26/05/26

अंबाला में भारत विकास परिषद का अनूठा प्रयास: बाल संस्कार शिविर में बच्चों को सिखाए चरित्र निर्माण के गुण, दिए जल संरक्षण के टिप्स

अंबाला, 26 मई (अन्‍नू): बच्चों में नैतिक मूल्यों, अच्छी आदतों और सामाजिक जिम्मेदारी की भावना विकसित करने के उद्देश्य से भारत विकास परिषद विवेक शाखा की ओर से स्थानीय पब्लिक स्कूल में एक दिवसीय 'बाल संस्कार शिविर' का बेहद शानदार आयोजन किया गया। इस शिविर के दौरान जहां एक तरफ बच्चों को चरित्र निर्माण और गुरु-शिष्य परंपरा के महत्व से अवगत कराया गया, वहीं दूसरी तरफ पर्यावरण व जल संरक्षण के प्रति भी जागरूक किया गया। शिविर की शुरुआत उपस्थित अतिथियों और बच्चों द्वारा संयुक्त रूप से गायत्री मंत्र के सामूहिक पाठ के साथ अत्यंत भक्तिमय माहौल में हुई।

बैंक प्रणाली, रामायण प्रश्नोत्तरी और अच्छी आदतों पर हुआ विशेष मंथन

शिविर के मुख्य सत्रों में बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए परिषद के विभिन्न पदाधिकारियों ने अपने विचार साझा किए:

  • एटीएम और बैंक सिस्टम की जानकारी: शाखा अध्यक्ष अशोक कक्कड़ ने बच्चों के चरित्र निर्माण में परिषद की भूमिका पर प्रकाश डाला। इसके साथ ही उन्होंने आज के डिजिटल युग में बच्चों को बैंकिंग प्रणाली और एटीएम (ATM) के सुरक्षित प्रयोग की व्यावहारिक जानकारी दी।

  • रामायण प्रश्नोत्तरी: शिविर के दौरान बच्चों के लिए एक विशेष रामायण प्रश्नोत्तरी (क्विज) का आयोजन किया गया, जिसमें नन्हे-मुन्ने बच्चों ने पूरे उत्साह के साथ बढ़-चढ़कर भाग लिया और अपनी संस्कृति को जाना।

  • नैतिक मूल्य और गुरु-शिष्य संबंध: संस्कार संयोजक अनिल तनेजा ने बच्चों को जीवन में अच्छी आदतों को अपनाने की सलाह दी और भारतीय संस्कृति में गुरु-शिष्य के पवित्र संबंधों के महत्व पर बल दिया।

  • उत्साहवर्धन गीत: कार्यक्रम के बीच में सुनीता वर्मा ने प्रसिद्ध प्रेरणादायक गीत "हम होंगे कामयाब" गाकर पूरे हॉल में मौजूद बच्चों के भीतर एक नई ऊर्जा और उत्साह का संचार किया।

पंचतत्वों की रक्षा और जल संरक्षण के सिखाए उपाय; मोबाइल के खतरों से किया आगाह

संस्कार शिविर के दूसरे सत्र में बच्चों को प्रकृति और आधुनिक जीवनशैली के प्रति सचेत किया गया। पर्यावरण संरक्षण विषय पर बोलते हुए ओपी बनमली ने जीवन में 'पंचतत्वों' (भूमि, गगन, वायु, अग्नि, नीर) के महत्व की विस्तृत चर्चा की। इसी कड़ी में वीके थापर ने बच्चों को बेहद सरल तरीके से दैनिक जीवन में जल संरक्षण (पानी बचाने) के कारगर उपाय सिखाए और पानी बर्बाद न करने की शपथ दिलाई। वहीं, आज के दौर में बच्चों की सबसे बड़ी लत बन चुके मोबाइल फोन को लेकर सुदेश करकरा ने बच्चों को मोबाइल के लाभ-हानि और इसके अत्यधिक इस्तेमाल से होने वाले मानसिक व शारीरिक दुष्परिणामों के प्रति बेहद संवेदनशीलता के साथ आगाह किया।

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