हमारी आध्यात्मिक शक्ति भारत को विश्वगुरु बनने की क्षमता प्रदान करती है - मध्यप्रदेश उपमुख्यमंत्री
एन.एस.बाछल, 31 जुलाई, भोपाल।
हमारे देश की सबसे बड़ी ताकत धर्म और आध्यात्मिकता है। हमारी संस्कृति वसुधैव कुटुंबकम का समर्थन करती है। हमारा देश ऐसा देश है जो पूरे विश्व को परिवार मानता है। हमारी यही ताकत भारत को विश्व गुरु बनाने की शक्ति प्रदान करती है। यह विचार राज्य के उपमुख्यमंत्री और लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा मंत्री राजेंद्र शुक्ला ने व्यक्त किया। उन्होंने संस्कारपूर्ण शिक्षा पर विशेष जोर दिया। शुक्ला तुलसी मानस प्रतिष्ठान के स्वर्ण जयंती समारोह के समापन कार्यक्रम में उपस्थित प्रबुद्ध लोगों को संबोधित कर रहे थे। मानस भवन में आयोजित इस कार्यक्रम की अध्यक्षता विधानसभा अध्यक्ष तोमर ने की।
जडेरूआ धाम के संत हरिदास जी महाराज, पूर्व सांसद विवेक नारायण शेजवलकर, विधायक डॉ. सतीश सिकरवार एवं संस्थान के अध्यक्ष अभय पापरीकर एवं महेश मुदगल सहित अन्य पदाधिकारी मंचासीन थे।
उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ला ने कहा कि वर्तमान में विश्व के कई देशों में अराजकता चरम पर है। ऐसे में, पूरे विश्व को एक ऐसे देश के नेतृत्व की आवश्यकता है जो भारत को परिवार मानता हो। उन्होंने कहा कि हमें विरासत में मिली आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करना ही नहीं, बल्कि उसे बढ़ावा देना भी हमारा दायित्व है। राजेंद्र शुक्ला ने कहा कि युवा पीढ़ी को आधुनिकता के साथ-साथ अपने मूल धर्म, आध्यात्मिकता और संस्कृति की रक्षा करते हुए जमीन से जुड़े रहना चाहिए। प्रसन्नता की बात है। ग्वालियर का तुलसी मानस प्रतिष्ठान जैसे संस्थान अच्छा काम कर रहे हैं।
उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ला ने कहा कि रामचरितमानस आध्यात्मिक ज्ञान का स्रोत है। यदि हम रामचरितमानस को अपने मन में संजोकर रखें, तो हमारा कोई भी कदम भटकेगा नहीं। उन्होंने यह भी कहा कि केवल दंड भुगतना ही पर्याप्त नहीं है, दंड को सुसंस्कृत बनाना आवश्यक है। यदि दंड सुसंस्कृत होगा, तो युवा पीढ़ी भटकेगी नहीं और निश्चित रूप से हम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संकल्प के अनुरूप 2047 तक भारत को एक विकसित राष्ट्र और विश्व गुरु बनाने में सफल होंगे।
विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि बुराई से मुक्ति का मार्ग आध्यात्मिकता में ही निहित है। इसी भावना से प्रेरित होकर हमारे पूर्वजों ने तुलसी मानस प्रतिष्ठान की स्थापना की थी। इस संस्था के 50 वर्ष पूरे होने पर प्रसन्नता की बात है। इस संस्थान ने विरासत को संरक्षित रखने के लिए सराहनीय प्रयास किए हैं। तुलसीदास द्वारा रचित रामचरित मानस जनमानस तक पहुंचने में क्यों सफल रही? यह एक ऐसी पुस्तक है जिसका अध्ययन हमारे भीतर विनम्रता, आस्था और कृतज्ञता का संचार करेगा। उन्होंने तुलसी मानस प्रतिष्ठान के पदाधिकारियों को 50 वर्षों की सफल यात्रा के लिए बधाई और शुभकामनाएं दीं। तोमर ने विश्वास व्यक्त किया कि यह संस्था सनातन संस्कृति को संरक्षित रखने में अपना योगदान जारी रखेगी।
इस अवसर पर विधायक डॉ. सतीश सिकरवार ने तुलसी मानस प्रतिष्ठान के पुस्तकालय के विस्तार के लिए अपने विधानमंडल कोष से 5 लाख रुपये दान करने की घोषणा की। उन्होंने बताया कि यह संस्था पिछले 50 वर्षों से तुलसीदास जी के व्यक्तित्व और कार्यों तथा रामचरित मानस को जनमानस तक पहुंचाने के लिए कार्यरत है।
पूर्व सांसद विवेक नारायण शेजवालकर ने कहा कि तुलसी मानस प्रतिष्ठान लोगों में सामाजिक चेतना और राष्ट्रवाद जगाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। इसके साथ ही संस्थान द्वारा धार्मिक और आध्यात्मिक जागृति का कार्य भी किया जा रहा है।
तुलसी मानस प्रतिष्ठान के अध्यक्ष अभय पाप्रिकर ने स्वागत भाषण दिया। कार्यक्रम में महेश मुद्गल ने भी अपने विचार व्यक्त किए। कार्यक्रम का संचालन रामबाबू कटारे ने किया।
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