चाय के 20 रुपये के UPI पेमेंट ने फंसाया: अहमदाबाद के चाय विक्रेता का पूरा बैंक खाता फ्रीज; हाईकोर्ट ने कहा-पूरा अकाउंट क्यों रोका?
अहमदाबाद, 19 जुलाई (अन्नू): डिजिटल इंडिया के इस दौर में ऑनलाइन पेमेंट जहां लोगों के काम आसान कर रहा है, वहीं गुजरात के अहमदाबाद में एक छोटे चाय विक्रेता के लिए 20 रुपये का एक मामूली डिजिटल लेनदेन गले की फांस बन गया है। अहमदाबाद के मिर्जापुर इलाके में 'अल-सफर पान एंड टी कॉर्नर' चलाने वाले सुल्तान अहमद शेख का पूरा बैंक खाता (Bank Account) केवल इसलिए फ्रीज कर दिया गया, क्योंकि उन्होंने एक ग्राहक से चाय के बदले 20 रुपये का यूपीआई (UPI) भुगतान स्वीकार किया था।
क्या है 20 रुपये की 'मनी ट्रेल' का पूरा मामला?
यह अजीबोगरीब मामला तब शुरू हुआ जब 19 अप्रैल को एक ग्राहक सुल्तान अहमद की दुकान पर चाय पीने आया और उसने 20 रुपये ऑनलाइन ट्रांसफर किए। बाद में जब पुलिस की जांच आगे बढ़ी, तो पता चला कि यह 20 रुपये उस बड़ी धन श्रृंखला (Money Trail) का हिस्सा थे, जिसकी जांच तेलंगाना की साइबराबाद साइबर अपराध पुलिस एक बड़े ऑनलाइन फ्रॉड (धोखाधड़ी) के मामले में कर रही है। जैसे ही यह संदिग्ध 20 रुपये सुल्तान के खाते में पहुंचे, जांच एजेंसी के निर्देश पर एचडीएफसी (HDFC) बैंक ने तुरंत सुल्तान का पूरा बैंक खाता ही फ्रीज कर दिया।
आरोपी न होने पर भी भुगत रहे सजा, ईएमआई रोकने पर पहुंचे हाईकोर्ट
इस पूरे मामले का सबसे परेशान करने वाला पहलू यह है कि सुल्तान अहमद इस साइबर धोखाधड़ी में न तो कोई आरोपी हैं और न ही संदिग्ध। वे केवल एक सामान्य दुकानदार हैं जिन्होंने अपने धंधे के तहत पैसे लिए थे। पूरा खाता ब्लॉक होने के कारण वे बैंक में जमा अपनी मेहनत की कमाई का एक भी रुपया इस्तेमाल नहीं पा रहे हैं। बैंक के चक्कर काटने के बाद भी जब कोई समाधान नहीं निकला, तो सुल्तान ने गुजरात उच्च न्यायालय (High Court) का दरवाजा खटखटाया। उनके वकीलों ने कोर्ट को बताया कि खाता बंद होने से सुल्तान को अपनी ईएमआई (EMI) चुकाने और दुकान व घर के दैनिक खर्चों को चलाने में बेहद गंभीर संकट का सामना करना पड़ रहा है।
गुजरात हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी: पूरे खाते के बजाय सिर्फ विवादित रकम फ्रीज हो
इस मामले पर सुनवाई करते हुए गुजरात हाईकोर्ट के जस्टिस निखिल करियल ने जांच एजेंसियों और बैंकों की कार्यप्रणाली पर बेहद महत्वपूर्ण टिप्पणी की। माननीय न्यायाधीश ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि जब कोई नागरिक या व्यापारी किसी आपराधिक मामले में सीधे तौर पर नामजद या आरोपी नहीं होता है, तो अधिकारियों को उसके पूरे बैंक खाते को सीज करने के बजाय केवल विवादित राशि (यानी इस मामले में सिर्फ 20 रुपये) को ही होल्ड या फ्रीज करना चाहिए। पूरा खाता बंद करना न्यायसंगत नहीं है।
अदालत ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए राज्य सरकार और संबंधित अधिकारियों को आवश्यक निर्देश प्राप्त करने का आदेश जारी किया है। गुजरात हाईकोर्ट अब इस बेहद संवेदनशील और डिजिटल लेनदेन से जुड़े मामले पर अगली सुनवाई 24 जुलाई को करेगा।
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