'खाकी वर्दी का योद्धा' पुस्तक का विमोचन : मध्यप्रदेश
एन.एस.बाछल, 13 सितम्बर, भोपाल।
वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी स्वर्गीय विजय रमन के जीवन और पुलिस सेवा के अनुभवों पर आधारित पुस्तक 'खाकी वर्दी का योद्धा' का विमोचन समारोह आज भोपाल के दुष्यंत कुमार मेमोरियल पांडुलिपि संग्रहालय में मध्य प्रदेश पब्लिक रिलेशंस सोसाइटी ऑफ इंडिया के तत्वावधान में पुलिस महानिदेशक कैलाश मकवाना की उपस्थिति में आयोजित किया गया।
इस अवसर पर कैलाश मकवाना ने दिवंगत विजय रमन के व्यक्तित्व और पुलिस सेवा को याद करते हुए कहा कि उनका जीवन ईमानदारी, कर्तव्यनिष्ठा, खुलेपन, नेतृत्व क्षमता और टीम के प्रति सम्मान का एक प्रेरणादायक उदाहरण रहा है।
उन्होंने कहा कि वरिष्ठ अधिकारियों का व्यक्तित्व और कार्यशैली आने वाली पीढ़ी के पुलिस अधिकारियों को दिशा प्रदान करती है और विजय रमन भी कई अधिकारियों के लिए मार्गदर्शक और प्रेरणा स्रोत रहे हैं।
कैलाश मकवाना ने कहा कि विजय रमन ने अपने लंबे पुलिस करियर के दौरान कई चुनौतीपूर्ण और महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों का निर्वहन किया। चंबल क्षेत्र में डकैतों की समस्या के खिलाफ अभियान, बस्तर में नक्सल विरोधी अभियान, जम्मू और कश्मीर में सेवाएं, बीएसएफ, विशेष सुरक्षा समूह (एसपीजी), चार प्रधानमंत्रियों की सुरक्षा व्यवस्था और केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) में उनकी सेवाएं उनके बहुआयामी और चुनौतीपूर्ण सेवा अनुभव को दर्शाती हैं।
उन्होंने कहा कि विजय रमन की कार्यशैली में सबसे महत्वपूर्ण बात यह थी कि वे चुनौतियों का सामना स्वयं करते थे। अपने निर्णयों में वे कर्तव्य, संगठन और टीम के हितों को व्यक्तिगत हितों से ऊपर रखते थे। इसी कारण वे अपने साथ काम करने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों के बीच सम्मान और विश्वास बनाए रखते थे।
पुलिस महानिदेशक ने कहा कि 'खाकी वर्दी का योद्धा' सिर्फ एक पुलिस अधिकारी के जीवन का दस्तावेज नहीं है, बल्कि इसमें पुलिस सेवा के विभिन्न चरण, चुनौतीपूर्ण परिस्थितियां, महत्वपूर्ण मिशन और वास्तविक अनुभव भी समाहित हैं। यह पुस्तक वर्तमान और भावी पुलिस अधिकारियों के लिए एक महत्वपूर्ण शिक्षण माध्यम बन सकती है। उन्होंने कहा कि यह पुस्तक पुलिस अधिकारियों के साथ-साथ पत्रकारों और आम पाठकों के लिए भी उपयोगी है, क्योंकि यह पुलिस सेवा के व्यावहारिक और मानवीय पहलुओं को समझने का अवसर प्रदान करती है।
कैलाश मकवाना ने कहा कि विजय रमन जैसे अधिकारियों का जीवन यह दर्शाता है कि पुलिस नेतृत्व केवल पद और अधिकार तक सीमित नहीं है, बल्कि विश्वसनीयता, व्यक्तिगत आचरण, निर्णय लेने की क्षमता और टीम का विश्वास अर्जित करने की सच्ची पहचान है। उनके जीवन और सेवा से जुड़ी कई घटनाएं अपने आप में बहुत प्रेरणादायक हैं।
इस अवसर पर पुलिस महानिदेशक कैलाश मकवाना ने दुष्यंत कुमार स्मारक पांडुलिपि संग्रहालय का निरीक्षण किया। उन्होंने संग्रहालय में संरक्षित साहित्यिक और ऐतिहासिक विरासत, पांडुलिपियों और अभिलेखीय सामग्री के बारे में जानकारी प्राप्त की और संग्रहालय की गतिविधियों और इसके महत्व से अवगत हुए।
दिवंगत विजय रमन की पत्नी वीणा रमन और उनके परिवार ने विजय रमन के व्यक्तित्व, पारिवारिक जीवन और पुलिस सेवा से जुड़ी यादें साझा कीं।
वक्ताओं ने दिवंगत विजय रमन के लंबे पुलिस सेवा जीवन, उनकी कार्यशैली, नेतृत्व क्षमता, कर्तव्यनिष्ठा और मानवीय संवेदनशीलता को याद किया और कहा कि ऐसे अधिकारियों के अनुभव केवल यादें नहीं हैं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए पुलिस सेवा के मूल्यों और कार्य संस्कृति की एक महत्वपूर्ण विरासत हैं।
पूर्व सेवानिवृत्त पुलिस महानिदेशक संतोष कुमार राउत, सुरेंद्र सिंह, सेवानिवृत्त महानिदेशक पवन जैन, वरिष्ठ सेवानिवृत्त आईपीएस अधिकारी और पूर्व मंत्री रुस्तम सिंह, राजनीतिक विश्लेषक गिरिजा शंकर, मध्य प्रदेश विद्युत वितरण कंपनी के वरिष्ठ जनसंपर्क अधिकारी मनोज कुमार द्विवेदी, आयुर्वेद और पंचकर्म विशेषज्ञ डॉ. रश्मी झा और पुलिस विभाग के कई वरिष्ठ सेवानिवृत्त अधिकारी भी उपस्थित थे।
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