अपंजीकृत संस्थानों को जानकारी देकर और "श्रम प्रहरी" बनकर श्रम कल्याण में योगदान दें : मध्यप्रदेश

एन.एस.बाछल, 28 मई, भोपाल।

श्रमिकों को सुरक्षित कार्य परिस्थितियाँ और सामाजिक सुरक्षा प्रदान करने के उद्देश्य से श्रम विभाग द्वारा एक महत्वपूर्ण पहल की गई है। आम नागरिक 'श्रम प्रहरी' बनकर अपंजीकृत संस्थानों और निर्माण स्थलों की गोपनीय सूचनाएँ दे सकते हैं, ताकि श्रम कल्याण योजनाओं का लाभ लक्षित वर्ग तक सुचारू रूप से पहुँच सके। श्रमिकों के हितों की रक्षा और कार्यस्थल पर उनके स्वास्थ्य एवं सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सभी संस्थानों और निर्माण स्थलों का श्रम विभाग के अंतर्गत पंजीकरण अनिवार्य है। पंजीकरण न होने की स्थिति में श्रमिक सरकार द्वारा संचालित विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं के लाभों से वंचित रह जाते हैं।

श्रम विभाग के कामकाज में पारदर्शिता लाने के लिए, वर्तमान में कार्यरत और पंजीकृत निर्माण कार्यों, अति-खतरनाक और अन्य कारखानों की ऑनलाइन सूची श्रम विभाग के आधिकारिक पोर्टल labour.mp.gov.in पर सार्वजनिक कर दी गई है। नागरिक इस पोर्टल पर जाकर पंजीकृत प्रतिष्ठानों की जांच कर सकते हैं और यदि कोई प्रतिष्ठान अपंजीकृत पाया जाता है, तो वे टोल-फ्री श्रमिक हेल्पलाइन नंबर 1800-233-8888 पर इसकी सूचना दे सकते हैं, जो 'श्रम प्रहरी' की भूमिका निभा रही है। नागरिकों से प्राप्त ईमानदार सुझावों के आधार पर, श्रम विभाग द्वारा संबंधित स्थानों का तुरंत निरीक्षण किया जाएगा और आवश्यक कानूनी और दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।

गैर-पंजीकृत योजनाकारों के लिए 2 वर्ष तक के कारावास का प्रावधान।

कारखाना अधिनियम-1948 के अनुसार, ऐसे किसी भी परिसर में, जहाँ विद्युत सुविधा के साथ या उसके बिना विनिर्माण कार्य में 20 से अधिक श्रमिक कार्यरत हैं, मुख्य कारखाना निरीक्षक से लाइसेंस प्राप्त करना अनिवार्य है। इसके साथ ही, भवन एवं अन्य निर्माण श्रमिक (योजना एवं सेवा-शर्तों का विनियमन) अधिनियम-1996 के तहत, किसी भी निर्माण कार्य को प्रारंभ करने से पहले श्रम विभाग को सूचित करना नियोक्ता का दायित्व है। ऐसे योजनाकारों के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई का भी कड़ा प्रावधान है जो संस्थानों का पंजीकरण कराने में विफल रहते हैं। कारखानों के मामले में, अधिकतम 1 लाख रुपये का जुर्माना या 2 वर्ष तक का कारावास हो सकता है। इसी प्रकार, निर्माण स्थलों का पंजीकरण न कराने पर 2 हजार रुपये का जुर्माना या 3 माह तक का कारावास हो सकता है। विभाग ने सभी योजनाकारों को किसी भी प्रकार की दंडात्मक कार्रवाई से बचने के लिए अपने संगठन और निर्माण कार्य का तत्काल पंजीकरण सुनिश्चित करने के लिए सतर्क किया है।

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