नशामुक्त मध्य प्रदेश की ओर कदम: जनभागीदारी, पुनर्वास और समाधान के माध्यम से सामाजिक परिवर्तन

एन.एस.बाछल, 31 अगस्त, भोपाल।

भारत की युवा शक्ति देश की सबसे बड़ी पूंजी है। युवाओं की ऊर्जा, क्षमता और प्रतिभा का सही उपयोग राष्ट्र निर्माण की सबसे महत्वपूर्ण आवश्यकता है। नशे की लत का बढ़ता चलन केवल व्यक्तियों या परिवारों की समस्या नहीं है, बल्कि यह समाज और राष्ट्र के भविष्य से जुड़ा एक गंभीर सामाजिक संकट है। इसी सोच के साथ, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आह्वान पर, नशामुक्त भारत अभियान पूरे देश में चलाया जा रहा है। इस अभियान का उद्देश्य न केवल नशे की लत के दुष्परिणामों के बारे में जागरूकता पैदा करना है, बल्कि समाज की सामूहिक शक्ति के माध्यम से नशे के आदी लोगों को उपचार, परामर्श और पुनर्वास प्रदान करके उन्हें मुख्यधारा में वापस लाना भी है।

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में नशामुक्त भारत अभियान को जन आंदोलन बनाने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। राज्य सरकार ने सामाजिक भागीदारी, जन जागरूकता, उपचार, पुनर्वास और संस्थागत समन्वय को अभियान का आधार बनाया है। सामाजिक न्याय और दिव्यांग कल्याण मंत्री नारायण सिंह कुशवाहा के मार्गदर्शन में विभाग नशामुक्ति के खिलाफ व्यापक स्तर पर गतिविधियां चला रहा है।

जन जागरूकता से लेकर मादक पदार्थों की लत के खिलाफ जन आंदोलन तक

नशाखोरी न केवल व्यक्ति के स्वास्थ्य को प्रभावित करती है, बल्कि उसके परिवार, आर्थिक स्थिति और सामाजिक जीवन पर भी गंभीर असर डालती है। युवा पीढ़ी को नशे से बचाना और नशे की गिरफ्त में आ चुके लोगों को नया जीवन देना सरकार और समाज दोनों की साझा जिम्मेदारी है।

राज्य सरकार ने इस चुनौती को केवल प्रशासनिक दृष्टिकोण से नहीं देखा है। इस अभियान में शिक्षण संस्थानों, सामाजिक संगठनों, धार्मिक संगठनों, स्वयंसेवी संगठनों, युवाओं, छात्रों और आम नागरिकों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने के प्रयास किए गए हैं। यही सामूहिक प्रयास नशा-विरोधी अभियान की सबसे बड़ी ताकत बनकर उभरा है।

राज्य में नशामुक्ति के प्रति व्यापक जन जागरूकता अभियान के लिए 213 पंजीकृत संगठन कार्यरत हैं। इन संगठनों की भूमिका लोगों को नशे की लत के दुष्परिणामों से अवगत कराना और साथ ही प्रभावित व्यक्तियों और उनके परिवारों की सहायता करना है।

मध्य प्रदेश के प्रयासों को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित किया गया

मध्य प्रदेश द्वारा विनाशमुक्त भारत अभियान के अंतर्गत किए गए प्रभावी प्रयासों की राष्ट्रीय स्तर पर भी सराहना की गई है। वर्ष 2023-24 के लिए संस्थागत पुरस्कार शहीद भगत सेवा समिति, रीवा और राजीव तिवारी, मुक्ति विनाशमुक्ति केंद्र, भोपाल को व्यक्तिगत श्रेणी में प्रदान किया गया।

इन प्रयासों और उत्कृष्ट कार्य को अंजाम देने वाले व्यक्तियों और संगठनों को 13 अगस्त 2025 को भोपाल के रवींद्र भवन में आयोजित राज्य स्तरीय नशामुक्त शपथ ग्रहण समारोह में सम्मानित किया गया। यह सम्मान न केवल संबंधित संगठनों और व्यक्तियों की उपलब्धि है, बल्कि नशामुक्त समाज के निर्माण के लिए मध्य प्रदेश की सामूहिक प्रतिबद्धता का भी प्रमाण है।

