डिजिटल युग में एक सुरक्षित और जागरूक उपभोक्ता ही सशक्त उपभोक्ता होता है : मध्यप्रदेश
एन.एस.बाछल, 18 अगस्त, भोपाल।
डिजिटल बाज़ार ने खरीदारी और भुगतान को जितना आसान बनाया है, उतना ही इसने उपभोक्ताओं के लिए धोखाधड़ी, डेटा गोपनीयता और शिकायतों के त्वरित समाधान जैसी नई चुनौतियाँ भी खड़ी कर दी हैं। इस युग में, उपभोक्ता अधिकारों और सुरक्षित डिजिटल लेनदेन के बारे में जानकारी केवल जागरूकता का विषय नहीं, बल्कि उपभोक्ता सशक्तिकरण के लिए एक अनिवार्य शर्त बन गई है। इस बदलते परिदृश्य में, मध्य प्रदेश राज्य उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने भोपाल में डिजिटल उपभोक्ता अधिकारों, ऑनलाइन धोखाधड़ी और प्रभावी शिकायत निवारण पर विशेषज्ञों के साथ एक व्यापक विचार-विमर्श सत्र आयोजित किया।
कुशाभाऊ ठाकरे अंतर्राष्ट्रीय सभागार में आयोजित कार्यशाला का विषय था “डिजिटल उपभोक्ता सशक्तिकरण: अधिकार, निवारण और सुरक्षित लेनदेन”। मध्य प्रदेश राज्य नीति आयोग की सहभागिता से आयोजित इस कार्यशाला में न्यायिक अधिकारियों, प्रशासनिक अधिकारियों, अधिवक्ताओं और साइबर विशेषज्ञों ने डिजिटल बाजार में उपभोक्ताओं के सामने आने वाली चुनौतियों और उनके समाधानों पर अपने विचार साझा किए।
बाजार में बदलाव के साथ धोखाधड़ी की तस्वीर भी बदल रही है।
मध्य प्रदेश राज्य उपभोक्ता आयोग की अध्यक्ष न्यायमूर्ति सुनीता यादव की उपस्थिति में कार्यशाला का उद्घाटन किया गया। इस अवसर पर आयोग की सदस्य डॉ. मोनिका मलिक, रजिस्ट्रार श्रीमान शुक्ला, खाद्य, नागरिक आपूर्ति और उपभोक्ता संरक्षण विभाग के आयुक्त दिनेश जैन और उपभोक्ता बार के अध्यक्ष मोहन चौकसे उपस्थित थे।
सुनीता यादव ने कहा कि मोबाइल फोन और ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म अब लोगों के दैनिक जीवन का अभिन्न अंग बन गए हैं। डिजिटल मीडिया ने बाजार तक पहुंच और लेन-देन को आसान बना दिया है, लेकिन धोखाधड़ी और छल के तरीके भी उतनी ही तेजी से बदल रहे हैं। उन्होंने कहा कि शिकायत निवारण प्रणाली को सरल और सुलभ बनाया जाना चाहिए ताकि उपभोक्ता को शिकायत दर्ज कराने के लिए जटिल प्रक्रियाओं से न गुजरना पड़े। मजबूत कानूनों के साथ-साथ जागरूक नागरिकों की भी आवश्यकता है जो अपने अधिकारों को समझते हों और डिजिटल लेन-देन में सावधानी बरतें। उन्होंने उपभोक्ता जागरूकता संवाद में विधि के छात्रों और युवाओं को शामिल करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि सुरक्षित और निष्पक्ष डिजिटल वातावरण बनाने में नागरिक जागरूकता की भी उतनी ही महत्वपूर्ण भूमिका है।
डिजिटल सुविधा के साथ नई जिम्मेदारियां भी आईं
