राजस्थान फाउंडेशन की नॉलेज सीरीज का 5वां एपिसोड आयोजित,शिक्षा के बदलते परिदृश्य में भामाशाहों और प्रवासी राजस्थानियों की भूमिका पर हुआ मंथन
एन.एस.बाछल, 28 अगस्त, जयपुर।
राजस्थान के राजकीय विद्यालयों में शिक्षा की गुणवत्ता को वैश्विक मानकों के अनुरूप विकसित करने, आधुनिक सुविधाओं का विस्तार करने तथा आधारभूत ढांचे को सुदृढ़ बनाने में प्रवासी राजस्थानियों (NRR/NRI) एवं भामाशाहों का सहयोग महत्वपूर्ण है। इसी उद्देश्य से राजस्थान फाउंडेशन द्वारा गुरुवार को नॉलेज सीरीज के 5वें एपिसोड का वर्चुअल आयोजन किया गया। कार्यक्रम में ‘ज्ञान संकल्प पोर्टल’ तथा ‘राजस्थान में शिक्षा के बदलते परिदृश्य में भामाशाहों की भूमिका एवं भावी साझेदारी’ विषय पर विस्तार से मंथन हुआ।
कार्यक्रम में अमेरिका प्रवासी डॉ. अशोक जैन द्वारा जालोर के ग्राम दादाल, सायला स्थित राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय के विकास में लगभग 7 करोड़ रुपये के योगदान तथा डॉ. विजय पाल आर्य द्वारा अपनी दिवंगत माताजी की स्मृति में भरतपुर के बल्लभगढ़ स्थित राजकीय बालिका उच्च माध्यमिक विद्यालय में लगभग 2.5 करोड़ रुपये की लागत से पुनर्निर्माण का उल्लेख किया गया। इसी प्रकार IIFL फाउंडेशन की निदेशक श्रीमती मधु जैन के नेतृत्व में उदयपुर एवं सलूम्बर के 102 राजकीय बालिका विद्यालयों में जनजाति वर्ग की छात्राओं के सर्वांगीण विकास के लिए किए जा रहे प्रयासों और बालिका शिक्षा पर अब तक 16 करोड़ रुपये व्यय किए जाने की जानकारी देते हुए इनके कार्यों की सराहना की गई।
अतिरिक्त मुख्य सचिव शिक्षा विभाग राजेश यादव ने बताया की राज्य में स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा 65 हजार से अधिक राजकीय विद्यालय संचालित हैं, जिनमें लगभग 75 लाख से अधिक विद्यार्थी अध्ययनरत हैं। राज्य सरकार का लक्ष्य विद्यार्थियों को केवल विद्यालय तक पहुंचाना ही नहीं, बल्कि उन्हें 21वीं सदी के कौशल, डिजिटल शिक्षा, आधुनिक प्रयोगशालाओं एवं गुणवत्तापूर्ण शैक्षणिक वातावरण से जोड़ना है। इसके लिए राज्य सरकार के साथ प्रवासी राजस्थानी समाज, भामाशाहों एवं कॉरपोरेट जगत की साझेदारी महत्वपूर्ण है। पिछले एक साल में शिक्षा के क्षेत्र में भामाशाहों ने लगभग 300 करोड़ रुपये का योगदान दिया है ।
आधुनिक सुविधाओं के लिए सहयोग का आह्वान
अतिरिक्त मुख्य सचिव ने प्रवासी राजस्थानियों,भामाशाहों एवं कॉरपोरेट संस्थानों से विद्यालयों में अतिरिक्त कक्षाओं के निर्माण, जीर्णोद्धार, सुरक्षा दीवारों तथा दूरस्थ क्षेत्रों में बालिकाओं के लिए आधुनिक स्वच्छता सुविधाओं के विकास में सहयोग का आह्वान किया। इसके साथ ही ग्रामीण विद्यालयों में स्मार्ट बोर्ड, कंप्यूटर, कोडिंग एवं रोबोटिक्स लैब, सोलर पावर सिस्टम, क्लासरूम लाइब्रेरी, साइंस किट्स तथा मेधावी एवं आर्थिक रूप से कमजोर विद्यार्थियों के लिए छात्रवृत्ति और ग्लोबल मेंटरशिप कार्यक्रमों को सहयोग के प्रमुख क्षेत्र बताया। उन्होंने सरकारी विद्यालयों को ‘21st Century Learning Centers’ के रूप में विकसित करने के लिए सहभागिता पर जोर दिया।
पारदर्शिता का माध्यम बना ज्ञान संकल्प पोर्टल
ज्ञान संकल्प पोर्टल के माध्यम से भामाशाह, एनआरआई एवं औद्योगिक संस्थान अपनी पसंद के विद्यालय को गोद लेने अथवा सीधे वित्तीय सहयोग प्रदान कर सकते हैं। सहयोग राशि पर आयकर अधिनियम की धारा 80G के तहत छूट का प्रावधान है तथा विदेशी स्रोतों से सहयोग प्राप्त करने के लिए पोर्टल को एफसीआरए के तहत पंजीकृत किया गया है। पोर्टल के माध्यम से अब तक 650 करोड़ रुपये से अधिक का सहयोग प्राप्त हो चुका है।
भामाशाह सम्मान की गौरवशाली परंपरा
शिक्षा विभाग द्वारा राज्य एवं जिला स्तर पर भामाशाह सम्मान समारोह आयोजित किए जा रहे हैं। अब तक राज्य स्तर पर 2,485 भामाशाहों द्वारा 1,473 करोड़ रुपये से अधिक का सहयोग प्राप्त हुआ है। उल्लेखनीय सहयोग करने वाले दानदाताओं के नाम पर विद्यालयों के नामकरण का भी प्रावधान है।
राजस्थान फाउंडेशन आयुक्त मनीषा अरोड़ा ने वीसी माध्यम से जुड़े सभी प्रवासी राजस्थानियों का स्वागत एवं अभिनदन करते हुये बताया कि पिछले चार सीरीज सूचना प्रौद्योगिकी,एआई, उद्योग एवं लैंड होल्डर रिफॉर्म रीको से संबंधित थी। उन्होंने राज्य में सरकार की निवेश नीतियों के बारे विस्तार से अवगत कराया। उन्होंने प्रवासी राजस्थानियों से शिक्षा के क्षेत्र में अधिकतम योगदान की अपील की ।
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