पुनर्वास और उपचार की एक सुदृढ़ प्रणाली

नशामुक्ति अभियान का एक महत्वपूर्ण हिस्सा उन लोगों को नया जीवन देना है जो नशे की चपेट में आ चुके हैं। सरकार का उद्देश्य न केवल ऐसे व्यक्तियों को नशे से मुक्त करना है, बल्कि उपचार, परामर्श और पुनर्वास के माध्यम से उन्हें समाज की मुख्यधारा में पुनः एकीकृत करना भी है।

राज्य में 13 नशा मुक्ति पुनर्वास केंद्र (आईआरसीए) कार्यरत हैं। इसके साथ ही, 7 आउटरीच और ड्रॉप-इन सेंटर (ओडीआईसी) और 3 सामुदायिक आधारित सहकर्मी-नेतृत्व हस्तक्षेप केंद्र (सीपीएलआई) भी संचालित किए जा रहे हैं। इन व्यवस्थाओं के माध्यम से नशा प्रभावित व्यक्तियों तक पहुँचने और उन्हें उपचार एवं आवश्यक सहायता प्रदान करने के प्रयास किए जा रहे हैं।

भारत सरकार के सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय के सहयोग से नशामुक्ति एवं पुनर्वास केंद्र स्थापित करने और चलाने के लिए अनुदान उपलब्ध कराए जा रहे हैं। राज्य के 11 केंद्रीय जिलों - भोपाल, सागर, इंदौर, जबलपुर, रीवा, ग्वालियर, नरसिंहपुर, सतना, बड़वानी, नरसिंहपुर और उज्जैन में नशामुक्ति केंद्र स्थापित करने के लिए वित्तीय स्वीकृति प्रदान की गई है। इसके साथ ही, क्षेत्र के विभिन्न जिलों में नशामुक्ति संबंधी सुविधाओं के विस्तार के लिए व्यवस्थाओं को सुदृढ़ किया जा रहा है।

12 हजार कुशल स्वयंसेवक इस बदलाव में भागीदार बने।

मध्य प्रदेश में नशाखोरी के खिलाफ लड़ाई को समाज के हर वर्ग तक पहुंचाने के लिए 12 हजार मास्टर स्वयंसेवकों को तैयार किया गया है। ये स्वयंसेवक पूरे क्षेत्र में लोगों को नशे के दुष्परिणामों के बारे में जागरूक कर रहे हैं और नशामुक्त भारत अभियान से संबंधित गतिविधियों को जनमानस तक पहुंचाने में मदद कर रहे हैं।

स्वयंसेवकों की भूमिका भी महत्वपूर्ण है क्योंकि नशे की समस्या का समाधान केवल कानून और प्रशासन के माध्यम से संभव नहीं है। परिवार, समाज और समुदाय की सक्रिय भागीदारी आवश्यक है। प्रशिक्षित स्वयंसेवक स्थानीय स्तर पर लोगों को जागरूक करने, युवाओं से संवाद स्थापित करने और नशामुक्ति गतिविधियों को गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।

युवाओं और छात्रों पर विशेष ध्यान दिया गया है।

मध्य प्रदेश में चलाए गए अभियान के दौरान युवाओं और छात्रों को जागरूक करने पर विशेष जोर दिया गया। विद्यालयों, महाविद्यालयों, विश्वविद्यालयों और सार्वजनिक स्थानों पर नशामुक्ति से संबंधित कार्यक्रम आयोजित किए गए। 18 नवंबर 2025 को नशामुक्त भारत अभियान की पांचवीं वर्षगांठ के अवसर पर युवाओं और छात्रों को अभियान से जोड़ने के लिए विभिन्न स्थानों पर कार्यक्रम आयोजित किए गए।

