मध्यप्रदेश मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मादा चीता राधा को गांधी सागर अभयारण्य में छोड़ा।

एन.एस.बाछल, 21 सितम्बर, भोपाल।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने नीमच-मंदसौर जिले के गांधी सागर वन्यजीव अभ्यारण्य में मादा चीता राधा को छोड़ा। राधा अष्टमी के अवसर पर डॉ. यादव ने मादा चीता का नाम राधा रखा। सभी को बधाई देते हुए डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में शुरू की गई चीता परियोजना सफलता की मिसाल कायम कर रही है। साथ ही, मध्य प्रदेश में विलुप्त हो रही इस वन प्रजाति को पुनर्जीवित करने के प्रयास किए जा रहे हैं। पिछले साल छोड़े गए चीते पूरी तरह स्वस्थ हैं।

गांधी सागर अभयारण्य में एक और चीते को छोड़ना मध्य प्रदेश में चीता परियोजना के विस्तार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। मादा चीता राधा के गांधी सागर पहुंचने के बाद यहां चीतों की संख्या बढ़कर चार हो गई है। अभयारण्य में पहले से ही दो नर चीते प्रभास और पावक तथा एक मादा चीता धीरा मौजूद हैं। अब गांधी सागर में दो नर और दो मादा तेंदुए हैं।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्य प्रदेश में चीता परियोजना सफलतापूर्वक आगे बढ़ रही है, राज्य में चीतों की बढ़ती संख्या इसका प्रमाण है। हमारा सौभाग्य है कि मध्य प्रदेश वन्यजीव विविधता से समृद्ध है। चीता राज्य के साथ-साथ हमारा क्षेत्र बाघ राज्य, घड़ियाल राज्य और गिद्ध राज्य के रूप में भी जाना जाता है। असम से जंगली भैंसें भी लाई गई हैं और क्षेत्र में गजराज की संख्या भी बढ़कर लगभग 100 हो गई है। गांधी सागर अभयारण्य में छोड़े गए चीते वन्यजीव संरक्षण के साथ-साथ पर्यटन को बढ़ावा देंगे और स्थानीय नागरिकों के लिए रोजगार और आजीविका के नए अवसर पैदा करेंगे।

गांधी सागर अभयारण्य में चीता संरक्षण को और बढ़ावा मिला है। मादा चीता राधा का गांधी सागर में पुनर्वास मध्य प्रदेश में चीता परियोजना को आगे बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। गांधी सागर को चीतों के एक और प्रमुख आवास के रूप में विकसित किया जा रहा है। यहां वन विभाग की टीम द्वारा चीतों के स्वास्थ्य, व्यवहार और नए वातावरण में उनके अनुकूलन की निरंतर निगरानी की जाएगी। नई मादा चीता के आगमन से गांधी सागर में चीतों के संरक्षण और भविष्य में चीता प्रजनन की संभावनाओं को बढ़ाने के प्रयास किए जा रहे हैं।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने वन विभाग द्वारा प्रकाशित पुस्तिका "चीता का दूसरा घर गांधी सागर वन्यजीव अभ्यारण्य" का भी विमोचन किया।

गरोठ विधायक चंदर सिंह सिसोदिया, मानसा विधायक अनिरुद्ध माधव मारू और मुख्य वन संरक्षक डॉ. समिता राजौरा भी उपस्थित थे।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मीडिया से बातचीत में कहा कि राज्य की चीता परियोजना एशिया की पहली परियोजना है। एशिया से चीते विलुप्त हो गए थे, लेकिन प्रधानमंत्री मोदी के आशीर्वाद से राज्य सरकार ने संकल्प लिया और चीतों के पुनर्वास के लिए अभियान शुरू किया। अब इस क्षेत्र में चीतों की संख्या लगातार बढ़ रही है। जहां सैकड़ों साल पहले चीते विलुप्त हो गए थे, वहीं अब वे स्थानीय वातावरण में खेलते और उछलते-कूदते नजर आ रहे हैं। यह वन्यजीवों के प्रति 'जिन और गिने दो' के सिद्धांत पर आधारित उपलब्धि का प्रतीक है। हमारे जंगल आबाद हो रहे हैं यह हम सबके लिए सौभाग्य का है।

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