आयोग के रजिस्ट्रार श्रीमान शुक्ला ने कहा कि प्रौद्योगिकी और व्यापार की तेजी से बदलती प्रकृति ने उपभोक्ताओं के लिए सुविधा तो बढ़ाई है, लेकिन ई-कॉमर्स धोखाधड़ी, व्यक्तिगत जानकारी की चोरी और दुरुपयोग, ऑनलाइन वित्तीय धोखाधड़ी और डिजिटल लेनदेन से संबंधित शिकायतों का स्वरूप भी बदल रहा है। उन्होंने कहा कि डिजिटल माध्यमों से शिकायतों की निगरानी, मध्यस्थता और निवारण को अधिक प्रभावी बनाया जाना चाहिए।
डिजिटल प्रणाली 5.17 करोड़ उपभोक्ताओं तक पहुंच रही है
खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग के आयुक्त दिनेश जैन ने कहा कि विभाग सार्वजनिक वितरण प्रणाली और न्यूनतम समर्थन मूल्य आधारित खरीद के माध्यम से बड़ी संख्या में उपभोक्ताओं और किसानों से सीधे जुड़ा हुआ है। उन्होंने बताया कि लगभग 5.17 करोड़ उपभोक्ता सार्वजनिक वितरण प्रणाली से जुड़े हुए हैं। उन्होंने डिजिटल प्रणालियों के माध्यम से पारदर्शिता, जवाबदेही, समय पर भुगतान और शिकायत निवारण में हुए बदलावों की रूपरेखा प्रस्तुत की।
डेटा सुरक्षा से लेकर फर्जी समीक्षाओं तक कई तरह की चिंताएं हैं।
आयोग की सदस्य डॉ. मोनिका मलिक ने कहा कि डिजिटल बाजार के तेजी से विस्तार के साथ-साथ उपभोक्ता संरक्षण प्रणाली को भी लगातार विकसित करने की आवश्यकता है। उन्होंने विलंबित डिलीवरी, फर्जी ऑनलाइन समीक्षाएं, धोखेबाज संस्थाएं, उपभोक्ता डेटा का दुरुपयोग और व्यक्तिगत जानकारी की गोपनीयता जैसे मुद्दों को प्रमुख चुनौतियां बताया।
साइबर धोखाधड़ी को रोकने के लिए व्यावहारिक उपायों पर चर्चा करें
कार्यशाला के विभिन्न सत्रों में विशेषज्ञों ने उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019, ई-कॉमर्स में उपभोक्ता अधिकार, अनुचित व्यापार प्रथाएं, उत्पाद दायित्व, डिजिटल भुगतान धोखाधड़ी, साइबर अपराध और ऑनलाइन शिकायत निवारण जैसे विषयों पर चर्चा की। साइबर स्टेट सेल के पुलिस अधीक्षक श्री प्रणय नागवंशी ने साइबर अपराध की वर्तमान स्थिति और बदलते स्वरूपों पर विशेष संबोधन दिया।
अधिवक्ता यशवर्धन सिंह रघुवंशी ने "हर उपभोक्ता को जानने योग्य 10 बातें" विषय पर एक प्रस्तुति दी और उपभोक्ता अधिकारों से संबंधित महत्वपूर्ण पहलुओं को सरल तरीके से समझाया।
सुविधा के अलावा, एक विश्वसनीय डिजिटल बाज़ार की आवश्यकता है।
कार्यशाला में विशेषज्ञों की चर्चा का सार यह था कि डिजिटल परिवर्तन का उद्देश्य केवल लेन-देन को आसान बनाना ही नहीं होना चाहिए, बल्कि उपभोक्ताओं के लिए बाजार को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और भरोसेमंद बनाना भी होना चाहिए। इसके लिए डिजिटल रिकॉर्ड की उपलब्धता, शिकायत की स्थिति पर पारदर्शी जानकारी, समय पर समाधान और सुरक्षित डिजिटल भुगतान प्रणाली के साथ-साथ नेटवर्क या प्रमाणीकरण संबंधी समस्याओं के मामले में वैकल्पिक व्यवस्था की आवश्यकता है। मध्य प्रदेश राज्य नीति आयोग की प्रशासनिक अधिकारी सुश्री पूर्णिमा शर्मा ने धन्यवाद व्यक्त किया।
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