28/12/24

हरियाणा कैबिनेट ने केंद्रीय सशस्त्र बलों और सीएपीएफ के शहीदों के परिवारों के लिए 1 करोड़ रुपये की अनुग्रह राशि को मंजूरी दी

चंडीगढ़, 28 दिसंबर: हरियाणा मंत्रिमंडल की मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की अध्यक्षता में हुई बैठक में केंद्रीय सशस्त्र बल कर्मियों और केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (सीएपीएफ) कर्मियों के युद्ध में मृत्यु हो जाने पर उनके परिवारों को दी जाने वाली अनुग्रह राशि में संशोधन को मंजूरी दे दी है। संशोधित अनुग्रह राशि को 50 लाख रुपये से बढ़ाकर 1 करोड़ रुपये कर दिया गया है।

मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी ने 2024-25 के अपने बजट भाषण में शहीदों और उनके परिवारों के बलिदान को मान्यता देते हुए अनुग्रह राशि को 50 लाख रुपये से बढ़ाकर 1 करोड़ रुपये करने की घोषणा की थी। आज उसे मंत्रिमंडल में मंजूरी दे दी गई।

हरियाणा से संबंधित केंद्रीय सशस्त्र बल कर्मियों (सेना, नौसेना और वायु सेना) के शहीदों के परिवार के सदस्यों/निकटतम रिश्तेदारों को रक्षा अधिकारियों/गृह मंत्रालय द्वारा 'युद्ध में मृत" घोषित किए गए विभिन्न प्रकार की घटनाओं सहित अनुग्रह अनुदान दिया जाता है, चाहे किसी भी ऑपरेशन या ऑपरेशन के किसी निर्दिष्ट क्षेत्र में सशस्त्र बलों या केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल का कोई सदस्य युद्ध/आईईडी विस्फोट/आतंकवादी या उग्रवादी हमलों/सीमा पर मुठभेड़ और संयुक्त राष्ट्रीय शांति सेना में वास्तविक आधिकारिक कर्तव्यों के निष्पादन में शहीद हो, जिसमें वाहन दुर्घटना, हृदय गति रुकना, हवाई दुर्घटना और प्राकृतिक आपदाएं शामिल हैं, जिनमें कर्तव्यों के निष्पादन के प्रति असाधारण साहस और निर्णय की आवश्यकता होती है।

 सीएपीएफ कर्मियों के मामले भारत सरकार के गृह मंत्रालय के अधिकार क्षेत्र में आते हैं।  युद्ध में शहीद हुए हरियाणा के सीएपीएफ कर्मियों के परिवारों को अनुग्रह राशि का भुगतान दिया जाता है, जो अपने प्राणों की आहुति देते हैं। जैसे कि युद्ध में परिचालन क्षेत्र में सेवा करते समय या आतंकवादी/आतंकवादी हमले के दौरान प्राकृतिक आपदाओं, चुनाव, बचाव कार्यों आदि के दौरान अपनी ड्यूटी के दौरान जिनकी मृत्यु हो जाती है।

एचपीएससी पोर्टल पर विभिन्न पदों के लिए पंजीकरण प्रक्रिया के दौरान आधार प्रमाणीकरण होगा अनिवार्य 

हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी की अध्यक्षता में आज यहां हुई मंत्रिमंडल की बैठक में हरियाणा लोक सेवा आयोग (एचपीएससी) द्वारा आयोजित ग्रुप ए और बी पदों के लिए परीक्षाओं में उपस्थित होने वाले उम्मीदवारों के लिए आधार प्रमाणीकरण सेवाओं के उपयोग को मंजूरी दी गई। एचपीएससी पोर्टल पर इन पदों के लिए पंजीकरण प्रक्रिया के दौरान आधार प्रमाणीकरण अनिवार्य होगा। आधार प्रमाणीकरण की शुरुआत का उद्देश्य आवेदन प्रक्रिया को सुव्यवस्थित करना, धोखाधड़ी करने वाले उम्मीदवारों पर अंकुश लगाना और डी-डुप्लीकेशन के माध्यम से उम्मीदवारों के डेटा की सटीकता सुनिश्चित करना है। यह कदम भर्ती प्रक्रिया की विश्वसनीयता को बढ़ाएगा, जिससे प्रतियोगी परीक्षाओं में जनता का विश्वास और बढ़ेगा।