डिजिटल मीडिया का उपयोग करते हुए क्यूआर कोड के माध्यम से लगभग 2.46 लाख ऑनलाइन ई-प्रतिज्ञाएं भी दर्ज की गईं। यह अभियान आधुनिक प्रौद्योगिकी के उपयोग और युवाओं की व्यापक भागीदारी का एक उदाहरण है।

31 मई 2025 को विश्व तंबाकू निषेध दिवस, 26 जून को नशा मुक्ति के खिलाफ अंतर्राष्ट्रीय दिवस, 2 से 8 अक्टूबर तक शराब निषेध सप्ताह और 30 जनवरी 2026 को शराब निषेध संकल्प दिवस के अवसर पर राज्य में विशेष जागरूकता गतिविधियों का आयोजन किया गया। इन कार्यक्रमों के माध्यम से समाज के विभिन्न वर्गों को नशीली दवाओं की लत से होने वाले शारीरिक, मानसिक, वित्तीय और सामाजिक नुकसान के बारे में जागरूक किया गया।

"नशे से दस्तरी है बहुत नशा" : पुलिस की प्रभावी साझेदारी

नशामुक्त समाज के निर्माण में कानून प्रवर्तन एजेंसियों की भूमिका भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। मध्य प्रदेश पुलिस ने नशाखोरी के खिलाफ जन जागरूकता फैलाने के लिए "नशे से दस्तरी है बहुत नशारी" नामक एक विशेष अभियान चलाया। पुलिस की भागीदारी से यह अभियान समाज के विभिन्न वर्गों तक पहुँचने में सफल रहा।

इस प्रकार, विभिन्न विभागों, पुलिस, सामाजिक संगठनों, शिक्षण संस्थानों और नागरिक समाज के बीच समन्वय स्थापित करके, मादक पदार्थों की लत के खिलाफ एक व्यापक वातावरण का निर्माण किया जा रहा है। अवैध मादक पदार्थों के व्यापार पर नियंत्रण और समाज में मादक पदार्थों के प्रति जागरूकता—इन दोनों स्तरों पर किए गए प्रयास अभियान को अधिक प्रभावी बनाते हैं।

श्री नारायण सिंह कुशवाहा के मार्गदर्शन में सामाजिक साझेदारी की शक्ति

सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजन कल्याण मंत्री नारायण सिंह कुशवाहा के मार्गदर्शन में, नशामुक्त भारत अभियान को सामाजिक सरोकारों से जोड़कर आगे बढ़ाया जा रहा है। उनका मानना ​​है कि व्यसन के विरुद्ध संघर्ष में समाज की सक्रिय भागीदारी अत्यंत आवश्यक है। मात्र सरकारी प्रयास पर्याप्त नहीं होंगे; जब परिवार, शिक्षक, युवा, सामाजिक संगठन और जन प्रतिनिधि एकजुट होकर खड़े होंगे, तभी स्थायी सामाजिक परिवर्तन संभव है।

विभागीय प्रयासों के माध्यम से, नशामुक्ति के क्षेत्र में जागरूकता के साथ-साथ उपचार और पुनर्वास प्रणालियों को भी मजबूत किया जा रहा है। इस अभियान का उद्देश्य व्यसनी व्यक्ति को अपराधी या समाज से बहिष्कृत व्यक्ति के रूप में देखने के बजाय, उपचार और पुनर्वास की आवश्यकता वाले व्यक्ति के रूप में उसका समर्थन करना है।

नशामुक्त मध्य प्रदेश: सामूहिक संकल्प की प्रमुख दिशा

नशामुक्त समाज बनाने की जिम्मेदारी हर परिवार और नागरिक की है। युवाओं को नशे से दूर रखने, नशे के प्रभाव में आए लोगों को सहयोग देने और समाज में सकारात्मक वातावरण बनाने के लिए सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता है।

मध्य प्रदेश का संदेश स्पष्ट है: नशे से दूर रहो, स्वस्थ जीवन की चाहत को अपनाओ। जनभागीदारी, जागरूकता और पुनर्वास के समन्वित प्रयासों से ही नशामुक्त, स्वस्थ और सशक्त मध्य प्रदेश संभव हो पाएगा।

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