महिला सशक्तिकरण और आत्मनिर्भर भारत की अवधारणा को साकार करने के लिए सभी की भागीदारी आवश्यक है: राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मू

एन.एस.बाछल, 19 जून, भोपाल।

मध्य प्रदेश यात्रा के पहले दिन, बैतुल में आयोजित "आध्यात्मिक जागृति से आदिवासी समाज का सामर्थ्यकरण" सम्मेलन में विभिन्न उत्पादों की प्रदर्शनी/स्टॉल का दौरा करते हुए अध्यक्ष श्रीमती द्रौपदी मुर्मू ने आदिवासी समुदाय की महिलाओं द्वारा उत्पादित पारंपरिक उत्पादों की सराहना की। अध्यक्ष श्रीमती मुर्मू ने महिला सशक्तिकरण और आत्मनिर्भर भारत की दिशा में बैतुल में किए जा रहे प्रयासों की प्रशंसा की। कंपनी के माध्यम से रागी, बाजरा, कुटकी ज्वार और बाजरा जैसे पौष्टिक अनाजों से कुकीज़, पास्ता, नूडल्स, इंस्टेंट इडली डोसा, मिक्स दलिया और अन्य स्वास्थ्यवर्धक उत्पाद तैयार किए जा रहे हैं। निरीक्षण के दौरान राज्यपाल मंगुभाई पटेल, केंद्रीय जनजातीय मामलों के मंत्री दुर्गादास उइके और सार्वजनिक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा राज्य मंत्री नरेंद्र शिवाजी भी उपस्थित थे।

अध्यक्ष श्रीमती मुर्मू ने वोकल फॉर लोकल, लखपति दीदी और आत्मनिर्भर भारत के विजन को साकार करने की दिशा में विभिन्न स्वयं सहायता समूहों द्वारा किए जा रहे कार्यों की सराहना की। अध्यक्ष श्रीमती मुर्मू ने कहा कि उत्पादों के उत्पादन से महिलाओं की आय में वृद्धि हो रही है। स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाएं भारत को आत्मनिर्भर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। प्रदर्शनी में, सतपुदंचल प्रोड्यूसर कंपनी के 175 स्वयं सहायता समूहों के 2075 समूह विभिन्न प्रकार की गतिविधियों के माध्यम से प्रति माह 8 से 10 हजार रुपये की अतिरिक्त आय अर्जित कर रहे हैं।

अध्यक्ष श्रीमती मुर्मू ने श्री अन्ना द्वारा विशेष रूप से तैयार की गई पोषण प्रदर्शनी का भी निरीक्षण किया। इस प्रदर्शनी में 18 प्रकार के पौष्टिक व्यंजन प्रदर्शित किए गए थे। अध्यक्ष ने गौशालाओं द्वारा तैयार किए गए उत्पादों का भी निरीक्षण किया।

अध्यक्ष श्रीमती मुर्मू ने भारेवा शिल्प कला के स्टॉल का भी निरीक्षण किया। यहाँ पीतल, तांबा, कांसा आदि धातुओं से बनी आदिवासी महिलाओं की अनूठी धातु की मूर्तियाँ प्रदर्शित की गईं। इस स्टॉल में अध्यक्ष श्रीमती मुर्मू ने डोकरा कला के नाम से जानी जाने वाली धातु की मूर्तिकला में आदिवासी महिलाओं के कौशल और विशेषज्ञता की सराहना की। बलदेव बाघमारे ने अध्यक्ष को पीतल से बनी एक आदिवासी महिला की प्रतिमा भेंट की। अध्यक्ष श्रीमती मुर्मू ने वन आधारित उत्पादों के स्टॉल का भी निरीक्षण किया। इस स्टॉल में मुख्य रूप से आजीविका उद्यम और 'वोकल फॉर लोकल' के तहत उत्पादित उत्पाद प्रदर्शित किए गए, जिनमें मुख्य रूप से नंदा वन शहद, बैतुल सागौन और कुकरू कॉफी शामिल थे।

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