आधार प्रमाणीकरण उम्मीदवारों की पहचान सत्यापित करने में मदद करता है, जिससे धोखाधड़ी वाले आवेदन और प्रतिरूपण की संभावना कम हो जाती है। यह आवेदन प्रक्रिया को सरल बनाता है, सटीक और प्रमाणित डेटा सुनिश्चित करता है। उम्मीदवारों को पंजीकरण के दौरान अपना आधार नंबर देना होगा और भर्ती प्रक्रिया के विभिन्न चरणों के दौरान बायोमेट्रिक सत्यापन (फिंगरप्रिंट या आईरिस स्कैन) से गुजरना होगा। इसके अलावा, नाम, जन्म तिथि और पते जैसे जनसांख्यिकीय विवरणों को आधार डेटाबेस के साथ क्रॉस-सत्यापित किया जाएगा। यह निर्णय सुशासन (सामाजिक कल्याण, नवाचार, ज्ञान) नियम, 2020 के लिए आधार प्रमाणीकरण के नियम 5 और इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के 8 मार्च, 2024 के निर्देश के तहत निर्धारित दिशानिर्देशों की अनुपालना सुनिश्चित करेगा।

हरियाणा मंत्रिमंडल ने यात्रा भत्ता नियमों में संशोधन को दी मंजूरी

मंत्रिमंडल की बैठक में हरियाणा सिविल सेवा (यात्रा भत्ता) नियम, 2016 में संशोधन को स्वीकृति प्रदान की गई। संशोधन के अनुसार, यदि प्रशिक्षण संस्थान या हरियाणा सरकार द्वारा आवास और भोजन की व्यवस्था की जाती है, लेकिन प्रशिक्षु द्वारा इसका लाभ नहीं उठाया जाता तो उसे इस नियम के प्रयोजन के लिए ऐसी व्यवस्था का लाभ उठाया हुआ माना जाएगा और कोई होटल शुल्क स्वीकार्य नहीं होगा। हालांकि, यदि प्रशिक्षण संस्थान या हरियाणा सरकार आवास और भोजन की व्यवस्था नहीं करती तो प्रशिक्षु की पात्रता के अनुसार होटल शुल्क की प्रतिपूर्ति की जाएगी।

मंत्रिमंडल की बैठक में उत्तर हरियाणा बिजली वितरण निगम लिमिटेड (यूएचबीवीएनएल) द्वारा वित्तीय वर्ष 2024-25 के दौरान पूंजीगत व्यय की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए 800 करोड़ रुपये के स्वीकृत नए पूंजीगत व्यय ऋण के विरुद्ध केनरा बैंक, सेक्टर-17 सी चंडीगढ़ के पक्ष में 800 करोड़ रुपये की राज्य सरकार की गारंटी प्रदान करने के लिए घटनोत्तर  स्वीकृति प्रदान की गई।

मंत्रिमंडल ने उत्तर हरियाणा बिजली वितरण निगम लिमिटेड (यूएचबीवीएनएल) द्वारा वित्तीय वर्ष 2024-25 के दौरान पूंजीगत व्यय की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए 400 करोड़ रुपये के स्वीकृत नए पूंजीगत व्यय ऋण के विरुद्ध बैंक ऑफ इंडिया, सेक्टर-17बी चंडीगढ़ के पक्ष में 400 करोड़ रुपये की राज्य सरकार की गारंटी प्रदान करने के लिए भी घटनोत्तर स्वीकृति प्रदान की। उत्तर हरियाणा बिजली वितरण निगम लिमिटेड एक सरकारी स्वामित्व वाली बिजली वितरण कंपनी है जो राज्य के दस उत्तरी जिलों में उपभोक्ताओं को बिजली की आपूर्ति करती है। इस कंपनी का संचालन हरियाणा विद्युत विनियामक आयोग द्वारा विनियमित किया जाता है।

