• 25/09/26

पर्यावरण संरक्षण की दिशा में कानून, तकनीक और जनभागीदारी, तीनों का समन्वय जरूरी :सदस्य सचिव, राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण मण्डल

एन.एस.बाछल, 25 सितम्बर, जयपुर।

पर्यावरण संरक्षण केवल कानूनों और नियमों के अनुपालन तक सीमित विषय नहीं है बल्कि विज्ञान, तकनीक, प्रशासन, उद्योग और जनभागीदारी के समन्वय से जुड़ी एक सतत प्रक्रिया है। इसी व्यापक दृष्टिकोण को समझने के उद्देश्य से भारतीय वन प्रबंधन संस्थान, भोपाल के प्रबंधन स्नातकोत्तर विद्यार्थियों ने राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण मण्डल का शैक्षणिक भ्रमण किया।

भ्रमण के दौरान विद्यार्थियों ने मण्डल की कार्यप्रणाली, पर्यावरणीय विनियमन, प्रदूषण नियंत्रण की व्यवस्थाओं तथा पर्यावरण संरक्षण से जुड़े कानूनी, वैज्ञानिक एवं तकनीकी पहलुओं को विस्तृत से समझा।

इस अवसर पर मण्डल के सदस्य सचिव कपिल चन्द्रवाल ने विद्यार्थियों से संवाद करते हुए कहा कि पर्यावरण संरक्षण के प्रभावी परिणामों के लिए कानून, आधुनिक तकनीक और जनभागीदारी के बीच बेहतर समन्वय आवश्यक है। उन्होंने कहा कि पर्यावरणीय चुनौतियां निरंतर बदल रही हैं और इनके समाधान के लिए वैज्ञानिक दृष्टिकोण एवं तकनीक आधारित निगरानी के साथ सभी हितधारकों की सक्रिय सहभागिता जरूरी है।

मण्डल की कार्यप्रणाली से कराया रूबरू —

शैक्षणिक भ्रमण के दौरान मुख्य पर्यावरण अभियंता विष्णु दत्त पुरोहित ने विद्यार्थियों को राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण मण्डल की कार्यप्रणाली एवं विभिन्न गतिविधियों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने मण्डल की नियामकीय भूमिका, प्रदूषण नियंत्रण, पर्यावरणीय निगरानी तथा उद्योगों के पर्यावरणीय अनुपालन से संबंधित व्यवस्थाओं से विद्यार्थियों को अवगत कराया।

जल एवं पर्यावरण संरक्षण कानूनों की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि की दी जानकारी—

अतिरिक्त मुख्य पर्यावरण अभियंता भुवनेश माथुर ने विद्यार्थियों को जल प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण अधिनियम तथा पर्यावरण संरक्षण अधिनियम की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और विकासक्रम की जानकारी दी। उन्होंने जल (प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण) अधिनियम, 1974 तथा पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 के गठन की पृष्ठभूमि, प्रमुख उद्देश्यों तथा पर्यावरण संरक्षण की दिशा में इनके महत्व के बारे में विस्तार से समझाया।

पर्यावरणीय कानूनों के कानूनी पक्षों पर हुआ संवाद—

वरिष्ठ पर्यावरण अभियंता विजय शर्मा ने विद्यार्थियों को पर्यावरणीय कानूनों के विभिन्न कानूनी पक्षों की जानकारी दी। उन्होंने पर्यावरणीय नियमों के अनुपालन, उद्योगों की कानूनी जिम्मेदारियों, मण्डल की नियामकीय भूमिका तथा पर्यावरणीय प्रावधानों के उल्लंघन की स्थिति में अपनाई जाने वाली प्रक्रियाओं के बारे में जानकारी दी।

विद्यार्थियों ने अधिकारियों से किया संवाद—

भ्रमण के दौरान विद्यार्थियों ने पर्यावरणीय कानूनों, औद्योगिक प्रदूषण नियंत्रण, निगरानी व्यवस्था, अपशिष्ट प्रबंधन, पर्यावरणीय अनुपालन तथा वर्तमान पर्यावरणीय चुनौतियों से जुड़े विभिन्न विषयों पर अधिकारियों के साथ संवाद किया। विद्यार्थियों ने मण्डल की कार्यप्रणाली एवं पर्यावरणीय विनियमन से जुड़े विषयों पर प्रश्न पूछे, जिनका अधिकारियों द्वारा विस्तारपूर्वक समाधान किया गया।

यह शैक्षणिक भ्रमण विद्यार्थियों के लिए पर्यावरण प्रबंधन के पुस्तकीय ज्ञान से आगे बढ़कर पर्यावरण संरक्षण के वास्तविक प्रशासनिक, कानूनी, वैज्ञानिक और सामाजिक स्वरूप को समझने का अनुभवात्मक अवसर बना। इस दौरान विद्यार्थियों को यह समझने का अवसर मिला कि प्रभावी एवं सतत पर्यावरण संरक्षण के लिए कानून, विज्ञान, आधुनिक तकनीक, प्रशासन, उद्योग और जनभागीदारी का समन्वित प्रयास आवश्यक है।

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