खेतों में पर्याप्त नमी के बाद ही करें बोवाई : मध्यप्रदेश

एन.एस.बाछल, 07 जुलाई, भोपाल।

मौसम की अनिश्चितता के बारे में लगाए जा रहे अनुमानों के बाद भी किसान भाईयों को चिन्तित होने की आवश्यकता नहीं है। खरीफ की बुआई के लिए कुछ सावधानियां अपनाकर किसान उत्पादन में स्थिरता बनाए रख सकते हैं। कुछ जिलों में अल्प वर्षा को देखते हुए खरीफ फसलों की बोवाई में जल्दबाजी नहीं करनी चाहिए। जब तक खेतों में पर्याप्त नमी न हो जाए, तब तक बुआई करना जोखिम पूर्ण हो सकता है। कृषक कल्याण एवं कृषि विकास विभाग ने वैज्ञानिकों के परामर्श से किसानों को सलाह दी है। संचालक कृषि उमाशंकर भार्गव ने इस संबंध में मैदानी अमले को किसानों से सतत संपर्क करने के अधीनस्थ कार्यालयों को निर्देश जारी किए हैं। सामान्य रूप से 4 इंच यानि लगभग 1 बालिश्त की गहराई तक नमी होने तथा बतर आने के बाद बोवाई की आदर्श स्थिति मानी जाती है। वर्तमान में पूरी तरह मानसून की सक्रियता न होने के कारण बोवाई के लिए किसानों को प्रतीक्षा करने की आवश्यकता है। जिन किसान भाइयों के पास सिंचाई की पर्याप्तता हो उन्हें मृदा की उर्वरता बढ़ाने के लिये ढैंचा या सनई की बुवाई हरित खाद के रूप में करना चाहिये। जिन क्षेत्रों में पूर्व में वर्षा हुई है, वे भी हरित खाद या ग्रीन मैन्योरिंग हेतु फसलें बो सकते हैं। बुवाई के लिए तैयार खेतों में आधार खाद जैसे गोबर की खाद, वर्मी कम्पोस्ट एवं उर्वरक जैसे सुपर फॉस्फेट, म्यूरेट ऑफ पोटास और जिंक सल्फेट तथा जिप्सम आदि को खेत में बोवाई या छिड़काव द्वारा मिलाया जा सकता है।

कृषि सलाह के अनुसार किसान भाई, सोयाबीन के बीज का अंकुरण परीक्षण कर 70 प्रतिशत से अधिक अंकुरण क्षमता वाले बीजों का उपयोग करें। रोग एवं कीट प्रतिरोधी उपयुक्त ऐसी किस्मों का चयन करें जिनकी जल मांग भी कम हो। इसके लिये कृषि अधिकारियों से परामर्श लेना उपयोगी होगा। बुवाई से पूर्व बीजों को फफूंदनाशकों एवं जैव उर्वरकों से उपचारित करना आवश्यक है। सोयाबीन फसल की बुवाई में जलभराव एवं सूखे के प्रतिकूल प्रभावों को कम करने हेतु रिज- एंड फरो सीड ड्रिल, ब्रॉड बेड एंड फरो (BBF) सीड ड्रिल अथवा हस्तचालित सीड डिब्लर का प्रयोग करना उपयोगी है। इसी प्रकार धान की बोवाई के लिए श्री पद्धति अथवा सीधी बोवाई अपनाना लाभकारी है।

किसान भाइयों को वर्षा जल संचय के लिए हर संभव उपाय अपनाना चाहिये। इसके लिए खेत तालाबों, पोखर, सोक्ता पिट्, कुओं आदि में जल को रोकने का प्रबंध करना चाहिये। जल भराव वाले खेत के हिस्से में पानी रोकना तथा कुओं और नलकूपों को रिचार्ज करना भी वर्ष भर पानी उपयोग करने की दृष्टि से उपयोगी होगा। खरीफ फसलों में इंटर क्रापिंग या अंतरवर्ती खेती की सलाह भी दी गई है। एक ही खेत में एक से अधिक फसलें साथ बोना और एक फसल की एक से अधिक किस्में बोने से किसी भी संभावित जोखिम में कमी आती है। इसके अतिरिक्त किसानों को फसल बीमा करवाने की सलाह भी दी गई है। कृषि सलाह के अनुसार विभिन्न प्रसार माध्यमों से किसानों को मौसम की सूचनाओं पर ध्यान देने तथा उसके अनुकूल फसल कार्य करने के लिए भी आगाह किया जा रहा है।

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