हरियाणा मंत्रिमंडल ने शहीद के परिवार को भूखंड आवंटन की दी मंजूरी

हरियाणा मंत्रिमंडल ने विकास एवं पंचायत विभाग द्वारा शहीद उपनिरीक्षक श्री जय भगवान की पत्नी श्रीमती कमलेश शर्मा को शामलात देह भूमि से 200 वर्ग गज का भूखंड आवंटित करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। शहीद श्री जय भगवान फरीदाबाद जिले के बल्लभगढ़ ब्लॉक के गांव हीरापुर के निवासी थे।  उन्होंने 12 दिसंबर, 1995 को आतंकवाद विरोधी अभियान के दौरान अपने प्राणों की आहुति दी थी। श्रीमती कमलेश शर्मा के पास वर्तमान में कोई आवासीय मकान नहीं है। ऐसे में जयभगवान के परिवार के सम्मान के प्रतीक के रूप में यह भूखंड दिया जाएगा। यह निर्णय पंजाब ग्राम साझा भूमि (विनियमन) नियम, 1964 के नियम 13 के अनुरूप है। यह प्रावधान राज्य सरकार से पूर्व अनुमोदन के साथ ग्राम पंचायत को आवासीय उद्देश्यों के लिए 200 वर्ग गज तक शामलात देह भूमि उपहार में देने की अनुमति देता है। इस प्रावधान के तहत विशेष रूप से रक्षा और अर्धसैनिक बलों के उन सदस्यों को लाभ पहुंचाया जाता है जो गंभीर रूप से घायल हो गए हैं और विकलांग हो गए हैं, या युद्ध या आतंकवाद विरोधी अभियानों में शहीद हो गए हैं। शर्त यह है कि आश्रित परिवारों के पास पर्याप्त आवासीय सुविधा नहीं होनी चाहिए।

अब सत्याग्रहियों को मिलेगी 20 हजार रुपये प्रति माह पेंशन  

मंत्रिमंडल की बैठक में हिंदी आंदोलन-1957 के मातृभाषा सत्याग्रहियों के लिए पेंशन योजना में एक महत्वपूर्ण संशोधन को मंजूरी दी गई है। मातृभाषा सत्याग्रहियों की पेंशन बढ़ाने का भारतीय जनता पार्टी अपने संकल्प पत्र में भी वादा किया था जिसे आज मंत्रिमंडल की बैठक में मंजूरी दी गई।संशोधित योजना के अनुसार, लाभार्थियों के लिए पेंशन राशि तुरंत प्रभाव से 15,000 रुपये से बढ़ाकर 20,000 रुपये कर दी है। पेंशन राशि में वृद्धि के बावजूद, योजना की पात्रता मानदंड और अन्य नियम व शर्तें वही रहेंगी।

हरियाणा मंत्रिमंडल ने संविदा कर्मचारी (सेवा की सुरक्षा) अधिनियम, 2024 में संशोधन करने के लिए अध्यादेश को मंजूरी दी

मंत्रिमंडल की आज यहां हुई बैठक में हरियाणा संविदा कर्मचारी (सेवा की सुरक्षा) अधिनियम, 2024 में और संशोधन करने के लिए अध्यादेश लाने के निर्णय को मंजूरी दी गई। इस संशोधन के तहत, "एक कैलेंडर वर्ष में" वाक्यांश को "अनुबंधित सेवा की एक वर्ष की अवधि के दौरान" से बदल दिया जाएगा। यह संशोधन संविदा कर्मचारियों द्वारा उनके सेवा दिवसों की गणना के संबंध में उठाए गए अनुरोध को देखते हुए  किया जा रहा है। वर्तमान में, कर्मचारियों ने अनुरोध किया था कि 240-दिवसीय सेवा आवश्यकता की गणना कैलेंडर वर्ष के बजाय एक वर्ष की संविदा सेवा अवधि के दौरान वास्तविक दिनों की संख्या के आधार पर की जाए। वर्तमान प्रणाली ने मई और दिसंबर के बीच शामिल होने वाले कर्मचारियों के लिए चुनौतियां पेश कीं, क्योंकि उनके रोजगार के पहले वर्ष के सेवा दिवसों की पूरी तरह से गणना नहीं की जा रही थी। उदाहरण के लिए, जिन कर्मचारियों की ज्वाइनिंग की तिथि मई के बाद और दिसंबर से पहले पड़ती है, वे अपनी सेवा के पहले कैलेंडर वर्ष के लिए 240 दिन की सेवा की आवश्यकता को पूरा नहीं कर पाएंगे, जिससे उनकी नौकरी की सुरक्षा प्रभावित होगी। इसके अलावा, वर्ष 2024 के लिए, कर्मचारियों ने चिंता जताई कि 15 अगस्त, 2024 की कट-ऑफ-डेट तक दिनों की संख्या केवल 227 है, जो आवश्यक 240 दिनों से कम है। इन वास्तविक अनुरोधों के जवाब में, हरियाणा मंत्रिमंडल ने एक वर्ष की संविदा सेवा की अवधि के दौरान 240 दिनों की सेवा पर विचार करने के लिए संशोधन को मंजूरी दे दी है, जिससे इन मुद्दों का समाधान हो जाएगा।  अब संशोधन से संविदा कर्मचारियों के लिए नौकरी सुरक्षा बेहतर ढंग से सुनिश्चित होगी। हरियाणा संविदा कर्मचारी (सेवा की सुरक्षा) अधिनियम, 2024 के तहत, नौकरी की सुरक्षा का लाभ उन संविदा कर्मचारियों को मिलेगा जो 15 अगस्त 2024 से पहले 5 साल की संविदा सेवा पूरी कर लेंगे।

