा द्वारा विकसित मैन्युअल इनपुट्स और तकनीकी सर्विलांस की मदद से टीम महिला के भाई को साथ लेकर दिल्ली के 'मंदिर मार्ग बस स्टैंड' पहुंची और महिला को ढूंढ निकाला। औपचारिकताएं पूरी करने के बाद उसे सुरक्षित घर पहुंचाकर परिजनों के सुपुर्द किया गया।
केस 3: पढ़ाई की चाह में नाराज होकर घर छोड़ गया था 15 वर्षीय किशोर, सोनीपत से रेस्क्यू
बवाना थाने में दर्ज मामले के तहत 13 जून 2026 से लापता एक 15 वर्षीय किशोर को क्राइम ब्रांच की टीम ने हरियाणा के सोनीपत (Sonipat) इलाके से सुरक्षित बरामद किया।
चाचा (ताऊ) से हुआ था विवाद: इंस्पेक्टर मनोज दहिया, हेड कांस्टेबल प्रदीप और कांस्टेबल अशोक कुमार की टीम ने जब बच्चे को रेस्क्यू कर उसकी काउंसलिंग की, तो उसने बताया कि उसने अभी-अभी 10वीं की परीक्षा पास की है और वह आगे पढ़ना चाहता है। करीब 9-10 साल पहले पिता की मृत्यु और मां के दूसरी शादी कर लेने के बाद से वह पिछले 7-8 वर्षों से अपने ताऊ के साथ रह रहा था।
आगे पढ़ाने से किया था मना: आगे की पढ़ाई की इच्छा जताने पर ताऊ ने उसका समर्थन करने से इनकार कर दिया, जिससे नाराज और भावुक होकर उसने गुस्से में घर छोड़ दिया था। पुलिस टीम ने उसे उचित परामर्श देकर सुरक्षित रेस्क्यू किया।
केस 4: बिहार से इलाज कराने दिल्ली आया 7 साल का बच्चा लापता, वाट्सएप ग्रुप की मदद से खोजा
आर.के. पुरम थाने में दर्ज एफआईआर संख्या 146/2026 (U/s 137(2) BNS) के तहत 20 जून 2026 को लापता हुए एक 7 वर्षीय मासूम को भी क्राइम ब्रांच ने 24 घंटे के भीतर ढूंढ निकाला।
वाट्सएप और जिपनेट (ZIPNET) से मिला सुराग: इंस्पेक्टर मुकेश कुमार और एएसआई अजय कुमार झा की टीम को सोशल मीडिया (वाट्सएप ग्रुप) के जरिए बच्चे के लापता होने की जानकारी मिली थी। एएसआई अजय कुमार झा ने तुरंत 'जिपनेट' (ZIPNET) पर डेटा खंगाला तो हुलिए से मैच करता एक बच्चा दिखा।
बिहार से इलाज के लिए आया था दिल्ली: पुलिस ने तुरंत बच्चे के पिता से संपर्क कर वाट्सएप पर फोटो साझा की, जिसे देखकर पिता ने तुरंत अपने बेटे को पहचान लिया। पिता ने बताया कि बच्चा मानसिक स्वास्थ्य समस्या से पीड़ित है और उसे बिहार से दिल्ली इलाज के लिए लाया गया था, जो घर के बाहर खेलते हुए लापता हो गया था। उसे 'सीडब्ल्यूसी लाजपत नगर' (CWC Lajpat Nagar) से सुरक्षित रिकवर कर परिजनों के हवाले किया गया।
दिल्ली पुलिस का संदेश: "हमेशा सतर्क, हमेशा मददगार"
इस सफल रेस्क्यू ऑपरेशन्स पर दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने अपनी प्रतिबद्धता दोहराते हुए कहा कि एएचटीयू (ISO 9001:2015 प्रमाणित यूनिट) के लिए हर एक गायब होने वाली शिकायत बेहद संवेदनशील और सर्वोच्च प्राथमिकता पर होती है। टीम तब तक चैन से नहीं बैठती जब तक लापता मासूम सुरक्षित अपने माता-पिता की गोद में नहीं पहुंच जाता। पुलिस की इस तत्परता ने चार अलग-अलग परिवारों को उनके जीवन की सबसे बड़ी खुशी और नया हौसला दिया है।
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