11/08/26

ई-वे बिल एवं कर दस्तावेजों में अनियमितता पर वाणिज्यिक कर विभाग की सख्त कार्रवाई, कर चोरी की आशंका वाले मामलों में लाखों रुपये की कार्रवाई:राजस्थान

एन.एस.बाछल, 11 अगस्त, जयपुर।

वाणिज्यिक कर विभाग द्वारा माल परिवहन के दौरान ई-वे बिल, वैध कर चालान एवं अन्य आवश्यक दस्तावेजों की अनिवार्यता सुनिश्चित करने के लिए लगातार प्रभावी जांच एवं प्रवर्तन कार्रवाई की जा रही है। इसी क्रम में नागौर एवं चित्तौड़गढ़ जिलों में विभागीय अधिकारियों द्वारा विभिन्न मार्गों पर वाहनों की जांच के दौरान कर दस्तावेजों में गंभीर अनियमितताएं सामने आई हैं।

सिंथेटिक फ्लेवरिंग एसेंस से भरे वाहन पर 5.46 लाख रुपए की पेनल्टी—

नागौर सर्किल में एक वाहन दिल्ली से बेंगलुरु की ओर Synthetic Flavouring Essences का परिवहन कर रहा था। जांच के दौरान वाहन में माल के साथ वैध इनवॉइस एवं ई-वे बिल उपलब्ध नहीं पाया गया।

ड्राइवर द्वारा प्रस्तुत दस्तावेजों के अनुसार माल का मूल्य 70,800 रुपए तथा कर राशि 10,800 रुपए दर्शाई गई थी। प्रकरण में भौतिक सत्यापन के दौरान माल का मूल्य ₹15.18 लाख निर्धारित किया गया। प्रकरण में विभाग द्वारा कार्रवाई करते हुए ₹5,46,480 की आईजीएसटी पेनल्टी निर्धारित की गई, जिसे अधिकृत प्रतिनिधि द्वारा जमा कराया गया।

जीरा एवं सरसों के परिवहन में ई-वे बिल नहीं मिला—

नागौर सर्किल में अमरपुरा क्षेत्र में वाहन संख्या RJ19GL9100 को जांच के लिए रोका गया। वाहन जोधपुर से बागपत (उत्तर प्रदेश) की ओर जीरा एवं सरसों का परिवहन कर रहा था।

जांच के दौरान वाहन के साथ ई-वे बिल उपलब्ध नहीं पाया गया। प्रस्तुत बिल के अनुसार माल का कर-पूर्व मूल्य ₹25.15 लाख तथा कर राशि ₹1,25,750 थी। विभाग द्वारा दोनों संबंधित फर्मों की स्थिति की प्रारंभिक जांच की गई और वर्तमान में माल का भौतिक सत्यापन किया जा रहा है। सत्यापन के पश्चात माल के वास्तविक बाजार मूल्य एवं कर देयता का निर्धारण किया जाएगा।

चित्तौड़गढ़ में बिलों एवं ई-इनवॉइस में भी सामने आईं गंभीर विसंगतियां—

चित्तौड़गढ़ सर्किल मे पालखेड़ी (NH-48) क्षेत्र में वाहन संख्या RJ27GD6565 को रोका गया। वाहन दिल्ली से अहमदाबाद की ओर SS Utensils एवं Electronic Items लेकर जा रहा था।

भौतिक सत्यापन एवं दस्तावेजों की जांच में कई महत्वपूर्ण विसंगतियां सामने आईं। घोषित मात्रा की तुलना में 18 गैस स्टोव एवं 48 लीटर सोल्डरिंग फ्लक्स अतिरिक्त पाया गया। इसके अलावा 24 इनवॉइस में बोवेब पोर्टल के अनुसार अमान्य प्राप्तकर्ताओं का विवरण पाया गया तथा 9 मामलों में आपूर्तिकर्ताओं द्वारा ई-इनवॉइस जारी नहीं किए जाने की बात सामने आई।

प्रारंभिक जांच में यह भी पाया गया कि कुछ इनवॉइस का मूल्य कम दर्शाया गया प्रतीत होता है, जिससे ई-वे बिल जनरेशन की देयता से बचने की आशंका बनी। प्रस्तुत दस्तावेजों के अनुसार माल का कर योग्य मूल्य ₹4,22,940 था, जबकि प्रकरण में विभाग द्वारा ₹9,30,300 की संभावित कर/दायित्व राशि निर्धारित की गई है। प्रकरण में आगे की जांच एवं नियमानुसार कार्रवाई जारी है।

ई-वे बिल व्यवस्था की प्रभावी निगरानी पर जोर—

वाणिज्यिक कर विभाग द्वारा स्पष्ट किया गया है कि माल के अंतरराज्यीय एवं राज्य के भीतर परिवहन के दौरान ई-वे बिल, वैध टैक्स इनवॉइस, ई-इनवॉइस तथा वास्तविक माल की मात्रा एवं मूल्य में पारदर्शिता सुनिश्चित करना अनिवार्य है। विभागीय प्रवर्तन दलों द्वारा प्रमुख राजमार्गों एवं संवेदनशील मार्गों पर वाहनों की जांच लगातार की जा रही है।

विभाग की कार्रवाई का उद्देश्य कर चोरी एवं फर्जी/अमान्य दस्तावेजों के माध्यम से कर अपवंचन पर प्रभावी अंकुश लगाने के साथ-साथ ईमानदार करदाताओं के लिए समान एवं पारदर्शी कारोबारी वातावरण सुनिश्चित करना है।

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