ईडीसी दरों में हर साल 10 प्रतिशत की वृद्धि करने के प्रस्ताव को कैबिनेट की मिली मंजूरी

 मंत्रिमंडल की बैठक में राज्य के विभिन्न संभावित क्षेत्रों के बाह्य विकास शुल्क (ईडीसी) की गणना के लिए इंडेक्सेशन मैकेनिज्म के संशोधन को मंजूरी दी गई।इंडेक्सेशन नीति वर्ष 2015 के लिए ईडीसी दरों पर आधारित थी और इनमें आज तक कोई वृद्धि नहीं की गई थी। इंडेक्सेशन नीति से पहले, ईडीसी दरों में हर साल 10 प्रतिशत की वृद्धि की जाती थी। तदनुसार, मंत्रिमंडल ने अब से हर साल ईडीसी दरों में 10 प्रतिशत की वृद्धि करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। मंत्रिमंडल ने भविष्य में इंडेक्सेशन दरों के निर्धारण के लिए आधार ईडीसी दरें तय करने के लिए एक परामर्शदाता की नियुक्ति को भी मंजूरी दी और जब तक आधार ईडीसी दरें निर्धारित नहीं हो जातीं, तब तक हर साल 1 अप्रैल से 10 प्रतिशत की वार्षिक वृद्धि प्रभावी रहेगी। इस मंजूरी से हरियाणा शहरी क्षेत्र विकास एवं विनियमन अधिनियम, 1975 की धारा 9ए के तहत नीति निर्देश जारी करने के साथ-साथ हरियाणा शहरी क्षेत्र विकास एवं विनियमन नियम, 1976 में संशोधन करने का मार्ग प्रशस्त होगा। उल्लेखनीय है कि वित्त मंत्री, लोक निर्माण (भवन एवं सड़क) मंत्री, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री तथा स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा मंत्री वाली मंत्रिमंडलीय उप-समिति की सिफारिशों पर इंडेक्सेशन मैकेनिज्म के तहत ईडीसी की दरें तय की गई थीं। वर्ष 2018 में सरकार ने गुरुग्राम और रोहतक सर्कल की ईडीसी दरों के निर्धारण का कार्य आईआईटी दिल्ली और फरीदाबाद, पंचकूला और हिसार सर्कल के लिए आईआईटी रुड़की को सौंपा था। हालांकि, दोनों संस्थानों ने ईडीसी दरों के निर्धारण का कार्य करने से इनकार कर दिया, जिसके कारण आज तक वही इंडेक्सेशन नीति और ईडीसी दरें जारी रहीं।

हरियाणा मंत्रिमंडल ने नगर एवं ग्राम नियोजन विभाग द्वारा पटौदी-हेली मंडी और फर्रुखनगर, जिला गुरुग्राम के संभावित क्षेत्रों को कम संभावित क्षेत्र से मध्यम संभावित क्षेत्र में संशोधित करने को मंजूरी दी

