परमेशवर की परम दिव्य भक्ति किए बिना जीव सुखी नहीं हो सकता - श्रीराम मुद्रगल शास्त्री
जे कुमार, अम्बाला 11 सितम्बर - श्री सनातन धर्म सभा (पंजी0) अंबाला छावनी के पितृ उद्धार हेतु संगीतमयी श्रीमद्भागवत कथा ज्ञानयज्ञ के तीसरे दिन पर अमृतवर्षा करते हुए श्रीराम मुद्रगल शास्त्री महाराज वृन्दावन वाले ने सूत ने शोैनकादि ऋषियों के पूछे प्रश्नों के उत्तर देते हुए कहा श्रीमद्भागवत का भक्ति,ज्ञान व वैराग्य को स्थापित करने के लिए ही प्रकट हुआ है।
वेद रूपी वृक्ष का फल ही श्रीमद्भागवत है। भगवत भक्ति के बिना जीव का जीवन अधूरा है। भगवान के साथ हमारा संबंध सेवा का संबंध है। परमेश्वर परम भोक्ता है और हम सारे जीव उसके सेवक हैं। परमेशवर की परम दिव्य भक्ति किए बिना जीव सुखी नहीं हो सकता।
शास्त्री ने अमृत वर्षा करते हुए कहा- धर्म का फल मोक्ष है जिसकी सार्थकता अर्थ प्राप्ति में नहीं हैं बल्कि अर्थ केवल धर्म के लिए ही है। भगवान के अवतार का वर्णन करते हुए पूज्या देवी जी कहा- भगवान के जो चैबीस अवतार हैं वे जीवात्मा व परमात्मा के भेद को समाप्त कर मोक्षदायक की भूमिका निभाने के लिए ही इस पृथ्वी पर अवतरित होते हैं।
शास्त्री बताया कि संत कृपा के बिना भगवत प्राप्ति सभंव नहीं । भगवान कपिल ने माता देवहुती के पूछने पर कहा कि अगर आप भगवत प्राप्ति चाहती हैं तो वैष्णव संत की शरणागति करो। भगवान ने कहा कि जो अनन्य भाव से मेरी भक्ति करता है जो समस्त संसार के सुखों को त्यागकर मुझे पकड़े रहता है मेरे आश्रय में रहकर मेरी ही कथाओं को सुनता व कहता है वहीं साधु व संत है। सतं सगंति के बिना कल्याण संभव नहीं।
परीक्षित ने शुकदेव से प्रश्न किया कि भगवान देवताओं का उद्धार करते है और दैत्यों का ही वध करते है। कथा पंडाल महाराज को प्रो.तारा चन्द गुप्ता, सभा महासचिव सुधीर विन्दलस, कोषाध्यक्ष अशोक सिंगला, कैलाश मल्होत्रा, माया राम बंसल, लक्ष्मी नारायण खन्ना, सुशील गोयल, राकेश गुप्ता, राजेश गुप्ता, अचलेश शर्मा, संजय मल्होत्रा, प्रधानाचार्य ठाकुर सिंह तथा मन्दिर पुजारियों आदि ने महाराज श्री को पुष्प हार भेंट कर अभिनंदन किया।
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