 हरियाणा मंत्रिमंडल की आज यहां मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी की अध्यक्षता में हुई बैठक में नगर एवं ग्राम नियोजन विभाग द्वारा जिला गुरुग्राम के पटौदी-हेली मंडी और फर्रुखनगर संभावित क्षेत्रों को कम संभावित क्षेत्र से मध्यम संभावित क्षेत्र में संशोधित करने को मंजूरी दी गई। पटौदी-हेली मंडी और फर्रुखनगर (जिला गुरुग्राम) के क्षेत्र वर्तमान में हरियाणा विकास और शहरी क्षेत्रों के विनियमन नियम, 1976 की 'अनुसूची' के अनुसार 'कम क्षमता वाले क्षेत्र' के अंतर्गत आते हैं, जिसमें विभिन्न संभावित क्षेत्र निर्धारित किए गए हैं जो निम्न, मध्यम, उच्च और अति संभावित क्षेत्र हैं। इस प्रकार यह देखा गया है कि ये क्षेत्र अब कॉलोनियों के विकास और संस्थानों, उद्योगों, गोदामों आदि जैसी अन्य गतिविधियों के लिए बहुत संभावित हो गए हैं। इसलिए, यह प्रस्ताव है कि पटौदी-हेली मंडी और फर्रुखनगर के क्षेत्रों को 'कम क्षमता वाले क्षेत्र' से 'मध्यम क्षमता वाले क्षेत्र' में अपग्रेड किया जा सकता है। इससे राज्य के खजाने में राजस्व में वृद्धि होगी। 1 अगस्त, 2024 को एक रेपरजेंटेशन प्राप्त हुई थी  जिसमें कहा गया था कि फर्रुखनगर और पटौदी-हेली मंडी के क्षेत्र कम क्षमता वाले क्षेत्र की श्रेणी में आते हैं, और इसलिए, बहुत कम राजस्व प्राप्तियां प्राप्त होती हैं। अनुरोध किया गया कि इन क्षेत्रों की श्रेणी को उच्च क्षमता वाले क्षेत्र में अपग्रेड किया जाए ताकि बाहरी विकास शुल्क, आंतरिक विकास शुल्क, लाइसेंस शुल्क, रूपांतरण शुल्क आदि के रूप में राजस्व प्राप्तियों में सुधार हो सके। फर्रुखनगर और पटौदी-हेली मंडी कस्बे गुड़गांव-मानेसर अर्बन कॉम्प्लेक्स (जीएमयूसी) के हाइपर पोटेंशियल जोन के बहुत करीब स्थित हैं। रिलायंस के मॉडल इकोनॉमिक टाउनशिप, केएमपी एक्सप्रेसवे और तेजी से विकसित हो रहे रेलवे नेटवर्क के कारण फर्रुखनगर ने डेवलपर्स का बहुत ध्यान आकर्षित किया है। इसी तरह, पटौदी-हेली मंडी में भी एनएच-8 और केएमपी एक्सप्रेसवे के करीब होने के कारण विकास की बहुत संभावनाएं हैं। इसलिए, फर्रुखनगर और पटौदी-हेली मंडी संभावित क्षेत्रों को अपग्रेड करके, हरियाणा सरकार लाइसेंस शुल्क और बाहरी विकास शुल्क, रूपांतरण शुल्क आदि की दरों में वृद्धि के कारण डेवलपर्स से अधिक राजस्व प्राप्तियां एकत्र करने में सक्षम होगी।

हरियाणा मंत्रिमंडल ने पटौदी-हेली मंडी और फर्रुखनगर को मध्यम क्षमता वाले क्षेत्रों में अपग्रेड करने को दी मंजूरी

मंत्रिमंडल की बैठक में जिला गुरुग्राम के पटौदी-हेली मंडी और फर्रुखनगर के संभाव्यता क्षेत्रों को कम संभाव्यता क्षेत्र से मध्यम संभाव्यता क्षेत्र में अपग्रेड करने के लिए संशोधन को मंजूरी दी गई। वर्तमान में, पटौदी-हेली मंडी और फर्रुखनगर को पंजाब अनुसूचित सड़क नियंत्रित क्षेत्र अनियमित विकास प्रतिबंध नियम, 1965 (नियम 1965) की ‘अनुसूची-IV’ के अंतर्गत ‘कम संभावित क्षेत्र’ के रूप में वर्गीकृत किया गया है। ये नियम भूमि के उपयोग को परिवर्तित करने के उद्देश्य से संभावित क्षेत्र के आधार पर नियंत्रित क्षेत्रों में रूपांतरण शुल्क की दरों को रेखांकित करते हैं। संशोधन के साथ, पटौदी-हेली मंडी विकास योजना और फर्रुखनगर विकास योजना के अंतर्गत नियंत्रित क्षेत्रों को अब मध्यम क्षमता वाले क्षेत्रों के रूप में वर्गीकृत किया जाएगा। यह परिवर्तन 1965 के नियमों की अनुसूची-IV में परिलक्षित होगा और हरियाणा अनुसूचित सड़कें और नियंत्रित क्षेत्र अनियमित विकास प्रतिबंध अधिनियम, 1963 के तहत लागू शुल्क और प्रभारों पर लागू होगा। इन क्षेत्रों को उन्नत करने का निर्णय इसलिए लिया गया है क्योंकि इनमें विकास की महत्वपूर्ण संभावनाएँ दिख रही हैं, जिसमें कॉलोनियों, संस्थानों, उद्योगों और गोदामों का विकास शामिल है। इस उन्नयन से क्षेत्र के आगे विकास की संभावनाएँ बढ़ेंगी और रूपांतरण शुल्क में वृद्धि के माध्यम से अधिक राजस्व प्राप्त होगा।

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